IIT IIM Career Pressure: आज के समय में कई माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे बड़े स्कूलों में पढ़ें, अच्छे नंबर लाएं और आगे चलकर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) या इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) जैसे नामी संस्थानों में एडमिशन लें. इसके लिए बच्चे छोटी उम्र से ही पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुट जाते हैं. लेकिन क्या सफलता के लिए हर बच्चे को इसी रास्ते पर चलना जरूरी है? क्या अच्छी जिंदगी जीने के लिए किसी बड़े इंस्टीट्यूट की डिग्री होना ही सबसे अहम है? इन सवालों पर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है. खास बात यह है कि इस बहस में वे लोग भी शामिल हैं, जो खुद देश के बड़े एजुकेशनल इंस्टीट्यूट से पढ़ चुके हैं. उनका मानना है कि बच्चों पर अपनी पसंद का करियर चुनने का दबाव नहीं होना चाहिए. वे चाहते हैं कि बच्चे जिंदगी का आनंद लें, काम के जरूरी हुनर सीखें और अपनी पसंद से भविष्य बनाएं.
IIM अहमदाबाद से पढ़े शख्स की बात ने शुरू की बहस
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चर्चा एंटरप्रेन्योर आबिद हसन की एक पोस्ट के बाद शुरू हुई. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपने एक दोस्त से हुई बातचीत का जिक्र किया. उनका दोस्त इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) से पढ़ा है. बातचीत के दौरान दोस्त ने कहा कि वह अपने बच्चों पर IIT या IIM में एडमिशन लेने का दबाव नहीं डालना चाहता. अगर उसके बच्चे अपनी जिंदगी का आनंद लेते हुए अपनी पसंद का रास्ता चुनते हैं, तो उसे इससे भी खुशी होगी.
आबिद हसन ने इस बात को एक अलग नजरिए से देखा. उनका मानना था कि शायद बड़े संस्थानों में पढ़ने और करियर में आगे बढ़ने का एक फायदा यह भी है कि इंसान उस मुकाम तक पहुंच सके, जहां उसे अपनी जिंदगी के फैसले लेने के लिए किसी खास डिग्री या नौकरी की जरूरत महसूस न हो. इस विचार ने सोशल मीडिया पर लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या असली सफलता का मतलब सिर्फ बड़ी डिग्री और अच्छी नौकरी हासिल करना है?
दूसरी IIM ग्रेजुएट ने भी बताई अपनी सोच
इस चर्चा में एक और IIM अहमदाबाद से पढ़े व्यक्ति की सोच सामने आई. उनका कहना था कि कारोबार शुरू करने के लिए MBA की डिग्री होना जरूरी नहीं है. उन्होंने अपने बैच के कई ऐसे लोगों का उदाहरण दिया, जिन्होंने आगे चलकर अपना बिजनेस शुरू किया. इससे यह सवाल उठता है कि क्या अपना काम शुरू करने के लिए महंगे इंस्टीट्यूट से पढ़ाई करना जरूरी है या फिर सही जानकारी, हुनर और अनुभव के दम पर भी आगे बढ़ा जा सकता है?
उन्होंने बताया कि मेडिसिन से जुड़े मॉडर्न स्किनकेयर की फील्ड में उन्होंने कई जरूरी बातें अपनी BTech और IIM की पढ़ाई के अलावा दूसरे अनुभवों से सीखी हैं. शुरुआत में उन्होंने इंजीनियरिंग इसलिए चुनी थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि Math पसंद करने वाले छात्रों के लिए करियर के विकल्प सीमित हैं. बाद में उन्होंने अपनी रुचि के अनुसार IIM अहमदाबाद से MBA किया.
उनकी बात का मुख्य संदेश था कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद के हिसाब से पढ़ाई और करियर चुनने की आजादी मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा, “अपनी पसंद चुनने की आजादी ही मुझे सबसे ज्यादा पसंद है.” यानी जीवन में क्या करना है, इसका फैसला दूसरों की उम्मीदों के बजाय अपनी रुचि और जरूरतों के आधार पर होना चाहिए.
क्या सफलता के लिए IIT-IIM की डिग्री जरूरी है?
दरअसल, भारत में IIT और IIM जैसे इंस्टीट्यूट्स में एडमिशन लेना लाखों छात्रों का सपना होता है. इन संस्थानों से पढ़ने वाले कई लोगों को अच्छे करियर और नौकरी के अवसर मिलते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर छात्र को सफल होने के लिए इसी रास्ते पर चलना होगा.
किसी को नौकरी करना पसंद हो सकता है, तो कोई अपना कारोबार शुरू करना चाहता है. कुछ बच्चे आर्ट्स, स्पोर्ट्स, टेक्नोलॉजी या किसी दूसरी फील्ड में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं. ऐसे में सभी बच्चों से एक जैसी उम्मीद करना उनके लिए दबाव का कारण बन सकता है. जरूरी है कि उन्हें अपनी रुचि पहचानने और अलग-अलग फील्ड को समझने का मौका मिले.
इस चर्चा में कुछ लोगों ने यह भी कहा कि आर्थिक सुरक्षा होने से व्यक्ति को अपनी पसंद के काम करने और नए रास्ते चुनने की आजादी मिलती है. वहीं, बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है. पढ़ाई के साथ खेलना, दोस्तों के साथ समय बिताना और अपनी पसंद के काम करना भी उनके विकास का हिस्सा है.
बच्चों पर अपनी अधूरी इच्छाओं का बोझ न डालें
कई बार माता-पिता अपने बच्चों को वही करियर चुनने के लिए प्रेरित करते हैं, जिसे वे खुद सबसे अच्छा मानते हैं. कुछ माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे भी उनकी तरह IIT या IIM से पढ़ें. लेकिन हर बच्चे की रुचि, क्षमता और सपने अलग होते हैं. इसलिए जरूरी नहीं कि माता-पिता का पसंदीदा रास्ता ही बच्चे के लिए भी सही हो.
इस पूरी चर्चा का मतलब IIT, IIM या अच्छी शिक्षा को बेकार बताना नहीं है. इन संस्थानों से पढ़ाई करने के अपने फायदे हैं. असली सवाल यह है कि क्या किसी खास डिग्री को ही सफलता का एकमात्र पैमाना मानना सही है?
बच्चों को अच्छी शिक्षा देना, उन्हें हुनर सिखाना और सही फैसले लेने में मदद करना माता-पिता की अहम जिम्मेदारी है. लेकिन उनके भविष्य का हर फैसला पहले से तय कर देना जरूरी नहीं. हो सकता है कि किसी बच्चे के लिए बड़ी कंपनी में नौकरी करना सफलता हो, तो किसी दूसरे के लिए अपना कारोबार शुरू करना या किसी पसंदीदा फील्ड में काम करना.
आखिरकार, सफलता का मतलब केवल बड़ा पद, मोटी सैलरी या नामी इंस्टीट्यूट की डिग्री नहीं होना चाहिए. अपने काम से संतुष्ट रहना, जिंदगी का आनंद लेना और अपनी पसंद के फैसले लेने की आजादी भी उतनी ही मायने रखती है.