शादी के लिए लिया कर्ज और फिर टूट गया रिश्ता, क्या दूसरे पक्ष से वसूल सकते हैं रकम?

शादी के लिए लिया कर्ज और फिर टूट गया रिश्ता, क्या दूसरे पक्ष से वसूल सकते हैं रकम?


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शादी तय होने के बाद अगर दूसरा पक्ष पीछे हट जाए, तो क्या शादी पर खर्च किए गए लाखों रुपये वापस मिल सकते हैं? फरीदाबाद सेक्टर-12 कोर्ट के एडवोकेट मोहन तिवारी से जानिए, ऐसे मामले में कानूनी कार्रवाई कैसे करें, खर्च के कौन से सबूत जरूरी हैं और धोखाधड़ी होने पर कहां शिकायत दर्ज कराएं.

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फरीदाबाद: शादी के लिए परिवार अपनी जमा पूंजी खर्च करते हैं और कई बार लाखों रुपये का कर्ज भी लेते हैं. ऐसे में शादी तय होने के बाद अगर दूसरा पक्ष पीछे हट जाता है, तो परिवार के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो जाती है. लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या शादी पर खर्च किया गया पैसा वापस मिल सकता है और इसके लिए कानूनी रास्ता क्या है. लोकल18 से बातचीत में फरीदाबाद सेक्टर-12 कोर्ट के एडवोकेट मोहन तिवारी ने इस बारे में जानकारी दी.

शादी का खर्च वापस लेने के लिए क्या करें

एडवोकेट मोहन तिवारी बताते हैं कि शादी का खर्च वापस मिलने का मामला पूरी तरह परिस्थितियों पर निर्भर करता है. इसमें यह देखा जाता है कि शादी के लिए कितना पैसा खर्च किया गया, भुगतान किस तरह किया गया और दोनों पक्षों के बीच क्या बातचीत हुई थी. अगर दूसरा पक्ष शादी तय होने के बाद पीछे हट जाता है, तो पीड़ित परिवार दीवानी न्यायालय में केस दायर कर सकता है. इसके लिए खर्च से जुड़े सभी सबूत अदालत में पेश करने होंगे.

खर्च का कानूनी सबूत होना जरूरी

एडवोकेट मोहन तिवारी बताते हैं कि शादी में खर्च किए गए पैसे का दावा करने के लिए रसीद और भुगतान के दस्तावेज जरूरी होते हैं. इसमें बैंक्वेट हॉल की बुकिंग, कैटरिंग, कपड़े, संगीत और दूसरी व्यवस्थाओं पर हुए खर्च की रसीद शामिल हो सकती है. बैंक से किए गए भुगतान का रिकॉर्ड भी मददगार हो सकता है. अदालत में यह साबित करना होगा कि कितना खर्च हुआ और शादी टूटने के लिए कौन जिम्मेदार था. इसके बाद ही मामले की परिस्थितियों के आधार पर मुआवजे के दावे पर विचार किया जा सकता है.

धोखाधड़ी होने पर कहां करें शिकायत

एडवोकेट मोहन तिवारी बताते हैं कि अगर शादी तय करते समय धोखाधड़ी की गई है, तो पीड़ित परिवार पुलिस में शिकायत दे सकता है. शिकायत में पूरी घटना, दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत और उपलब्ध सबूतों की जानकारी देनी चाहिए. शादी कराने वाले लोगों से जुड़ी जानकारी भी मामले में उपयोगी हो सकती है. हालांकि, केवल शादी टूटने से धोखाधड़ी साबित नहीं होती. इसके लिए संबंधित तथ्यों और सबूतों का होना जरूरी है.

शादी के कर्ज और केस की समयसीमा क्या है

एडवोकेट मोहन तिवारी बताते हैं कि शादी के लिए लिया गया कर्ज कौन चुकाएगा और खर्च की भरपाई कैसे होगी, यह संबंधित परिस्थितियों और दस्तावेजों पर निर्भर करता है. शादी टूटने पर खर्च की पूरी रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती. अगर दूसरा पक्ष पीछे हट गया है, तो कानूनी सलाह लेकर समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए. केस के लिए दीवानी न्यायालय में दावा दायर किया जा सकता है. इसकी समयसीमा मामले की कानूनी स्थिति पर निर्भर करती है, इसलिए देरी किए बिना वकील से सलाह लेना जरूरी है.



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