Last Updated:
Nainital ki local news : तल्लीताल के कृष्णापुर इलाके में लोगों की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही. सड़क नहीं होने से लोगों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के तीन किलोमीटर से अधिक की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है. सड़क की मांग को लेकर स्थानीय लोग धरना-प्रदर्शन भी कर रहे हैं. अब इस मामले में एक नई चुनौती सामने आ गई है. भूगर्भ विज्ञानी डॉ. भास्कर पाटनी का कहना है कि लोगों को सड़क सुविधा मिलना जरूरी है, लेकिन बालियानाला की कमजोर भूगर्भीय संरचना को नजरअंदाज कर सड़क निर्माण खतरनाक साबित हो सकता है. यहां कई स्थानों पर चट्टानें टूटकर बिखर चुकी हैं, चट्टानों का चूरा मिट्टी में बदल चुका है. सड़क बनाने के लिए ऐसे हालात ठीक नहीं.
नैनीताल. सरोवर नगरी नैनीताल के तल्लीताल स्थित कृष्णापुर क्षेत्र के लोगों के लिए सड़क आज भी एक बड़ा सपना बनी हुई है. करीब तीन हजार से अधिक आबादी वाले इस क्षेत्र में सड़क सुविधा नहीं होने से लोगों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए लगभग तीन किलोमीटर से अधिक की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है. इससे स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से बाहर निकलने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सड़क की मांग को लेकर स्थानीय लोग धरना-प्रदर्शन भी कर रहे हैं. हालांकि, अब इस मामले में एक नई चुनौती सामने आई है. बालियानाला की संवेदनशील पहाड़ी पर सड़क निर्माण को लेकर भूगर्भ विज्ञानी डॉ. भास्कर पाटनी ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं जाहिर की हैं.
कृष्णापुर के लोगों की समस्या को देखते हुए भूगर्भ विज्ञानी डॉ. भास्कर पाटनी ने मौके का निरीक्षण किया. उन्होंने माना कि क्षेत्रवासियों को सड़क सुविधा मिलना बेहद जरूरी है, लेकिन बालियानाला की कमजोर भूगर्भीय संरचना को नजरअंदाज कर सड़क निर्माण करना खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे में लोगों को राहत देने के साथ ही पहाड़ की स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है. डॉ. पाटनी के मुताबिक, बालियानाला क्षेत्र के ट्रीटमेंट के लिए डीपीआर तैयार करने और सर्वेक्षण के दौरान पहाड़ के भीतर चट्टानों की कमजोर स्थिति सामने आई थी. यहां कई स्थानों पर चट्टानें टूटकर बिखर चुकी हैं और चट्टानों का चूरा मिट्टी जैसी स्थिति में बदल गया है. यही वजह रही कि सड़क सुविधा विकसित करने से पहले पहाड़ के उपचार और उसे स्थिर करने पर जोर दिया गया.
करना क्या होगा
लोकल 18 से डॉ. भास्कर पाटनी बताते हैं कि बालियानाला में पहाड़ का ट्रीटमेंट बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है. सिंचाई विभाग, परियोजना प्रबंधन सलाहकार (पीएमसी) और आईआईटी के सहयोग से यहां उपचार कार्य शुरू किया गया. पहाड़ को स्थिर रखने के लिए केबल एंकर, रॉक एंकर और दूसरी तकनीकी उपायों का सहारा लिया गया. उनके अनुसार, इस चुनौतीपूर्ण परियोजना का करीब 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. पहाड़ की कमजोर चट्टानों को ग्राउटिंग जैसी तकनीकों से मजबूती देने का प्रयास किया गया है. ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान तैयार किए गए अस्थायी रास्ते को सीधे वाहनों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है.
वाहनों के दबाव खतरनाक
डॉ. पाटनी ने आगाह किया कि बालियानाला में निर्माण कार्य के लिए बनाए गए अस्थायी रास्ते पर अगर नियमित रूप से वाहनों का आवागमन शुरू किया जाता है, तो पहाड़ पर अतिरिक्त भार पड़ेगा. वाहनों की आवाजाही से पैदा होने वाले कंपन और गतिशील बल के कारण कमजोर चट्टानों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है. इससे चट्टानों के खिसकने, पहाड़ में दोबारा दरारें आने और भूस्खलन का खतरा बढ़ने की आशंका है. पहाड़ को बड़ी मुश्किल से स्थिर किया गया है. ऐसे में बिना तकनीकी जांच और सुरक्षा आकलन के इस रास्ते को वाहनों के लिए खोलने का निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए. किसी भी तरह का निर्माण करने से पहले पहाड़ी की मौजूदा स्थिति, भार सहने की क्षमता और संभावित जोखिमों का आकलन करना जरूरी है.
वैकल्पिक मार्ग क्यों जरूरी
डॉ. पाटनी के मुताबिक, कृष्णापुर के लोगों को सड़क सुविधा उपलब्ध कराने के लिए दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है. शुरुआती स्तर पर बालियानाला में निर्माण कार्य के लिए तैयार की गई बेंचों को और मजबूत करने की संभावना पर चर्चा की जा रही है. क्षेत्र तक पहुंचने के लिए किसी वैकल्पिक मार्ग की संभावनाएं तलाशने पर भी विचार किया जा रहा है. डॉ. पाटनी कहते हैं कि स्थानीय लोगों को इतनी दूर से पैदल आते देख उन्हें भी दुख होता है. लोगों की परेशानी को दूर करना जरूरी है, लेकिन समाधान ऐसा होना चाहिए जिससे भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का खतरा पैदा न हो.