Tau Kheti: छत्तीसगढ के सरगुजा जिले के रोपाखार के रहने वाले युवा किसान सम्मे आलम जिनकी उम्र 19 साल हो रही है और कॉलेज प्रथम वर्ष का छात्र है. ऐसे में पूर्वजों के बताएं हुए तरीके और पिता को खेती करते हुए देख बेटे ने भी 12वीं पास करने के बाद कृषि को ही अपना करियर बनाने का योजना बनाई, फिर क्या था अपने 10 एकड़ भूमि पर पहली दफा टाऊ की खेती किया है और खेती किसानी के बारीकियों को समझने की कोशिश में लगा. यही वजह है कि बाकी किसानों से अलग करने का फैसला किया है और बढ़ते रासायनिक खाद के दौर में उन्होंने जैविक गोबर खाद को प्राथमिकता दिया है और उसे पूरा उम्मीद है कि मुनाफा होगा ही. लेकिन मुनाफे का दायरा लगाना युवा के लिए अभी भी समझ से परे है लेकिन कहा की ताऊ की खेती से 10 गुना तक मुनाफा मिलता है, देखिए ये रिपोर्ट…
19 साल की उम्र में 10 एकड़ में टाऊ की खेती
सम्मे आलम की उम्र महज 19 साल है और वह कॉलेज के प्रथम वर्ष में पढ़ाई कर रहे हैं. इसके बावजूद उन्होंने खेती के प्रति अपनी रुचि को केवल शौक तक सीमित नहीं रखा, बल्कि करीब 10 एकड़ जमीन पर टाऊ की खेती करने का फैसला लिया सम्मे आलम बताते हैं कि यह उनका पहला साल है और पहली बार वह इतने बड़े पैमाने पर इस फसल का प्रयोग कर रहे हैं खेती की बारीकियां उन्होंने मोबाइल या इंटरनेट से नहीं, बल्कि अपने पिता और पूर्वजों को खेती करते देखकर सीखी हैं अब वह उसी पारंपरिक अनुभव के सहारे खुद खेती करके सीखने और समझने की कोशिश कर रहे हैं
गोबर की खाद के सहारे तैयार कर रहे फसल, रासायनिक खाद से बनाई दूरी
युवा किसान सम्मे आलम ने टाऊ की खेती में अपनी ओर से अलग तरीका अपनाने का प्रयास किया है. उनका कहना है कि खेत में उन्होंने गोबर की खाद डाली है और फिलहाल दूसरी रासायनिक चीजों का इस्तेमाल नहीं किया है. उनका उद्देश्य यह देखना है कि पारंपरिक तरीके और जैविक खाद के सहारे फसल का उत्पादन कैसा रहता है चूंकि यह उनका पहला प्रयोग है, इसलिए वह फसल की बढ़वार से लेकर पैदावार तक हर पहलू को समझने की कोशिश कर रहे हैं.इस अनुभव के आधार पर वह भविष्य में खेती की रणनीति तय करना चाहते हैं
खेत में आ चुके हैं फूल, अब दाने तैयार होने का इंतजार
सम्मे आलम के मुताबिक, फिलहाल उनकी टाऊ की फसल में फूल आ चुके हैं और पौधे बढ़ने की अवस्था में हैं अब उन्हें फूलों के पकने और दाने तैयार होने का इंतजार है इसके बाद फसल की कटाई और मड़ाई की जाएगी, जिससे टाऊ के दाने प्राप्त होंगे किसान को उम्मीद है कि फसल अच्छी होगी तो उनकी मेहनत रंग लाएगी हालांकि, अभी उत्पादन का वास्तविक आंकड़ा सामने नहीं आया है, इसलिए अंतिम पैदावार का आकलन कटाई और मड़ाई के बाद ही हो सकेगा
करीब 2 लाख रुपये की लागत, 3 से 4 लाख रुपये मुनाफे की उम्मीद
10 एकड़ में टाऊ की खेती करने के लिए सम्मे आलम अब तक लगभग 2 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं उन्हें उम्मीद है कि फसल से करीब 3 से 4 लाख रुपये तक का मुनाफा मिल सकता है हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि पहली बार खेती करने के कारण उन्हें उत्पादन और वास्तविक आमदनी का पूरा अनुमान नहीं है उन्होंने अपने पिता और परिवार के अनुभवों से सुना है कि टाऊ की खेती में अच्छा उत्पादन और कमाई संभव है इसी उम्मीद के साथ उन्होंने यह प्रयोग शुरू किया है अब फसल की पैदावार और बाजार में मिलने वाला भाव ही उनकी मेहनत के परिणाम को तय करेगा
रोटी सहित कई खाद्य पदार्थों में होता है इस्तेमाल
टाऊ का इस्तेमाल खाने-पीने की विभिन्न चीजों को बनाने में किया जाता है सम्मे आलम बताते हैं कि उनके घर में भी टाऊ का सेवन किया जाता है और इससे रोटी जैसी चीजें बनाई जाती हैं उनके अनुसार, इसकी उपज को बाहर भी भेजा जाता है यही वजह है कि उन्होंने इस फसल की खेती को एक संभावित कमाई के अवसर के रूप में देखा है अगर इस बार उन्हें अच्छा उत्पादन और बेहतर बाजार भाव मिलता है, तो वह आने वाले समय में टाऊ की खेती को और बड़े पैमाने पर करने की कोशिश करेंगे
पढ़ाई के साथ खेती भी, सफलता मिली तो बढ़ाएंगे खेती का रकबा
सम्मे आलम केवल टाऊ की खेती ही नहीं करते, बल्कि धान और गेहूं जैसी फसलें भी उगाते हैं कॉलेज में पढ़ाई के साथ खेती की जिम्मेदारी संभालना उनके लिए एक नया अनुभव है उनका कहना है कि अगर इस बार टाऊ की खेती का परिणाम अच्छा रहा, तो वह भविष्य में इसी फसल पर अधिक ध्यान देंगे और बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की कोशिश करेंगे फिलहाल, उनका पूरा ध्यान फसल की देखभाल और बेहतर पैदावार पर है.