Last Updated:
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अब 80 साल की उम्र में सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा निकाल रहे हैं. जबकि वह इस यात्रा को गैर राजनीति बता चुके हैं. वह यह भी कह चुके हैं कि यह कांग्रेस पार्टी की यात्रा नहीं है. तो सवाल यह है कि वह यहयात्रा निकाल ही क्यों रहे हैं. क्या वह राज्य में वापसी करना चाहते हैं या जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के लिए चुनौती बन रहे हैं. आइए जानते हैं.
सत्य सनातन यात्रा क्यों निकाल रहे हैं दिग्विजय सिंह?
राजनीति में नेताओं के लिए रिटायर होने की कोई कानूनी उम्र नहीं होती है. इसको दिग्विजय सिंह बिल्कुल चरितार्थ कर रहे हैं. वह उज्जैन से अयोध्या तक यात्रा निकाल रहे हैं. दिग्विजय सिंह विधायक, लोकसभा और राज्य सभा के सांसद, मध्य प्रदेश के 10 साल मुख्यमंत्री रह चुके हैं. इस समय उनकी उम्र करीब 80 साल है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल जो सिर उठाए खड़ा है. वह यह कि इस उम्र में भी उन्हें सत्य सनातन यात्रा निकालने की जरूरत क्यों पड़ी है? जबकि वह हिंदू धर्म को लेकर दिए गए अपने बयानों की वजह से विरोधियों के निशाने पर रहे हैं. क्या वह राज्य में वापसी करना चाहते हैं और 2028 में विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, जिसके लिए अभी से वोट बैंक तैयार कर रहे हैं. या फिर वह पहले से ही प्रदेश में सक्रिय कांग्रेस नेता जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर रहे हैं. आइए जानते हैं, इसके बारे में.
साल 2023 में कांग्रेस ने नई पीढ़ी को किया तैयार
साल 2023 में जब कांग्रेस को मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा था, तब कांग्रेस हाईकमान ने उमंग सिंघार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया था. इसके अलावा जीतू पटवारी को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनाया था. ऐसे में समझा गया था कि एमपी में ‘कमलनाथ-दिग्विजय युग’ का समापन हो गया है. लेकिन अब दिग्विजय की नई सनातन यात्रा ने यह तो साबित कर दिया है कि वह राज्य की राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं और अपने लिए अभी से जमीन तैयार कर रहे हैं.
कांग्रेस से अलग लाइन पर चल रहे हैं दिग्विजय सिंह
दिग्विजय कितना भी कह लें कि यह उनकी गैर राजनीति यात्रा है. लेकिन यह सभी जानते हैं कि इसके कितने राजनीतिक मायने हैं. वह यह भी कह चुके हैं कि यह उनकी निजी यात्रा है कांग्रेस की नहीं. इससे वह कांग्रेस से ही अलग लाइन बना रहे हैं. इससे जमीनी कार्यकर्ताओं पर पकड़ और वर्चस्व का खतरा मंडरा सकता है. क्योंकि जिस भी ब्लॉक और बूथ से उनकी यात्रा गुजरेगी. वहां वह कार्यकर्ताओं से संवाद तो करेंगे ही. इससे उनका गुट सक्रिय हो सकता है. जो कांग्रेस संगठन में जीतू पटवारी और उमंग सिंघार के फैसले लेने की ताकत को कम सकता है. यह बात भी जग जाहिर है कि सिंघार और दिग्विजय के बीच पहले से ही खटपट रही है. उमंग जब साल 2018 में एमपी सरकार में वन मंत्री थे, तो उन्होंने दिग्विजय को माफिया तक करार दिया था. इसके बाद सीएम हाउस में उनकी पेशी हुई थी.
जब दिग्विजय सिंह 950 किलोमीटर लंबी यात्रा निकालेंगे, तो उसे मीडिया कवरेज भी खूब मिलेगी. इससे शायद वह यह दिखाना चाहते हैं कि वह एमपी में अभी कांग्रेस को लीड कर सकते हैं और उनके पास नई पीढ़ी के नेताओं को लीड करने का दमखम है.
10 साल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह को राजनीति विरासत में मिली. उनके पिता बलभद्र सिंह भी बड़े नेताओं में शुमार थे. फिर 1977 में दिग्विजय ने पहली बार राघोगढ़ से चुनाव लड़ा था और उसमें जीत हासिल की थी. उस चुनाव के बाद दिग्विजय ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते गए. 1993 से लेकर 2003 तक वह मध्य प्रदेश के 10 साल के मुख्यमंत्री भी रहे. तब मध्य प्रदेश का बंटवारा नहीं हुआ था और छत्तीसगढ़ भी एमपी का हिस्सा था. इसके बाद वह लोकसभा और राज्यसभा में रहे, जहां उन्होंने दोनों सदनों में अपनी बात खुलकर रखी.