अजरबैजान में हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में बच्चे क्यों शामिल है?
Agency:एजेंसियां
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अजरबैजान में हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. यह कोई राष्ट्रव्यापी प्रतिबंध नहीं है. बस स्कूलों में ड्रेस कोड के पालन को सख्त किया गया है. सबसे खास बात ये है कि हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ हो रहे इस प्रदर्शन में बच्चे भी हिस्सा ले रहे हैं.
अजरबैजान दुनिया का ऐसा पहला मुस्लिम देश है, जिसने स्कूलों में हिजाब पर बैन लगा दिया है. हालांकि सरकार का यह फैसला उसी के लिए मुसीबत बन गया है. हिजाब प्रतिबंध पर शुरू हुए विवाद के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. तुर्की और ईरान जैसे देश नाराजगी जता रहे हैं तो पश्चिमी देर इसको सही भी ठहरा रहे हैं. इस सबके बीच सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली वो तस्वीर है, जिसमें बच्चे भी हिजाब पर प्रतिबंध का विरोध कर रहे हैं. इनमें सिर्फ लड़कियां नहीं हैं, लड़कें भी इस बैन को गलत बता रहे हैं.
अजरबैजान में 96 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. यह ऐसा देश है जहां रैलियां और प्रदर्शन बेहद कम होते हैं. अगर कभी कोई विरोध प्रदर्शन करता भी है तो पुलिस उसे तितर-बितर कर देती है. हालांकि हिजाब प्रतिबंध के खिलाफ हो रहा हालिया प्रदर्शन अब तक का अभूतपूर्व प्रदर्शन बन गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें बच्चों की सीधी भागीदारी है.
हिजाब को लेकर क्या है विवाद
अजरबैजान ने 7 जुलाई को सामान्य शिक्षा कानून में संशोधन किया था. इसमें सभी छात्रों और शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है. 21 सितंबर को सरकार ने इसके लिए एक नया आदेश पारित किया और स्कूल में यूनिफॉर्म के नियमों को और सख्त कर दिया गया. इस आदेश में यूनिफॉर्म के अतिरिक्त किसी भी कपड़े को न पहनने की हिदायत दी गई है. खास बात ये है कि इसमें हिजाब का कोई जिक्र नहीं है, न ही ये लिखा है हिजाब पहने छात्राओं को स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. DW की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ स्कूलों ने नियम की व्याख्या अपने हिसाब से कर हिजाब पहने वाली छात्राओं को स्कूल में एंट्री देने से रोक दिया. 6 अक्टूबर को पहली बार ये मामला सामने आया.
किस कानून के तहत अजरबैजान ने पारित किया आदेश
अजरबैजान के संविधान के अनुच्छेद 18 के मुताबिक राज्य और धर्म अलग-अलग हैं. राज्य शिक्षा के धर्मनिरपेक्ष होने का प्रावधान करता है. अनुच्छेद 42 और 48 में इसे शिक्षा के अधिकार से जोड़ा गया है. ऐसे में सरकार के इस कदम का समर्थन करने वालों की भी बड़ी संख्या है जो ये मानते हैं कि सभी छात्रों पर एक जैसे ड्रेस नियम लागू होने चाहिए. हालांकि आलोचकों का कहना है कि धार्मिक पहनावे के कारण लड़कियों को स्कूल में एंट्री न देना गलत है.
कई लोगों को हिरासत में लिया
अजरबैजान में बड़े पैमाने पर हो रहे इन प्रदर्शनों के चलते अब तक कई लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. इन पर स्कूल कर्मचारियों से झड़प करने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप है. इन पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने के आरोप में अनुच्छेद 233 के तहत मामला दर्ज किया गया है. DW ने अपनी एक रिपोर्ट में कुछ एक्सपर्ट के हवाले से लिखा है कि अजरबैजान का यह कदम देश में बढ़ रहे ईरान के प्रभाव और कट्टर धार्मिक समूहों की बढ़ती ताकत का मुकाबला करने का एक प्रयास है. अज़रबैजान की संसद में सार्वजनिक संघों और धार्मिक संस्थानों की समिति के अध्यक्ष फाजिल मुस्तफा के मुताबिक अधिकारी विदेशों से प्रभावित धार्मिक समूहों से चिंतित हैं.