जीना इसी का नाम है… 60 की उम्र में कोल इंडिया से रिटायर हुए, अब 68 की उम्र में बने रांची यूनिवर्सिटी में PG स्टूडेंट


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Inspiring Story : 68 साल की उम्र में भी सीखने का जज्बा बरकरार है. कोल इंडिया के जनरल मैनेजर पद से रिटायर डॉ. अशोक कुमार ने रांची यूनिवर्सिटी में पीजी साइकोलॉजी में दाखिला लिया है. इंजीनियरिंग में बीटेक, एमटेक और पीएचडी की डिग्री हासिल करने के बाद अब वह मानव मन को समझने के लिए पढ़ाई कर रहे हैं. उनकी कहानी साबित करती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती.

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60 की उम्र में कोल इंडिया से रिटायर हुए, अब 68 की उम्र में कर रहे पीजी Zoom

Inspiring Story : डॉ. अशोक कुमार ने पीएचडी भी किया है.

Inspiring Story : रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग सोचते हैं अब कुछ नया करने की उम्र खत्म हो गई है. लेकिन कोल इंडिया लिमिटेड में जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए इंजीनियर डॉ. अशोक कुमार ने अपनी जिंदगी की दूसरी पारी शुरू की है. डॉ. अशोक कुमार कोल इंडिया में 30 साल लंबी नौकरी के बाद 30 सितंबर 2018 को रिटायर हुए थे. इसके बाद उन्होंने एक और जगह काम किया और फिर से 2025 में रिटायर हुए.

लेकिन डॉ. अशोक कुमार ने अब फिर से पढ़ाई शुरू की. इसके लिए उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी में पीजी साइकोलॉजी में एडमिशन ले लिया और स्टूडेंट के तौर पर फिर से पढ़ाई शुरू की.

बीटेक के साथ पीएचडी की भी डिग्री

डॉ. अशोक कुमार ने एनआईटी जयपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था. इसे बाद ISM धनबाद से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट में एमटेक किया. इसके बाद उन्होंने इंजीनियरिंग में ही पीएचडी किया. कोल इंडिया लिमिटेड से 30 साल लंबी सर्विस के बाद रिटायर होकर भी काम करने का उनका जज्बा कम नहीं हुआ और उन्होंने जेपी ग्रुप में वाइस प्रेसिडेंट के पद पर ज्चाइन किया. वहां वह एडवाइजर तौर पर काम करते हुए वे 23 अक्टूबर 2025 को दूसरी बार रिटायर हुए.

समझेंगे मन की गहराइयां

आमतौर पर 68 साल की उम्र में लोग आराम करना पसंद करते हैं. लेकिन डॉ. अशोक ने एक अलग रास्ता चुना. मन को समझने की जिज्ञासा उन्हें वापस क्लासरूम तक खींच लाई. अब वे इंजीनियरिंग की मशीनों से निकलकर मानव मन की गहराइयों को पढ़ेंगे. उनका कहना है कि इंजीनियरिंग ने मुझे मशीनें समझना सिखाया, अब मनोविज्ञान से इंसान को समझना चाहता हूं. सीखना कभी खत्म नहीं होता. उनकी ये पढ़ने की ललक आज के युवाओं के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि डिग्री के लिए नहीं, जिज्ञासा के लिए पढ़ना ही असली शिक्षा है.

प्रतिदिन जाते हैं क्लास

डॉ. अशोक कुमार एक आम छात्र की तरह प्रतिदिन क्लास करते हैं. इनके अंदर सीखने की ललक ऐसी है कि विभाग के शिक्षकों से हमेशा सवाल पूछते हैं.
विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज हसन का कहना है कि पहली बार मैं देख रहा हूं कि कोई ऐसा भी छात्र है, जिसे जीवन में सबकुछ हासिल हो गया है इसके बाद भी पढ़ने की ललक है. ऐसे छात्र कम ही है विवि में जिनके अंदर सीखने की जिज्ञासा है.



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