नई दिल्ली. दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका अपनी रिहाई के लिए अब ऊपरी अदालत का रुख करने की तैयारी में हैं. जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में दोनों की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई थी. निचली अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद उनकी कानूनी टीम इस आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रही है.
दोनों नेताओं को उम्मीद थी कि पांच दिन की न्यायिक हिरासत पूरी होने के बाद उन्हें राहत मिल सकती है लेकिन स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ा दी. अदालत में जमानत के लिए पेश किए गए जमानतदारों के दस्तावेजों पर भी सवाल उठे. अब इस मामले में अगली कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजर है.
कोर्ट ने क्यों बढ़ाई सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत?
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. यह कार्रवाई 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद की गई थी. 19 अक्टूबर को उनकी हिरासत की अवधि पूरी होने पर उन्हें फिर अदालत में पेश किया गया. दिल्ली पुलिस ने उनकी हिरासत बढ़ाने की मांग करते हुए दलील दी कि रिहा होने पर दोनों दोबारा कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ सकते हैं. पुलिस ने यह भी कहा कि दोनों ने पहले दिए गए शांति बनाए रखने के बांड की शर्तों का कथित तौर पर उल्लंघन किया है.
SEM कोर्ट ने पुलिस की दलीलों और जांच अधिकारी की ओर से पेश सामग्री पर विचार करते हुए हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी. अदालत ने उनके पिछले आचरण और शांति भंग होने की आशंका का भी जिक्र किया.
जमानत में भी आई अड़चन, दस्तावेजों पर उठे सवाल
दोनों नेताओं की रिहाई की कोशिशों में जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया भी बाधा बनी. उनके वकील के अनुसार, पहले पेश किए गए जमानतदारों को दस्तावेजों में कथित विसंगतियों के कारण स्वीकार नहीं किया गया था. वकील ने बताया कि बाद में नए जमानतदारों के दस्तावेज पेश किए गए, लेकिन इसी दौरान पुलिस ने हिरासत बढ़ाने के लिए नई अर्जी दे दी. इसके बाद अदालत ने दोनों को 21 अक्टूबर तक हिरासत में रखने का आदेश दिया. यानी फिलहाल दोनों नेताओं की रिहाई का रास्ता कानूनी प्रक्रिया से होकर गुजर रहा है. हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी इसी घटनाक्रम के बीच की जा रही है.
क्या है पूरा मामला, जंतर-मंतर पर क्यों हुआ था प्रदर्शन?
यह पूरा मामला मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के विरोध से जुड़ा है. सीजेपी के सदस्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे. पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को 14 लोगों का एक समूह कथित तौर पर जंतर-मंतर के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर गया था. इस समूह में सौरव दास, आशुतोष रांका और पार्टी के सदस्य अजिंक्य शिंदे भी शामिल थे. आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था को पार किया और पुलिसकर्मियों के आधिकारिक काम में बाधा डाली.
इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इन लोगों को हिरासत में लिया. मामले में पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए लागू प्रतिबंधों का पालन करना जरूरी था. वहीं सीजेपी के नेताओं ने अपनी कार्रवाई को विरोध प्रदर्शन से जुड़ा मामला बताया है.
पुलिस की दलील और पार्टी का रुख अलग-अलग
दिल्ली पुलिस का कहना है कि दोनों नेताओं को रिहा करने पर दोबारा कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका है. इसी आधार पर पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी. दूसरी ओर, सीजेपी और उससे जुड़े लोगों ने गिरफ्तारी तथा हिरासत बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए हैं. पार्टी की ओर से कानूनी प्रक्रिया में देरी और जमानत से जुड़ी अड़चनों को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं. ऐसे में यह मामला अब सिर्फ जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दोनों नेताओं की रिहाई और पुलिस की दलीलों पर कानूनी बहस भी अहम हो गई है.
रांका और दास के पास क्या ऑप्शन?
दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है. उनकी कानूनी टीम निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने के लिए हाई कोर्ट का रुख करने की तैयारी में है. हालांकि, याचिका दायर होने और उस पर सुनवाई की आधिकारिक पुष्टि के बिना यह कहना सही नहीं होगा कि उन्हें तुरंत राहत मिल जाएगी. इस बीच, 19 अक्टूबर को हिरासत बढ़ाए जाने के कुछ घंटे बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से जुड़े इस मामले को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया. इससे मामले की जांच भी आगे बढ़ेगी.