चित्तौड़गढ़. राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की रावतभाटा नगर पालिका एक बार फिर विकास कार्यों की गुणवत्ता, टेंडर प्रक्रिया और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवालों के घेरे में है. गणेश नगर और बालाजी नगर में सीवरेज पाइपलाइन डालने के लिए सड़कें खोदे जाने के करीब दो साल बाद भी उनकी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने का मामला सामने आया है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के नाम पर बजट खर्च किया जा रहा है.
लेकिन आम जनता को अब भी धूल, मिट्टी और गड्ढों से जूझना पड़ रहा है. वहीं, निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. हालांकि, इन आरोपों पर नगर पालिका प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी.
सीवरेज के लिए खोदी सड़कें, दो साल बाद भी परेशानी
रावतभाटा के गणेश नगर और बालाजी नगर में सीवरेज पाइपलाइन डालने के दौरान पहले से बनी सड़कों को खोद दिया गया था. स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 2022 में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से इन क्षेत्रों में पक्की सड़कों का निर्माण कराया गया था. ये सड़कें गारंटी अवधि के तहत थीं, लेकिन सीवरेज कार्य के दौरान इन्हें नुकसान पहुंचा और इसके बाद से इनकी हालत खराब बनी हुई है. क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़कें खोदे जाने के बाद लंबा समय बीत गया, लेकिन मरम्मत और पुनर्निर्माण का काम संतोषजनक तरीके से पूरा नहीं हो पाया. इसके चलते लोगों को रोजाना आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. गड्ढों और उबड़-खाबड़ रास्तों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है. लोगों का सवाल है कि जब पहले ही सड़क निर्माण पर सरकारी राशि खर्च की जा चुकी थी, तो उन्हें दोबारा दिक्कतों का सामना क्यों करना पड़ रहा है.
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल
सड़क निर्माण कार्य के दौरान इस्तेमाल की जा रही सामग्री को लेकर भी स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई है. आरोप है कि निर्धारित मानकों के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा और गिट्टी की जगह कोटा स्टोन स्लैब डाले जा रहे हैं. इससे सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर सवाल उठ रहे हैं. क्षेत्रवासियों का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की निगरानी होनी चाहिए, ताकि सरकारी धन खर्च होने के बावजूद कुछ समय बाद फिर से सड़कें खराब होने की स्थिति पैदा न हो. हालांकि, निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं, इसकी पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकती है.
टेंडर और सरकारी बजट के इस्तेमाल पर उठे सवाल
स्थानीय स्तर पर एक ही कार्य के दोबारा टेंडर जारी करने और विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. लोगों का आरोप है कि जहां सड़कों और नालियों की वास्तविक जरूरत है, वहां समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा, जबकि अन्य कार्यों पर बजट खर्च किया जा रहा है. क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से सड़क निर्माण, सीवरेज कार्य, टेंडर प्रक्रिया और खर्च की गई राशि की जांच कराने की मांग की है.
उनका कहना है कि यदि निर्माण में अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. अब पूरे मामले में नगर पालिका प्रशासन की प्रतिक्रिया और तकनीकी जांच महत्वपूर्ण होगी. जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि सड़कें खराब होने के पीछे निर्माण की गुणवत्ता, सीवरेज कार्य या रखरखाव में कमी की कितनी भूमिका है और सरकारी राशि के इस्तेमाल में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं.