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मथुरा और ब्रज का नाम सुनते ही भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का ध्यान मन में चला आता है. श्री कृष्ण की लीलाओं के साथ-साथ यहां उस युग में भी भगवान राम का यहां आना हुआ और उनके छोटे भाई ने यहां की व्यवस्था को संभालकर लोगों की भलाई की. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान 12 वनों में से एक है. इस स्थान को भागवत पुराण के साथ-साथ कई पुराने में इसका जिक्र होता है. विष्णु पुराण में भी मधुपुरी का जिक्र आपको पढ़ने और सुनने को मिलेगा.
मथुरा: मथुरा श्री कृष्ण की नगरी ही नहीं भगवान श्री राम के भाइयों से जुड़ी हुई गाथा को भी गाती है. भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में अपनी लीलाओं को किया था, तो वहीं भगवान श्री राम के छोटे भ्राता शत्रुघ्न और शत्रुघ्न के बड़े पुत्र ने मथुरा पर अपना साम्राज्य स्थापित करने के बाद जनता की भलाई के लिए कार्य किया. आज भी भगवान श्री राम के भरता और भतीजे की कहानी आपको सुनने को मिलेगी. चलिए जानते हैं भगवान श्री राम के छोटे भाई शत्रुघ्न ने यहां कितने हजार वर्ष राज्य किया. उनके बाद उनके बड़े पुत्र ने मथुरा की कमान उत्तराधिकारी बनाकर संभाली.
उत्तराधिकारी नियुक्त होने पर सुबाहु ने किया था मधुपुरी पर राज्य
मथुरा और ब्रज का नाम सुनते ही भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं का ध्यान मन में चला आता है. श्री कृष्ण की लीलाओं के साथ-साथ यहां उस युग में भी भगवान राम का यहां आना हुआ और उनके छोटे भाई ने यहां की व्यवस्था को संभालकर लोगों की भलाई की. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थान 12 वनों में से एक है. इस स्थान को भागवत पुराण के साथ-साथ कई पुराने में इसका जिक्र होता है. विष्णु पुराण में भी मधुपुरी का जिक्र आपको पढ़ने और सुनने को मिलेगा. इस स्थान की महत्वता क्या है. यह स्थान भगवान राम के छोटे भाई शत्रुघ्न और उनके बड़े बेटे सुबाहु से कैसे जुड़ा वह हम आपको बताते हैं.
यहां मधु नाम का दैत्य रहता था
गांव महोली क्षेत्र स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर की पुजारी ईश्वर दास महाराज ने लोकल 18 से बातचीत की. उन्होंने बताया कि मधुपुरी यहां का नाम इसलिए पड़ा कि यहां एक मधु नाम का दैत्य रहा करता था उसे दैत्य का आतंक इतना था कि लोगों को अपनी गुफा में खींच ले जाता था. उसके बाद भगवान श्री राम के भाई शत्रु करने किया इसलिए इस जगह का नाम मजबूरी पड़ा. उन्होंने यह भी बताया कि सुबाहु भगवान श्री राम के छोटे भाई शत्रुघ्न का बेटा था और शत्रुघ्न ने मधुपुरी में 11000 वर्ष राज्य करने के बाद अपने बेटे सुबाहु को यहां का उत्तराधिकारी नियुक्त किया. उत्तराधिकारी नियुक्त होने के बाद उसने भी कई सौ वर्ष राज्य मधुपुरी पर किया. यहां की जनता को खुश रखा. सुबाहु शत्रुघ्न का बड़ा बेटा था. वह पिता के प्रति लगाव रखता था. शत्रुघ्न ने मधुवन में राक्षस लवणासुर का वध करने के बाद वहां ‘मथुरा’ नामक नगर की स्थापना की थी. बाद में शत्रुघ्न ने अपने पुत्र सुबाहु को मथुरा का राजा बनाया था.