दिल्ली पुलिस की कौन सी दलील से बढ़ गई थी सौरव दास और आशुतोष रांका की सांसें
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CJP Leaders Released: तिहाड़ जेल में बंद कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने रिहा करने का आदेश दिया है. दोनों पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान नियमों के उल्लंघन का आरोप था.
सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया है (फोटो: एजेंसी)
नई दिल्ली: तिहाड़ जेल में बंद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को आखिरकार राहत मिल गई है. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने और शांति बनाए रखने के बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के मामले में दोनों की न्यायिक हिरासत बुधवार को समाप्त हो रही थी. दिल्ली पुलिस ने उनकी हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की, लेकिन विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने दोनों की रिहाई का आदेश दे दिया.
इस मामले में बुधवार को दिनभर कानूनी हलचल रही. पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत में दखल देने से इनकार कर दिया था. हाईकोर्ट ने उन्हें एसईएम के सामने चल रही सुनवाई के फैसले का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर अपीलीय अदालत जाने की सलाह दी थी. इसके बाद एसईएम कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां दोनों की जमानत से जुड़े दस्तावेज भी पेश किए गए.
दिल्ली पुलिस ने क्यों मांगी थी तीन दिन की अतिरिक्त हिरासत?
सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर 14 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था. पुलिस का आरोप था कि उन्होंने प्रदर्शन स्थल के प्रतिबंधित हिस्से में प्रवेश किया और शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया. इसी मामले में 14 अक्टूबर को दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. इसके बाद 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई. यह अवधि बुधवार, 21 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी.
दिल्ली पुलिस ने एसईएम के सामने दोनों की जेल हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की. पुलिस की मांग पर अदालत में सुनवाई हुई और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया गया. हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस की ओर से हिरासत बढ़ाने के लिए दी गई नई दलीलों का पूरा विवरण सामने नहीं आया है.
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी तुरंत राहत
रिहाई की कोशिश में दोनों नेताओं ने दिल्ली हाई कोर्ट का भी रुख किया था. लेकिन हाई कोर्ट ने उनकी न्यायिक हिरासत में तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. अदालत ने दोनों को कहा कि वे पहले एसईएम के सामने चल रही सुनवाई के फैसले का इंतजार करें. अगर उस फैसले से उनकी शिकायत दूर नहीं होती है, तो वे अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं. इस आदेश के बाद दोनों की रिहाई का फैसला एसईएम कोर्ट की सुनवाई पर निर्भर हो गया था. बुधवार को इसी अदालत में दोनों को पेश किया गया और उनकी जमानत से जुड़े कागजात भी जमा किए गए.
जज ने सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा फैसला, फिर मिली रिहाई
बुधवार को सुनवाई के दौरान एसईएम ने पहले दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. दिल्ली पुलिस की ओर से हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की गई थी, जबकि दोनों की मौजूदा हिरासत की अवधि समाप्त हो रही थी. बाद में एसईएम ने दोनों नेताओं की रिहाई का आदेश दे दिया. इस तरह जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामले में उनकी हिरासत खत्म हो गई.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के विरोध में किए गए प्रदर्शन से जुड़ा है. सीजेपी के सदस्य जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगा रहे थे. पुलिस के अनुसार, 14 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका समेत पार्टी के कुछ सदस्यों पर प्रतिबंधित प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने और शांति बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप लगे थे. इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी.