बागेश्वर की नगरदेवी मां चंडिका का मंदिर, चंद शासनकाल में हुई थी स्थापना
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Bageshwar News: उत्तराखंड के बागेश्वर में स्थित मां चंडिका का मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है. मां चंडिका को नगरदेवी के रूप में पूजा जाता है और नवरात्रि के दौरान यहां माता के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मान्यता है कि मां के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने और चुनरी चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. चंद शासकों के कुल पुरोहित पांडेय वंश के पूर्वज माता को चंपावत से बागेश्वर लाए थे. मंदिर की स्थापना चंद शासनकाल में करीब 1698 से 1701 के बीच मानी जाती है. यह मंदिर भीलेश्वर पहाड़ी पर बागेश्वर नगर से लगभग आधा से एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.
बागेश्वर: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित मां चंडिका का मंदिर आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है. नवरात्रि के दिनों में यहां माता के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. स्थानीय लोग मां चंडिका को नगरदेवी के रूप में पूजते हैं. मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में प्रार्थना करने और पूजा-अर्चना करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और मन की शांति मिलती है.
बागेश्वर नगर में स्थित मां चंडिका के मंदिर में स्थानीय लोगों के साथ दूसरे क्षेत्रों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. मंदिर के सेवादार पवन गोस्वामी बताते हैं कि चंद शासकों के कुल पुरोहित पांडेय वंश के पूर्वज माता को चंपावत से बागेश्वर लाए थे. मंदिर की स्थापना चंद शासनकाल में लगभग 1698 से 1701 के बीच मानी जाती है. यह मंदिर भीलेश्वर पहाड़ी पर स्थित है और बागेश्वर नगर से करीब आधा से एक किलोमीटर की दूरी पर है.
कहां स्थित है मां चंडिका का मंदिर?
मां चंडिका का मंदिर उत्तराखंड के बागेश्वर नगर में स्थित है. सरयू और गोमती नदियों के संगम और बाबा बागनाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध इस नगर में मां चंडिका का दरबार भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है. नवरात्रि के दौरान मंदिर में पूजा-अर्चना करने और माता का आशीर्वाद लेने के लिए भक्त पहुंचते हैं. सुबह से ही मंदिर में दर्शन करने वालों की आवाजाही बनी रहती है.
नगरदेवी के रूप में क्यों पूजी जाती हैं मां चंडिका
बागेश्वर के स्थानीय लोगों की मां चंडिका के प्रति गहरी आस्था है. उन्हें नगर की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि नगरदेवी अपने भक्तों और क्षेत्र की रक्षा करती हैं. यही वजह है कि लोग किसी शुभ कार्य की शुरुआत करने, परिवार की सुख-शांति और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना लेकर माता के दरबार में पहुंचते हैं. मां चंडिका को लेकर क्षेत्र में कई धार्मिक मान्यताएं और लोककथाएं प्रचलित हैं. मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु अपने साथ चुनरी लाते हैं और उसे माता को अर्पित कर अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करते हैं. स्थानीय परंपरा के अनुसार, मंदिर में चुनरी बांधकर भी मनोकामना मांगी जाती है.
नवरात्रि में क्यों खास है मां चंडिका की पूजा
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता के आशीर्वाद से पूरी होती है. श्रद्धालु रिचा जोशी बताती हैं कि नवरात्रि मां दुर्गा और उनके विभिन्न स्वरूपों की आराधना का प्रमुख पर्व है. इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और देवी मंदिरों में जाकर आशीर्वाद लेते हैं. मां चंडिका को भी देवी शक्ति का स्वरूप मानकर पूजा जाता है. नवरात्रि के दौरान मंदिर में दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालु अपने परिवार की खुशहाली, सुख-समृद्धि और बेहतर भविष्य की कामना करते हैं. अगर आप भी नवरात्रि में बागेश्वर आ रहे हैं, तो मां चंडिका के दर्शन कर सकते हैं.