लो जी, प्रियंका गांधी ने सपा गठबंधन के लिए फाइनल कर दिया A-B फॉर्मूला, इसके मायने समझते ही चकरा जाएंगा अखिलेश यादव?

लो जी, प्रियंका गांधी ने सपा गठबंधन के लिए फाइनल कर दिया A-B फॉर्मूला, इसके मायने समझते ही चकरा जाएंगा अखिलेश यादव?


Priyanka Gandhi Congress SP Alliance: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और कांग्रेस के बीच सीटों को लेकर मचा घमासान शायद अब शांत हो जाए. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी के सीनियर नेताओं के साथ मिलकर चुनावी सीटों का हिसाब-किताब तैयार कर लिया है. इसके लिए प्रियंका गांधी ने बकायदा ‘ए-बी’ फॉर्मूला भी बनाया है. तो आइए डिकोड करते हैं कि आखिर क्या है ‘ए-बी’ फॉर्मूला? क्यों इसके मायने समझकर चकरा जाएंगा अखिलेश यादव और PDA गठबंधन?

प्रियंका गांधी के साथ कांग्रेस की यूपी वाली तिकड़ी

मीडिया में छपी खबर के मुताबिक, प्रियंका गांधी ने 19 अक्टूबर को दिल्ली में यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के साथ एक मीटिंग की. मीटिंग करीब तीन घंटे तक चली. बताया जा रहा है कि बैठक में लगभग 175 विधानसभा सीटों पर चर्चा हुई है. यही नहीं बताया जा रहा है कि सपा के साथ गठबंधन और सीटों के बंटवारों पर नवंबर तक सहमति बन जाए. मीटिंग में ही A-B फॉर्मूला तैयार हुआ है?

क्या है कांग्रेस का A-B फॉर्मूला?

प्रियंका गांधी की अगुवाई में हुई यूपी कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की बैठक में करीब 175 संभावित सीटों पर गहन माथापच्ची की गई है.  इसके बाद पूरी रणनीति को दो मुख्य श्रेणियों (Categories) में बांट दिया गया:
‘A’ कैटेगरी (55 सीटें – नो कॉम्प्रोमाइज): यह कांग्रेस का वह अभेद्य किला है, जहां पार्टी किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं है. इसमें 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बढ़त दिलाने वाली 39 विधानसभा सीटें भी शामिल हैं. कांग्रेस का साफ कहना है कि इन 55 सीटों पर उनका संगठन सबसे मजबूत है.
‘B’ कैटेगरी (30 से 32 सीटें): ये वो सीटें हैं जहां अगर सपा और कांग्रेस मिलकर पूरी ताकत झोंक दें. तो भाजपा को आसानी से पटखनी दी जा सकती है. इस तरह कांग्रेस ने कुल 85 से 87 सीटों पर अपना सबसे कड़ा दावा ठोकने का मन बना लिया है.

अमेठी, रायबरेली और सहारनपुर पर ‘फुल क्लेम’

सस्पेंस यहीं खत्म नहीं होता है. इससे आगे की बात यह है कि कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि गांधी परिवार के गढ़ अमेठी और रायबरेली के साथ-साथ सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों पर सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस ही चुनाव लड़ेगी. चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से करीब 12 सीटें ऐसी हैं. जहां फिलहाल समाजवादी पार्टी के विधायक काबिज हैं. लेकिन कांग्रेस अपनी इस जिद से पीछे हटने को तैयार नहीं है. हालांकि, इन इलाकों में कांग्रेस का पिछला विधानसभा प्रदर्शन कमजोर रहा है. 2022 के चुनाव में अमेठी और रायबरेली लोकसभा क्षेत्रों की पांच-पांच विधानसभा सीटों में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी थी.

15 नवंबर की ‘डेडलाइन’ और प्लान ‘B’ भी तैयार!

बैठक में यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद की मौजूदगी में यह तय हुआ कि सीट-शेयरिंग की बातचीत को 15 नवंबर 2026 तक हर हाल में फाइनल कर लिया जाए ताकि प्रत्याशियों को तैयारी का पूरा मौका मिल सके. कांग्रेस शुरुआत में 150 सीटों की एक लंबी चौड़ी लिस्ट अखिलेश यादव की टेबल पर रखने जा रही है. लेकिन इसके साथ यह भी है कि अगर अखिलेश यादव से बात नहीं बनी तो कांग्रेस ने दूसरे दलों से भी गठबंधन का विकल्प खुला रख सकती है.

2024 के नतीजों से निकाला सीटों का गणित

कांग्रेस अपनी दावेदारी तय करने के लिए पिछले चुनावों के नतीजों का सहारा ले रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने यूपी की 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था और छह पर जीत दर्ज की थी. जबकि कांग्रेस 38 विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही थी और 42 में दूसरे स्थान पर रही थी. पार्टी इन क्षेत्रों को अपनी संभावित सीटों की सूची में शामिल कर रही है.

अखिलेश यादव के सामने कितनी सीटों की मांग?

मीडिया की माने तो कांग्रेस करीब 125 से 150 सीटों की सूची सपा के सामने रख सकती है. दूसरी ओर, सपा की ओर से कांग्रेस को 60 से 65 सीटें देने की चर्चा है. दोनों दलों की दावेदारी में बड़ा अंतर है. ऐसे में सीटों पर सहमति बनाने के लिए बातचीत अहम होगी. फिलहाल यह कांग्रेस की तैयारी है, दोनों दलों के बीच सीटों का अंतिम समझौता नहीं.

क्या PDA के समीकरण पर भी पड़ेगा असर?

कांग्रेस की सीटों की मांग का असर सपा के अपने चुनावी गणित पर भी पड़ सकता है. अखिलेश यादव को अपने मौजूदा विधायकों, सहयोगी दलों और संभावित उम्मीदवारों के बीच सीटों का तालमेल बैठाना होगा. वहीं, कांग्रेस अपनी संगठनात्मक मौजूदगी और पिछले चुनावों के प्रदर्शन के आधार पर ज्यादा सीटें चाहती है. अब देखना होगा कि बातचीत के दौरान दोनों दल कितनी सीटों पर सहमत होते हैं.

अखिलेश की क्या है तैयारी?

इधर कांग्रेस ने 87 सीटों का जाल बिछाया है. तो उधर सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी पीछे नहीं हैं. सपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, अखिलेश कांग्रेस को 60 से 65 से ज्यादा सीटें देने के मूड में नहीं हैं. अखिलेश लगातार ‘विनेबिलिटी’ (जीतने की क्षमता) को ही एकमात्र पैमाना बता रहे हैं और वह खुद प्रदेश की 403 में से करीब 350 सीटों पर साइकिल दौड़ाने की तैयारी कर रहे हैं. अब गेंद अखिलेश यादव के पाले में होने जा रही है. क्या वो प्रियंका गांधी की ’55 सीटों वाली वीटो शर्त’ को स्वीकार करेंगे, या फिर यूपी की सियासत में कोई नया गठबंधन का मोड़ देखने को मिलेगा? सस्पेंस गहरा होने वाला है.



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