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Seethamma Vaari Vallu Jada Plant: दक्षिण भारत में पाए जाने वाले ‘सीतम्मा वारी वालु जड़ा’ पौधे की बनावट माता सीता की गूंथी हुई लंबी चोटी जैसी दिखाई देती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे अत्यंत पवित्र, मंगलकारी और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना जाता है. इसे घर में 10-12 इंच के गमले में, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और वर्मीकम्पोस्ट मिलाकर आसानी से लगाया जा सकता है. लंबी लटकती टहनियों के सहारे के लिए बांस या डंडे का प्रयोग करना चाहिए और मिट्टी सूखने पर ही पानी देना चाहिए.
Hyderabad: प्रकृति अपने भीतर कई अनसुलझे और अद्भुत रहस्य समेटे हुए है. वनस्पति जगत में एक ऐसा ही बेहद खास और दुर्लभ पौधा मौजूद है, जिसे पहली नज़र में देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो हरी-भरी पत्तियों से कोई लंबी चोटी बहुत करीने से गूंथ दी गई हो. दक्षिण भारत में इस अनोखे पौधे को ‘सीतम्मा वारी वालु जड़ा’ (Seethamma Vaari Vallu Jada) कहा जाता है, जिसका शाब्दिक हिंदी अर्थ ‘माता सीता की लंबी चोटी’ होता है. इस पौधे की खासियत यह है कि इसकी टहनियां नीचे की ओर लटकती हैं और इसकी पत्तियां एक-दूसरे के ऊपर इस तरह करीने से सजी होती हैं कि वे हूबहू गूंथी हुई चोटी का रूप ले लेती हैं.
पौराणिक मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार, त्रेतायुग में माता जानकी के केश अत्यंत लंबे, घने और मनमोहक थे. ऐसा माना जाता है कि उनके केशों के अद्वितीय सौंदर्य को निहारने के लिए दो आंखें भी कम पड़ जाती थीं. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस पौधे की अनोखी बनावट माता सीता की उसी सुंदर चोटी का जीवंत प्रतीक मानी जाती है. यही मुख्य वजह है कि इस पौधे को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र, मंगलकारी और घर में सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है. जिन लोगों की धार्मिक आस्था है, उनका यह दृढ़ विश्वास है कि इसे घर के मुख्य आंगन या बालकनी में लगाने से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि बनी रहती है और माता सीता का आशीर्वाद प्राप्त होता है. विशेष रूप से महिलाएं इसे अपने सुहाग, सौभाग्य और घर की खुशहाली का प्रतीक मानकर बहुत संभालकर रखती हैं.
घर में गमले में कैसे लगाएं यह दुर्लभ पौधा?
बागवानी विशेषज्ञ सरिता मालमत् के अनुसार, इस दुर्लभ पौधे को घर पर किसी भी गमले में बहुत आसानी से लगाया जा सकता है. इसके रोपण के लिए लगभग 10 से 12 इंच का गमला सबसे उपयुक्त माना जाता है. गमले में अतिरिक्त पानी के रुकने की समस्या न हो, इसके लिए हमेशा अच्छी जल निकासी (Good Drainage) वाली मिट्टी तैयार करनी चाहिए. इसके लिए बगीचे की सामान्य मिट्टी में बराबर मात्रा में वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost) और थोड़ी सी रेत (Sand) मिलाना बेहद फायदेमंद रहता है. इस पौधे को सीधे नर्सरी से लाकर गमले में रोप सकते हैं या फिर इसकी कटिंग (Cutting) के जरिए भी नया पौधा आसानी से तैयार किया जा सकता है. कटिंग को हमेशा हल्की नम मिट्टी में लगाएं और जब तक जड़ें न निकल आएं, तब तक इसे हल्की छांव वाली जगह पर रखें.
पौधे की सही देखभाल और रख-रखाव के जरूरी टिप्स
चूंकि इस पौधे की टहनियां लंबी होकर नीचे की ओर लटकती हैं, इसलिए पौधे को सही आकार और संतुलन में रखने के लिए एक मजबूत डंडे या बांस का सहारा अवश्य देना चाहिए. पौधे की सेहत के लिए इसे सुबह की हल्की धूप या फिर सेमी-शेड (Semi-Shade) वाली जगह पर रखना सबसे उत्तम रहता है. इसके अलावा, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि पौधे में बार-बार पानी न दें, बल्कि जब गमले की मिट्टी की ऊपरी सतह पूरी तरह से सूख जाए, तभी इसमें पानी डालना चाहिए.