महुआ को नई पहचान दे रहा बेतला का महुआ कैफे, प्रोटीन से लेकर चॉकलेट तक मिलते हैं कई प्रोडक्ट

महुआ को नई पहचान दे रहा बेतला का महुआ कैफे, प्रोटीन से लेकर चॉकलेट तक मिलते हैं कई प्रोडक्ट


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हमारे-आपके बीच से खाने-पीने की कई पुरानी चीजें धीरे-धीरे गायब होती जा रही हैं. इनमें से एक महुआ है. महुआ को काफी ताकतवर और पौष्टिक माना जाता है. हालांकि, इसकी बड़ी पहचान सिर्फ शराब उत्पादन तक रह गई. अब इससे लोग तमाम तरह के प्रोडक्ट बना रहे हैं जिन्हें लोग काफी पसंद भी कर रहे हैं.

पलामू: झारखंड के पलामू में महुआ की खूब पैदावार होती है. आमतौर पर महुआ का इस्तेमाल शराब उत्पादन के लिए होता है. अब इससे हटकर महुआ अपनी एक अलग पहचान भी बना रहा है. झारखंड के जंगलों और पहाड़ों में पाए जाने वाले महुआ के फूल का इस्तेमाल अब पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ कई नए खाद्य उत्पाद तैयार करने में भी किया जा रहा है. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के अंतर्गत बेतला में महुआ कैफे की शुरुआत की गई है. यहां महुआ से तैयार कई तरह के उत्पाद उपलब्ध हैं, जो लोगों को इसके नए उपयोगों से परिचित करा रहे हैं.

झारखंड की संस्कृति से जुड़ा है महुआ
झारखंड की सभ्यता और संस्कृति में महुआ का विशेष स्थान है. आदिवासी बहुल इस राज्य में महुआ के फूल का इस्तेमाल लंबे समय से पारंपरिक खाद्य पदार्थ तैयार करने में किया जाता रहा है. पलामू की पहचान भी यहां के जंगलों, प्राकृतिक संपदा और जनजातीय संस्कृति से जुड़ी है. इसके बावजूद महुआ को लेकर आम लोगों के बीच एक सीमित धारणा बनी हुई है. अधिकांश लोग इसे शराब बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फूल के रूप में ही जानते हैं. ऐसे में महुआ से बनने वाले दूसरे उत्पादों को बढ़ावा देना और लोगों को इसकी विविधता से परिचित कराना जरूरी है.

महुआ कैफे के जरिए बदल रही धारणा
बेतला में शुरू किए गए महुआ कैफे का उद्देश्य महुआ को एक नए रूप में पेश करना और इससे तैयार होने वाले उत्पादों को लोगों तक पहुंचाना है. इस कैफे का संचालन बरवाडीह की रहने वाली अमीषा कुमारी कर रही हैं. यहां आने वाले पर्यटक और स्थानीय लोग महुआ से बने अलग-अलग खाद्य उत्पादों का स्वाद ले सकते हैं. कैफे के माध्यम से महुआ को केवल पारंपरिक इस्तेमाल तक सीमित न रखकर खाद्य उत्पादों के रूप में भी पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है.

महुआ मिल्क टी से लेकर डार्क चॉकलेट तक
महुआ कैफे में सबसे खास आकर्षण महुआ मिल्क टी है. इसमें महुआ के फूल को पानी में उबालने के बाद दूध, चीनी और इलायची मिलाकर चाय तैयार की जाती है. इसके अलावा यहां नारियल महुआ लड्डू, महुआ डार्क चॉकलेट, महुआ पॉप्स, महुआ प्रोटीन बार और महुआ प्रोटीन सीड्स जैसे उत्पाद भी उपलब्ध हैं. महुआ सिरप भी यहां की खास पेशकश है. इसकी मदद से लोग घर पर भी महुआ से जुड़े विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार कर सकते हैं.

30 से 500 रुपये तक मिल रहे उत्पाद
महुआ कैफे में उत्पादों की कीमत लगभग 30 रुपये से लेकर 500 रुपये तक है. कैफे सुबह छह बजे से शाम 6:30 बजे तक खुला रहता है. यहां ग्राहकों की पसंद और ऑर्डर के अनुसार उत्पाद उपलब्ध कराए जाते हैं.

महुआ को नई पहचान दिलाने की पहल
कैफे संचालक अमीषा कुमारी के अनुसार, महुआ को ज्यादातर लोग शराब से जोड़कर देखते हैं. उनका प्रयास है कि लोग इसके दूसरे उपयोगों को भी जानें और महुआ से बने अलग-अलग उत्पादों का स्वाद लें. बेतला में शुरू की गई यह पहल महुआ की पारंपरिक पहचान को नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों को बढ़ावा देने के साथ-साथ महुआ आधारित उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि भी बढ़ सकती है.



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