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Bundi Village Pithoragarh: कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग पर कभी चहल-पहल और इंडो-चाइना ट्रेड का जीवंत केंद्र रहा सीमांत बूंदी गांव आज बदलाव के एक अहम मोड़ पर खड़ा है. लिपुलेख सड़क बनने के बाद भले ही आधिकारिक पड़ाव आगे खिसक गया हो, लेकिन 9 हजार फीट की ऊंचाई पर बसे इस गांव का नैसर्गिक सौंदर्य, होम स्टे संस्कृति और सामरिक महत्व आज भी पर्यटकों व यात्रियों को अपनी ओर खींच रहा है.
Bundi Village Pithoragarh: कैलाश-मानसरोवर यात्रा मार्ग पर एक छोटा सा गांव है बूंदी. बूंदी कभी मानसरोवर यात्रा का अहम पड़ाव हुआ करता था. लेकिन लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली सड़क बनने के बाद बूंदी अब यात्रा का पड़ाव नहीं है. बावजूद इसके बॉर्डर के इस गांव का अभी भी खास महत्व है. तकरीबन 9 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा बूंदी गांव हायर हिमालया जाने से पहले का अंतिम गांव है.
इसके बाद छियालेख की खड़ी चढ़ाई पार करके लिपुलेख दर्रे तक जाया जाता है. करीब 2 सौ परिवारों वाला यह गांव कैलाश-मानसरोवर यात्रा के साथ इंडो-चाइना ट्रेड का पड़ाव हुआ करता था.लेकिन 2020 में लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली सड़क बनने के बाद अब यहां कोई पड़ाव नहीं है. बूंदी के ग्रामीण सर्दियों में निचले इलाकों में आ जाते हैं. साल में सिर्फ 6 महीने ही यह गांव आबाद रहता है. इस गांव के ठीक सामने नेपाल का अपी पर्वत है. अपी पर्वत में कीड़ा जड़ी भी मौजूद है, जो यहां के लोगों की आजीविका का जरिया है.
आज भी सैलानियों की पहली पसंद
आज भी आदि कैलाश, कैलाश-मानसरोवर और ॐ पर्वत के दर्शनों के लिए जाने वाले यात्री बूंदी में कुछ समय के लिए रुकते हैं. बूंदी का प्राकृतिक सौंदर्य देखने वालों को अपनी ओर आकर्षित करता है. सैलानियों की सुविधा के लिए यहां भी कुछ होम स्टे खुल गए हैं. होम स्टे संचालकों के लिए यात्रा सीजन साल भर की रोजी-रोटी का जुगाड़ करता है.
होम स्टे और प्रकृति प्रेमियों का ठिकाना
होम स्टे संचालक हरीश रायपा बताते हैं कि पहले यात्रा सीजन में बूंदी गांव में पूरी चहल-पहल होती थी. यात्री रात को गांव में ही रुकते थे. लेकिन अब सड़क बनने के बाद यात्रियों का पड़ाव सीधे गुंजी बन गया है. बावजूद इसके नेचर लवर गांव में ही स्टे करते हैं. यही नहीं, आने-जाने वाले सैलानी भी बूंदी में कुछ समय के लिए रुकते जरूर हैं.
सामरिक दृष्टि और सुरक्षा का पहरा
बूंदी गांव के ठीक नीचे भारत और नेपाल को जोड़ने वाली काली नदी बहती है. बॉर्डर के इस गांव में एसएसबी भी तैनात रहती है. एसएसबी के जवान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हर आने-जाने वाले पर कड़ी नजर रखते हैं.