मजबूत इकोनॉमी के बाद भी बाजार क्यों बेदम? वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताई असली वजह


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Why Stock Market Falling : साल 2026 में अब तक सेंसेक्‍स 13 फीसदी फिसल चुका है. खास बात यह है कि यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब भारती अर्थव्‍यवस्‍था दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली इकोनॉमी बनी हुई है. शेयर बाजार क्‍यों गिर रहा है, इसकी वजह वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताई है.

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मजबूत इकोनॉमी के बाद भी बाजार क्यों बेदम? वित्‍त मंत्री ने बताई वजहZoom

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बाजार में भरपूर लिक्विडिटी की वजह से एफपीआई आसानी से पैसा निकाल रहे हैं. (File Photo : Reuters)

नई दिल्‍ली. भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत बनी हुई है. अंतरराष्‍ट्रीय मुद्रा कोष से लेकर एशियन डेवलपमेंट तक, सबको इंडियन इकोनॉमी पर भरोसा है. लेकिन इसके बावजूद घरेलू शेयर बाजार दबाव में नजर आ रहा है. साल 2026 में अब तक 13 फीसदी गिर चुका है. आज, 19 अक्‍टूबर को शेयर बाजार 876 अंक गिरकर 73852.90 पर बंद हुआ है. बाजार क्‍यों गिर रहा है, इस पर वित्‍त मंत्री निर्मला ने अब खुलकर बात की है. बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की बैठकों से इतर CNBC को दिए एक इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा कि व्यापार से जुड़ी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से विदेशी निवेशकों की बिकवाली और शेयर बाजार में गिरावट की एक प्रमुख वजह है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के भारत से बाहर निकलने की सबसे बड़ी वजह यह है कि उनके लिए यहां से पैसा निकालना बेहद आसान है. भारतीय शेयर बाजार में उच्च स्तर की लिक्विडिटी (Liquidity) उपलब्ध है. उन्हें खरीदार मिल रहे हैं. इस सुगम एग्जिट प्रक्रिया के कारण बड़े पैमाने पर होने वाली बिकवाली सीधे तौर पर घरेलू सूचकांकों पर दबाव डाल रही है. वित्त मंत्री ने आगाह किया कि वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच 2027 तक लगातार पूंजी का बाहर जाना (Capital Outflows) भारत के लिए चुनौती हो सकता है. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशक इस साल अब तक भारतीय इक्विटी से 33 अरब डॉलर (करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये) से अधिक की पूंजी निकाल चुके हैं.

ताइवान और दक्षिण कोरिया को एआई का फायदा

वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक पूंजी का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजारों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों की ओर स्थानांतरित हुआ है. ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को उनके मजबूत सेमीकंडक्टर और टेक इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण इस AI बूम का लाभ भारत के मुकाबले ज्‍यादा मिला है. निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगर कभी वैश्विक स्तर पर AI शेयरों में भारी गिरावट आती है, तो भारत पर इसका असर काफी सीमित होगा क्योंकि हमारे बाजार में AI केंद्रित जोखिम कम हैं.

घरेलू निवेशक बने ढाल

विदेशी निवेशकों द्वारा पैदा किए गए इस बड़े दबाव को घरेलू निवेशकों ने काफी हद तक संभाला हुआ है. घरेलू पूंजी बाजार के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बनकर उभरी है. AMFI के अनुसार, सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में शुद्ध निवेश 31% बढ़कर 38,307 करोड़ रुपये के पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. मासिक SIP इनफ्लो 0.6% की बढ़त के साथ 32,490 करोड़ रुपये के नए ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर पहुंच गया है. इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में लगातार 67 महीनों से शुद्ध खरीदारी दर्ज की जा रही है, जो खुदरा निवेशकों के दीर्घकालिक भरोसे को दर्शाती है.



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