कर्नाटक की सियासत में इस वक्त ऐसा भूचाल आया है. स्टिंग ऑपरेशन और मानहानि विवाद में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने मीडिया के सामने एकदम ‘सन्नाटा’ खींच लिया है और चुप्पी साध ली है. उधर, केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 2028 में अपना ‘दूसरा चेहरा’ दिखाने और सरकार पलटने की ऐसी खुली धमकी दे डाली है कि सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. इस तीखी चेतावनी पर भड़की कांग्रेस ने भी बिना देर किए ऐसा जोरदार पलटवार किया है, जिससे राज्य का राजनीतिक तापमान खौल उठा है. एक तरफ खामोशी का यह तूफान और दूसरी तरफ आमने-सामने की यह आर-पार की लड़ाई बता रही है कि कर्नाटक में आने वाले दिनों में कुछ बहुत बड़ा होने वाला है.
सिद्दारमैया ने सोमवार को कहा कि वह राज्य में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों के बारे में मीडिया से बात नहीं करेंगे. उन्होंने यह बात कोलार में तब कही, जब पत्रकारों ने उनसे स्टिंग ऑपरेशन विवाद के बारे में पूछा. सिद्दारमैया की टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि उन्होंने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने बारे में कथित तौर पर मानहानिकारक सामग्री फैलाए जाने को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है. इस मुद्दे ने राज्य में एक राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, जिससे केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और कांग्रेस सरकार आमने-सामने आ गए हैं.
कुमारस्वामी ने सिद्दारमैया से जुड़े वीडियो को लेकर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर उंगली उठाई है. ऐसे हालात में, सिद्दारमैया का इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी न करने का फैसला कई तरह की अटकलों को जन्म दे रहा है. इस बीच, उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी की उस चेतावनी का जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे 2028 के विधानसभा चुनावों में अपना ‘दूसरा चेहरा’ दिखाएंगे. परमेश्वर ने कहा कि राजनीतिक स्थिति समय के साथ ही स्पष्ट होगी और खुद कुमारस्वामी भी यह नहीं बता सकते कि सत्ता में कौन आएगा.
पत्रकारों से बात करते हुए परमेश्वर ने कहा, “चलिए इंतजार करते हैं और देखते हैं. हमें नहीं पता कि 2028 में सत्ता में कौन आएगा. खुद कुमारस्वामी भी यह नहीं बता सकते लेकिन जनता जरूर बता देगी. कुमारस्वामी कल ही केंद्र में अपने पद से इस्तीफा दें और राज्य की राजनीति में आएं.” किसी को भी राजनीति करने से कोई नहीं रोक सकता. कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए कुमारस्वामी ने सवाल किया था कि क्या मौजूदा सरकार हमेशा सत्ता में बनी रहेगी? उन्होंने दावा किया कि उन्हें पता है कि एक साल बाद क्या होने वाला है.
2028 में कर्नाटक में गठबंधन सरकार की वापसी पर भरोसा जताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों ने पिछले सात-आठ वर्षों में अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है और वे उनके परिवार को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं. कुमारस्वामी ने कहा था, “मुझे पूरा भरोसा है कि 2028 में गठबंधन सरकार ही सत्ता में आएगी और तब मैं अपना दूसरा चेहरा दिखाऊंगा.”
एक अन्य घटनाक्रम में कांग्रेस विधायक शिवगंगा बसवराज ने उन आरोपों का जवाब दिया, जिनमें कहा गया था कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार कर्नाटक में “स्टिंग ऑपरेशन के जनक” हैं. बसवराज ने कहा कि लोग अच्छी तरह जानते हैं कि असल में ऐसे ऑपरेशनों के पीछे कौन है. बसवराज ने मीडिया से बातचीत के दौरान कुमारस्वामी द्वारा पहले सार्वजनिक रूप से पेन ड्राइव दिखाए जाने की ओर इशारा किया और सवाल उठाया कि बाद में इन वीडियो के प्रसार (फैलाने) के पीछे कौन था.
उन्होंने पूछा, “पेन ड्राइव किसने दिखाई थी और दावा किया था कि इसे जल्द ही जारी किया जाएगा? क्या यह मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार थे या पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया? कुमारस्वामी ने खुद वह पेन ड्राइव दिखाई थी. आखिरकार किसके वीडियो सामने आए और किसके परिवार के वीडियो फैलाए गए? उनकी यह टिप्पणी पूर्व जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े मामले की ओर एक परोक्ष इशारा मानी जा रही है. बसवराज ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को ऐसे मामलों से निपटने का अनुभव है. उन्होंने बताया कि पहली बार विधायक बने नेताओं के लिए कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) ने पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था, जिसमें इस तरह की सावधानियों पर चर्चा की गई थी. बसवराज के अनुसार, शिवकुमार ने उन्हें पहले ही ऐसे मामलों में सावधानी बरतने की चेतावनी दी थी.
सोमवार को एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, भाजपा विधायक शिवराज पाटिल ने सिद्दारमैया का समर्थन किया. रायचूर में पाटिल ने कहा कि सिद्दारमैया लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और गारंटी लेकर आए थे और उन्हीं की बदौलत उनकी पार्टी राज्य में सत्ता में आई. पाटिल ने कहा, “अगर इस व्यक्ति को ऐसी स्थिति में धकेला जा रहा है, तो यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. मेरी तो आंखों में आंसू आ गए हैं. सिद्दारमैया राज्य के सबसे बड़े नेताओं में से एक हैं. उनके कार्यकाल के दौरान महिलाओं को उनके पैसे मिले थे.”