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मध्य प्रदेश के सबसे ज्यादा धान उत्पादक जिलों में शामिल बालाघाट में धान खरीदी शुरू होने से पहले ही किसान परेशान हैं. कोई सर्वर की समस्या से जूझ रहा है, तो किसी की फार्मर आईडी नहीं बनी. कहीं जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी है, तो कहीं पोर्टल पर किसानों के खाते ही नजर नहीं आ रहे. नतीजा यह है कि कई किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए पंजीयन नहीं करा पाए. सरकार के मुताबिक 10 अक्टूबर तक जिले में 1 लाख 27 हजार 80 किसानों का पंजीयन हुआ है, लेकिन किसान संगठनों का दावा है कि हजारों किसान अब भी पंजीयन से वंचित हैं.
बालाघाट में किसान क्यों हैं परेशान
चितरंजन/बालाघाट. बालाघाट जिले में धान किसानों की परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बार प्रयास करने के बाद भी किसान अपना पंजीयन नहीं करा पाए. कुम्हारी गांव के किसान चंद्रकांत रनगिरे चार से पांच बार पंजीयन कराने पहुंचे, लेकिन पोर्टल पर उनका खाता ही नजर नहीं आया. वहीं, किसान चमन लिल्हारे भी सर्वर और पोर्टल की समस्या से परेशान रहे.
किसानों का कहना है कि पंजीयन कराने के लिए वे लगातार प्रयास करते रहे, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. अब धान खरीदी का समय नजदीक आने के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही है. किसानों को उम्मीद थी कि सरकार की ओर से घोषित 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उनकी उपज खरीदी जाएगी, लेकिन पंजीयन नहीं होने पर वे इस व्यवस्था का लाभ कैसे उठा पाएंगे, यह बड़ा सवाल है.
किसानों की ये मांगे
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 10 अक्टूबर तक बालाघाट जिले में कुल 1 लाख 27 हजार 80 किसानों का पंजीयन हुआ है. हालांकि, किसान संगठनों का कहना है कि बड़ी संख्या में किसान तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं के कारण पंजीयन नहीं करा पाए. इसके पीछे सोसायटी कर्मचारियों की हड़ताल, सर्वर की समस्या, फार्मर आईडी नहीं बनना और जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसी वजहें बताई जा रही हैं. किसानों की मांग है कि पंजीयन की तारीख बढ़ाई जाए, ताकि छूटे हुए किसानों को भी अपनी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने का मौका मिल सके. किसान गर्जना संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन रेल रोको आंदोलन कर सकता है. वहीं, कलेक्टर आदित्य सिंह का कहना है कि छूटे हुए किसानों के मामलों में सही कारण पाए जाने पर शासन के निर्देशानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
समय रहते समाधान जरूरी
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंजीयन से वंचित किसानों को राहत कब मिलेगी? धान की फसल तैयार होने के बाद किसान चाहते हैं कि उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, लेकिन पंजीयन की प्रक्रिया में आई बाधाएं उनके लिए नई मुश्किल बन गई है. अगर समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो किसानों को मजबूरी में खुले बाजार में कम कीमत पर धान बेचनी पड़ सकती है. ऐसे में किसानों की मांग है कि सरकार पंजीयन की तारीख बढ़ाने के साथ तकनीकी और दस्तावेजी समस्याओं का तत्काल समाधान करें, ताकि कोई भी पात्र किसान समर्थन मूल्य पर धान बेचने के अवसर से वंचित न रहे. अब देखना होगा कि सरकार किसानों की इस मांग पर क्या फैसला लेती है.