1914 में हुआ था पहला सर्वे, 2026 में पूरा हुआ सपना; ताड़ोकी-रायपुर पैसेंजर ट्रेन का होगा विस्तार


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Tadoki Raoghat New Rail Line: आजादी के 79 साल बाद अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार रावघाट से सीधे रायपुर तक यात्री ट्रेन चलेगी. मंत्री अश्विनी वैष्णव ताड़ोकी-रावघाट नई रेल लाइन का लोकार्पण करेंगे. क्सली चुनौतियों के बीच बनी ताड़ोकी-रावघाट रेल लाइन का आज एक नया अध्याय शुरू हो ने जा रहा है.

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आजादी के 79 साल बाद बस्तर को मिली सौगात,रावघाट से रायपुर तक चलेगी यात्री ट्रेनZoom

Tadoki Raoghat New Rail Line: बस्तर के रेल इतिहास में जल्द ही एक नया चैप्टर जुड़ने वाला है. आजादी के 79 साल बाद अबूझमाड़ का एंट्रेंस कहे जाने वाले रावघाट से अब सीधे राजधानी रायपुर तक यात्री ट्रेन चलेगी. केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ताड़ोकी-रावघाट नई रेल लाइन का लोकार्पण करेंगे. इसके साथ ही वे ताड़ोकी-रायपुर पैसेंजर ट्रेन को रावघाट तक बढ़ाने के लिए हरी झंडी भी दिखाएंगे. इसी कार्यक्रम में अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन और रायपुर-कुरूद ट्रेन सर्विस की भी शुरुआत होगी.

एक सदी से ज्यादा लंबा सफर
रावघाट तक रेल पहुंचने की कहानी बहुत पुरानी है. साल 1914 में अंग्रेजों के दौर में बंगाल नागपुर रेलवे ने यहां रेल लाइन के लिए पहला सर्वे किया था. 1917-18 में कुरूद से लिकमा के बीच जंगल की उपज ढोने के लिए फॉरेस्ट ट्राम चलने का भी जिक्र मिलता है. आजादी के बाद साल 1974 में परियोजना का तकनीकी और आर्थिक सर्वे शुरू हुआ. फिर 1998-99 में इसे रेल बजट में शामिल कर सैद्धांतिक मंजूरी मिली. 2005 से 2007 के बीच रेलवे, सेल और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच समझौता हुआ. साल 2008 में निर्माण का जिम्मा रेल विकास निगम लिमिटेड को सौंपा गया.

नक्सली खतरे के बीच बिछी पटरी
दल्लीराजहरा से रावघाट तक करीब 95 किलोमीटर लंबी लाइन बनाना आसान नहीं था. इलाका नक्सल प्रभावित होने से काम में कदम-कदम पर मुश्किलें आईं. नक्सली हमलों में तीन सुरक्षाकर्मियों और चार मजदूरों की जान चली गई. कर्मचारियों की हिफाजत के लिए हर पांच किलोमीटर पर सुरक्षा कैंप बनाए गए. खतरे की वजह से रोजाना सिर्फ पांच से छह घंटे ही काम हो पाता था.

आगे और भी योजनाएं आएंगी
बस्तर में रेल सुविधा बढ़ाने के लिए धमतरी-जगदलपुर ब्रॉडगेज लाइन की योजना भी है. प्रस्ताव के मुताबिक, यह लाइन कुरूद, धमतरी, नगरी और बोरई होते हुए जगदलपुर तक जाएगी. इससे बस्तर को एक दूसरा रेल रास्ता मिल जाएगा. इसके अलावा कोतावालसा-किरंदुल रेल मार्ग का दोहरीकरण भी चल रहा है. इससे लौह अयस्क और दूसरे सामान की ढुलाई बढ़ेगी. रावघाट तक यात्री ट्रेन पहुंचने से यहां के लोगों को रायपुर आना-जाना आसान हो जाएगा. माना जा रहा है कि इससे बस्तर के विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी.



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