बुर्के में किया सफर, सस्ते होटल में बिताई रात… नेपाल से नागपुर तक पुलिस को ऐसे दौड़ाती रही श्रद्धा दुबे

बुर्के में किया सफर, सस्ते होटल में बिताई रात… नेपाल से नागपुर तक पुलिस को ऐसे दौड़ाती रही श्रद्धा दुबे


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Shraddha Dubey Arrest: कारोबारी शिव शर्मा मौत मामले में संदिग्ध आरोपी श्रद्धा दुबे को पुलिस ने नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है, जिसके बाद अब पुलिस जांच में जुट गई है कि आखिर ये तीनों पुलिस को चकमा देकर फरार कैसे हुए. एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने बातचीत के दौरान बताया कि आखिर श्रद्धा कैसे पुलिस को इतने दिनों तक चकमा देती रही.

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श्रद्धा दुबे केस

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लखनऊ में चर्चित कारोबारी शिवा शर्मा मौत मामले को लेकर पुलिस लगातार संदिग्ध आरोपी श्रद्धा दुबे की तलाश में थी. श्रद्धा ने मीडिया से बात भी कर ली, लेकिन फिर भी पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई, जिसके बाद पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे थे. अब पुलिस ने श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश का नागपुर से गिरफ्तार कर लिया है, जिसके बाद अब पुलिस जांच में जुट गई है कि आखिर ये तीनों पुलिस को चकमा देकर फरार कैसे हुए.

श्रद्धा दुबे और अन्य दो संदिग्धों की गिरफ्तारी को लेकर अब एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश का बयान सामने आया है. एडीजी ने बताया कि आखिर कैसे पुलिस इन तीनों को नागपुर से गिरफ्तार कर पाई है. उन्होंने कहा कि लखनऊ पुलिस लगातार इन्हें ट्रैक करने की कोशिश कर रही थी और आखिर में 20 अक्टूबर की शाम को ही इन लोगों को गिरफ्तार करने में पुलिस को सफलता मिली है.

नेपाल से यूपी में श्रद्धा की इंट्री
अमिताभ यश ने बताया कि इनके फरार होने और पुलिस से बचने के तौर-तरीके लगभग एक प्रोफेशनल क्रिमिनल की तरह थे. श्रद्धा लगातार बुर्के में सफर करती थी. पुलिस को गुमराह करने के लिए वो सबसे पहले नेपाल गई और फिर वहां से वापस यूपी में दाखिल हुई, ताकि पुलिस को लगे कि वह अभी नेपाल में ही है. इसके बाद वह लखनऊ आई और एक चैनल को बाइट देने के बाद तत्काल यूपी से बाहर चली गई.

उन्होंने कहा कि श्रद्धा हमेशा छोटे होटलों में रुकती थी, जहां पहचान से जुड़ी औपचारिकताएं कम होती थीं. साथ ही कम्युनिकेशन के साधनों का इस्तेमाल भी बेहद सीमित रखती थी और किसी एक जगह पर ज्यादा समय तक नहीं रुकती थी. सफर के दौरान वह टैक्सी का इस्तेमाल करती थी.

पुलिस को श्रद्धा ऐसे देती थी चकमा
एडीजी अमिताभ ने आगे बताया कि नागपुर जाने के लिए भी उसने टैक्सी ली थी. वह बीच-बीच में वाहन बदल लेती थी, ताकि पुलिस के लिए उसकी लोकेशन का पता लगाना मुश्किल हो जाए. वह हर बार पुलिस के पहुंचने से करीब 10 से 12 घंटे पहले ही उस जगह को छोड़ देती थी. इस तरह वह पुलिस से लगातार 10 से 12 घंटे आगे रहती थी. यही वजह रही कि पुलिस को उस तक पहुंचने में थोड़ा समय लग गया.



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