कोटा. बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले की जांच में अनिल पंडित की भूमिका को लेकर अहम खुलासे सामने आए हैं. अनिल पंडित ने टाइगर की हत्या के लिए आरोपियों को 2.50 लाख रुपये एडवांस दिए थे. इतना ही नहीं, वारदात को अंजाम देने के लिए हथियार भी उपलब्ध कराए थे. आरोपियों के मुंबई में रहने से लेकर उनके रोजाना के खर्च और वारदात के बाद फरार होने की योजना तक में अनिल पंडित की भूमिका सामने आई है. कोटा पुलिस के मुताबिक आरोपी करीब एक महीने से मुंबई के एक होटल में रह रहे थे. इस दौरान अनिल पंडित उन्हें खर्च के लिए रोजाना 5 से 10 हजार रुपये ऑनलाइन भेज रहा था. अब इस मामले में आरोपियों की एक्टिविटी और उनके संपर्कों को लेकर जांच की जा रही है.
अनिल पंडित आरोपियों के संपर्क में रहने और उन्हें निर्देश देने के लिए जंगी एप का इस्तेमाल कर रहा था. वारदात के समय भी इसी एप के जरिए आरोपियों से संपर्क में था. आरोपियों को ठिकाने पर पहुंचाने, खर्च का इंतजाम करने और आगे क्या करना है इसको लेकर निर्देश दिए जा रहे थे. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अलग-अलग दुकानदारों को ऑनलाइन भुगतान करते थे और बदले में उनसे नकद रुपये ले लेते थे. इस तरीके से वे अपने खर्च के लिए नकदी जुटा रहे थे.
दिल्ली से नेपाल भेजने की थी तैयारी
कोटा स्टेशन पर भुजिया खरीदते ऐसे पकड़ा गया नाबालिग
आरोपियों को पकड़ने में कोटा पुलिस और आरपीएफ की सतर्कता अहम रही. बताया जा रहा है कि मुंबई से ट्रेन में सवार होकर तीन आरोपी सफर कर रहे थे. जब ट्रेन कोटा स्टेशन पर रुकी, तब एक नाबालिग आरोपी खिड़की से एक वेंडर से भुजिया खरीद रहा था. स्टेशन पर सादे कपड़ों में तैनात आरपीएफ जवानों ने तस्वीर के आधार पर उसे पहचान लिया. इसके बाद जवान ट्रेन के कोच में पहुंचे और नाबालिग के पास वाली सीट पर बैठ गए. उन्होंने उससे पूछा कि मुंबई से तीन लोग ट्रेन में चढ़े थे, बाकी दो साथी कहां हैं. सवाल सुनकर नाबालिग घबरा गया और उसने जवाब दिया कि दोनों साथी सो रहे हैं. इसके बाद उसने अपने दोनों साथियों को हिलाकर उठाया और कहा कि कोटा आ गया है.
नींद से जागते ही पुलिस ने दबोचे दोनों आरोपी