दशहरे पर क्यों की जाती है शस्त्र पूजा? पांडवों ने रखी नींव, पंडित जी से जानिए
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Dussehra Ritual : दशहरे के दिन आपने भी शस्त्र पूजा के बारे में सुना होगा. ऐसा सदियों से होता आया है. लोकल 18 से अयोध्या के पंडित कल्कि राम बताते हैं कि विजयादशमी के दिन शस्त्रों की पूजा का संबंध महाभारत काल की एक प्रसिद्ध कथा से भी जोड़ा जाता है. पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने अस्त्र-शस्त्रों को शमी के पेड़ में छिपा दिया था. जब अज्ञातवास खत्म हुआ तो विजयदशमी के दिन शमी वृक्ष से अपने शस्त्र वापस प्राप्त कर उनकी पूजा की. इसके बाद पांडवों ने युद्ध में हिस्सा लिया. पंडित कल्कि राम कहते हैं कि दशहरा के दिन होने वाली आयुध पूजा का अर्थ केवल तलवार, धनुष या दूसरे हथियारों को पूजना नहीं है. इसका व्यापक अर्थ उन सभी वस्तुओं के प्रति सम्मान प्रकट करना है, जिनसे आप अपनी आजीविका कमाते हैं.
अयोध्या. विजयादशमी बुराई पर अच्छाई, अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है. इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी. इसी मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार कर बुराई का अंत किया था. यही वजह है कि दशहरा के दिन देशभर में रावण दहन के साथ कई धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं. इन्हीं में से एक है शस्त्र पूजा, जिसे आयुध पूजा भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन शस्त्रों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करने से जीवन में सफलता, साहस और समृद्धि की कामना पूरी होती है. लोकल 18 से अयोध्या के पंडित कल्कि राम बताते हैं कि विजयादशमी के दिन शस्त्रों की पूजा करने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है. इसका संबंध महाभारत काल की एक प्रसिद्ध कथा से भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान अस्त्र-शस्त्रों को शमी के पेड़ में छिपा दिया था. अज्ञातवास की अवधि पूरी होने के बाद उन्होंने विजयादशमी के दिन शमी वृक्ष से अपने शस्त्र वापस प्राप्त किए और उनकी पूजा की. इसके बाद पांडवों ने युद्ध में हिस्सा लिया. इसी कथा के आधार पर विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजन को विजय, पराक्रम और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है.
सिर्फ शस्त्रों की पूजा नहीं
दशहरा के दिन होने वाली आयुध पूजा का अर्थ केवल तलवार, धनुष या दूसरे हथियारों की पूजा करना नहीं है. इसका व्यापक अर्थ उन सभी वस्तुओं के प्रति सम्मान प्रकट करना है, जिनसे व्यक्ति अपनी आजीविका कमाता है और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है. इसी परंपरा के तहत कारखानों में मशीनों, दुकानों में व्यापार से जुड़ी वस्तुओं, किसानों द्वारा कृषि उपकरणों और वाहन चालकों द्वारा अपने वाहनों की पूजा की जाती है. इसी तरह कार्यालयों में कंप्यूटर, लैपटॉप, कलम और दूसरे कामकाजी उपकरणों को भी पूजा में शामिल किया जाता है. इस दिन लोग अपने कामकाज से जुड़ी वस्तुओं को साफ करके उन पर हल्दी, कुमकुम और फूल चढ़ाते हैं. इसके बाद विधि-विधान से पूजा कर अपने व्यवसाय और जीवन में उन्नति की कामना करते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी पर शस्त्र पूजा करने से शक्ति, साहस और विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यह परंपरा व्यक्ति को अपने साधनों का सम्मान करने और उनका सदुपयोग करने का संदेश भी देती है. दशहरा के दिन नया वाहन खरीदना, कारोबार शुरू करना और नए कार्य की शुरुआत करना भी कई लोग शुभ मानते हैं.