Delhi University, DU News: सेंट स्टीफंस कॉलेज में 2 शिक्षकों को नौकरी से निकाला, एक के 3 नंबर बने विवाद की वजह


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Delhi University Recruitment Controversy: दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाने-माने सेंट स्टीफंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती का विवाद अब दो शिक्षकों की नौकरी जाने तक पहुंच गया है.कॉलेज में पूर्व प्रिंसिपल के कार्यकाल के आखिरी दिनों में हुई 25 नियुक्तियों पर पहले ही सवाल उठ चुके थे.अब जांच में हिंदी और केमिस्ट्री विभाग के दो शिक्षकों की पात्रता में खामियां मिलने के बाद कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई की है.दिलचस्प बात यह है कि हिंदी के एक शिक्षक का अकादमिक स्कोर महज तीन अंक कम होने के बाद उनकी नियुक्ति विवादों में आ गई.दूसरी तरफ दिल्ली यूनिवर्सिटी की जांच समिति ने पूरी भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और पसंदीदा उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए हैं.

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दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेज में 2 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नौकरी गईZoom

Delhi University, DU News, DU St Stephen’s College News 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी सेंट स्टीफंस कॉलेज का मामला.

DU St Stephen’s College Assistant Professor Recruitment: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज में शिक्षकों की भर्ती को लेकर बड़ा मामला सामने आया है.कॉलेज प्रशासन ने हिंदी और केमिस्ट्री विभाग के दो असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं.इन दोनों शिक्षकों की नियुक्ति पूर्व प्रिंसिपल जॉन वर्गिस के कार्यकाल में हुई थी.जांच के दौरान इनकी नियुक्तियों में योग्यता और भर्ती नियमों से जुड़ी गड़बड़ियां सामने आई थीं.इसके बाद कॉलेज की गवर्निंग बॉडी ने मामले में कार्रवाई करने का फैसला लिया.एक शिक्षक ने इस्तीफा दे दिया जबकि दूसरे को टर्मिनेशन लेटर जारी कर नौकरी से हटा दिया गया.

नई प्रिंसिपल ने कराई जांच, दो शिक्षकों पर गिरी गाज

सेंट स्टीफंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती को लेकर उठे सवालों के बाद नई प्रिंसिपल सुसान एलियास ने एक जांच समिति बनाई थी.समिति ने हिंदी और केमिस्ट्री विभाग में हुई नियुक्तियों की जांच की.इस दौरान दोनों शिक्षकों की पात्रता और भर्ती प्रक्रिया में खामियां सामने आईं.जांच रिपोर्ट के आधार पर 29 सितंबर 2026 को कॉलेज की गवर्निंग बॉडी की बैठक हुई.इसमें दोनों शिक्षकों से इस्तीफा मांगने का फैसला लिया गया.केमिस्ट्री विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर ने इस्तीफा दे दिया, लेकिन हिंदी विभाग के शिक्षक ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया.इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने 7 अक्टूबर 2026 को हिंदी के शिक्षक को नौकरी से हटाने का पत्र सौंप दिया.

पूर्व प्रिंसिपल का कार्यकाल: पहले हुई थीं 25 नियुक्तियां

सेंट स्टीफंस कॉलेज में शिक्षकों की भर्ती का यह विवाद मई 2026 से जुड़ा है. कॉलेज में 9 मई 2026 को अलग-अलग विभागों में कुल 25 असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्तियां की गई थीं. खास बात यह है कि ये नियुक्तियां तत्कालीन प्रिंसिपल जॉन वर्गिस का कार्यकाल समाप्त होने से कुछ सप्ताह पहले ही हुई थीं. इन नियुक्तियों को लेकर कॉलेज के एड-हॉक शिक्षकों ने सवाल उठाए थे. इसके बाद 13 मई 2026 को एड-हॉक फैकल्टी ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया.मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने कहा था कि इस भर्ती से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल हैं, जिनकी जांच और सुनवाई जरूरी है.

 नियुक्ति में क्या गड़बड़ी मिली?

हिंदी विभाग के संबंधित शिक्षक को 11 मई 2026 को नियुक्ति दी गई थी. उन्होंने 29 मई को कॉलेज में कार्यभार संभाला था.हालांकि, उनके नियुक्ति पत्र में साफ लिखा था कि शैक्षणिक योग्यता और पात्रता की जांच के बाद ही नियुक्ति को मान्य माना जाएगा.नियुक्ति पत्र में यह शर्त भी शामिल थी कि यदि उम्मीदवार के दस्तावेजों में कोई गलत जानकारी मिलती है या जरूरी तथ्य छिपाए जाते हैं तो उसकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं.कॉलेज प्रशासन ने नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद 15 सितंबर 2026 को संबंधित शिक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया.शिक्षक ने 22 सितंबर को अपना जवाब दिया.इसके बाद उनके अनुरोध पर 29 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी दिया गया.

3 अंकों पर फंसा मामला

हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति में विवाद की मुख्य वजह उनके अकादमिक स्कोर में शामिल तीन अंक बने.कॉलेज के आदेश के मुताबिक शिक्षक ने पीएचडी के लिए मिली राजीव गांधी फेलोशिप के आधार पर तीन अतिरिक्त अंकों का दावा किया था हालांकि कॉलेज के स्क्रीनिंग मानदंडों के अनुसार शोध फेलोशिप को पुरस्कार की श्रेणी में मान्यता नहीं दी गई थी.इसी वजह से जांच के बाद शिक्षक का अकादमिक स्कोर 72 से घटाकर 69 कर दिया गया.कॉलेज प्रशासन ने इस अंतर को नियुक्ति की पात्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा माना.इसके बाद शिक्षक को इस्तीफा देने के लिए कहा गया लेकिन उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया.आखिरकार 7 अक्टूबर को उन्हें टर्मिनेशन लेटर जारी कर दिया गया.

असिस्टेंट प्रोफेसर ने दिया इस्तीफा

हिंदी विभाग के अलावा केमिस्ट्री विभाग की एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति भी जांच के दायरे में आई थी.कॉलेज प्रशासन को उनकी पात्रता में भी कमी मिली थी.इसके बाद कॉलेज ने संबंधित शिक्षिका को बुलाकर नियुक्ति और योग्यता से जुड़ी आपत्तियों की जानकारी दी.मामले से अवगत कराए जाने के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.अमर उजाला में छपी रिपोर्ट के मुताबिक बाद में केमिस्ट्री की इस शिक्षिका को अतिथि शिक्षक के तौर पर दोबारा नियुक्त किया गया है.वहीं हिंदी विभाग में अतिथि शिक्षक की नियुक्ति के लिए कॉलेज ने विज्ञापन जारी किया है.

भर्ती में मनमानी के आरोप लगाए

सेंट स्टीफंस कॉलेज में शिक्षकों की नियुक्तियों को लेकर केवल कॉलेज प्रशासन ही नहीं बल्कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्तर पर भी जांच कराई गई.भर्ती में नियमों की अनदेखी की शिकायतें मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने पूर्व दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) अध्यक्ष प्रोफेसर इंदर मोहन कपाही की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की थी.इस समिति ने भर्ती प्रक्रिया की जांच करने के बाद अपनी रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं की बात कही.समिति के मुताबिक कॉलेज प्रशासन ने शिक्षकों की नियुक्तियों में विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया.रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि भर्ती प्रक्रिया में मनमाने तरीके अपनाए गए जिससे ऐसे उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाया जा सके जो निर्धारित मानदंडों के अनुसार इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट होने की पात्रता भी नहीं रखते थे.

नियमों की अनदेखी का आरोप

प्रोफेसर इंदर मोहन कपाही की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सेंट स्टीफंस कॉलेज ने विश्वविद्यालय के भर्ती नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया.समिति के अनुसार कुछ पसंदीदा उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने और उन्हें नियुक्ति का अवसर देने के लिए निर्धारित शॉर्टलिस्टिंग मानदंडों की अनदेखी की गई.रिपोर्ट में इस बात पर भी सवाल उठाए गए कि भर्ती प्रक्रिया पर अदालत की रोक के बावजूद नियुक्त उम्मीदवारों की जॉइनिंग की प्रक्रिया क्यों जारी रखी गई.समिति ने कहा कि शिक्षकों की भर्ती में दिल्ली यूनिवर्सिटी के नियमों का पालन करना जरूरी है.इसके साथ ही नियुक्तियों में एकरूपता, पारदर्शिता और सभी उम्मीदवारों के लिए समान मानदंड लागू करने पर जोर दिया गया.

कोर्ट की अनुमति के बिना सिफारिशें लागू न करने की बात

कपाही समिति की रिपोर्ट में भर्ती से जुड़े नियमों के सख्त पालन की सिफारिश की गई है.समिति ने कहा है कि शिक्षकों की नियुक्तियों में पारदर्शिता होनी चाहिए और किसी भी उम्मीदवार को निर्धारित पात्रता मानदंडों से अलग जाकर लाभ नहीं दिया जाना चाहिए.इसके साथ ही यह बात भी सामने आई है कि समिति की सिफारिशों को अदालत की अनुमति के बिना लागू नहीं किया जाना चाहिए.सेंट स्टीफंस कॉलेज में मई 2026 में हुई 25 नियुक्तियों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब दो असिस्टेंट प्रोफेसरों की सेवाएं समाप्त होने तक पहुंच गया है.एक ओर कॉलेज प्रशासन ने पात्रता में कमी मिलने पर कार्रवाई की है वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय की जांच समिति ने पूरी भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल उठाए हैं.



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