इटावा: 866 करोड़ से बनेगा रेल फ्लाईओवर, 8 गांव के लोगों का फाटक पर इंतजार होगा खत्म, फर्राटा भरेंगी ट्रेनें

इटावा: 866 करोड़ से बनेगा रेल फ्लाईओवर, 8 गांव के लोगों का फाटक पर इंतजार होगा खत्म, फर्राटा भरेंगी ट्रेनें


इटावा: यूपी के इटावा में दिन दुगनी रात चौगुनी की रफ्तार से विकास हो रहा है. चाहे एक्सप्रेस-वे हो या हाइवे, सड़कें या फिर इंडस्ट्रियल डिपार्टमेंट हो. वहीं अब रेल सेक्टर में भी इटावा हव बनने जा रहा है. दिल्ली-हावड़ा जैसे देश के अति व्यस्त रेलमार्ग पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और परिचालन व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने की दिशा में इटावा में एक बड़ी रेल परियोजना पर काम चल रहा है. करीब 866.06 करोड़ रुपये की लागत से 9.711 किलोमीटर लंबा रेल फ्लाईओवर बनाया जा रहा है. राहतपुर गांव के पास विकसित हो रहा यह फ्लाईओवर इटावा को रेलवे के एक महत्वपूर्ण जंक्शन के रूप में नई पहचान देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

इसके निर्माण से इटावा-मैनपुरी, इटावा-भिंड और इटावा-आगरा रेलखंडों से आने-जाने वाली ट्रेनों को दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग की मुख्य लाइनों को सतह पर पार करने की मजबूरी से राहत मिलेगी. रेलवे ने परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
प्रयागराज रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी अमित कुमार सिंह बताते है कि इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य ट्रेनों को मुख्य रेलमार्ग पर रास्ता देने के लिए बार-बार रोकने की आवश्यकता कम करना है. फ्लाईओवर तैयार होने के बाद यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के परिचालन को भी गति मिलेगी. इससे ट्रेनों की समयपालनता में सुधार होने और व्यस्त दिल्ली-हावड़ा रेलखंड की परिचालन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है.

क्रॉसिंग पर 15 मिनट तक इंतजार से मिलेगी राहत
वर्तमान व्यवस्था में इटावा से जुड़ी ब्रांच लाइनों पर चलने वाली ट्रेनों को दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग की व्यस्त मुख्य लाइनों को पार करने के लिए कई बार इंतजार करना पड़ता है. मुख्य लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही अधिक होने के कारण ब्रांच लाइन की ट्रेनों को क्रॉसिंग मिलने तक रोकना पड़ता है. कुछ ट्रेनों को इस प्रक्रिया में करीब 15 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है.

फ्लाईओवर बनने के फायदे
फ्लाईओवर बनने के बाद ग्वालियर-भिंड, आगरा और मैनपुरी की ओर से आने-जाने वाली ट्रेनों के लिए अलग रेलमार्ग उपलब्ध होगा. इससे मुख्य लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित किए बिना संबंधित ब्रांच लाइनों की ट्रेनों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी. परियोजना से करीब एक दर्जन यात्री ट्रेनों और एक दर्जन मालगाड़ियों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है.रेलवे से जुड़े परियोजना विवरण के अनुसार, इन दो दर्जन ट्रेनों के परिचालन में कुल मिलाकर करीब छह घंटे तक की समय बचत होने का अनुमान है.

2017 में शुरू हुई थी परियोजना
इटावा में 2015 से 2017 के बीच बाह-आगरा, भिंड-ग्वालियर और मैनपुरी की ओर रेल लाइनें बनने के बाद इन्हें दिल्ली-हावड़ा के मुख्य रेलमार्ग से जोड़ने की चुनौती सामने आई. अलग-अलग दिशाओं से आने वाली ट्रेनों को मुख्य लाइन पार करनी पड़ती थी, जिससे व्यस्त रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही के बीच तालमेल बनाना जरूरी हो जाता था. इसी समस्या के समाधान के लिए रेल फ्लाईओवर कनेक्टिविटी परियोजना तैयार की गई. वर्ष 2017 में शुरू हुई इस परियोजना का उद्देश्य ब्रांच रेल लाइनों के बीच ऐसा संपर्क विकसित करना है, जिससे ट्रेनों को मुख्य लाइन पर बार-बार क्रॉसिंग मिलने का इंतजार न करना पड़े. फ्लाईओवर का निर्माण पूरा होने के बाद इटावा जंक्शन से जुड़ी रेल परिचालन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी.

8 गांवों से होकर गुजरेगा फ्लाईओवर
प्रस्तावित रेल फ्लाईओवर का मार्ग इटावा और जसवंतनगर तहसीलों के आठ गांवों से होकर गुजरेगा. इनमें इटावा तहसील के कांधनी, आलमपुर हौज, बुलाकीपुर लुहन्ना, सराय ऐसर, विचारपुरा, डूंगरी और हरसौली के साथ जसवंतनगर तहसील का सैदपुरा गांव शामिल है. फ्लाईओवर का मार्ग इस तरह तैयार किया जा रहा है कि ग्वालियर-भिंड, बाह-आगरा और मैनपुरी की ओर से आने-जाने वाली ट्रेनों को दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग की मुख्य लाइनों को सतह पर पार करने की बाध्यता से राहत मिल सके. इससे ट्रेनों के संचालन में आने वाली बाधाएं कम होंगी और जंक्शन पर रेल यातायात का प्रबंधन अधिक प्रभावी हो सकेगा.

2,10,170 वर्गमीटर भूमि की आवश्यकता
परियोजना के निर्माण की दिशा में भूमि अधिग्रहण का काम भी तेजी से आगे बढ़ा है. उपलब्ध परियोजना आंकड़ों के मुताबिक, रेल फ्लाईओवर के लिए कुल 2,10,170 वर्गमीटर भूमि की आवश्यकता है. इसमें से 1,87,657 वर्गमीटर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है, जो कुल जरूरत का 89.28 प्रतिशत है. भूमि अधिग्रहण के एवज में अब तक 65.89 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया जा चुका है. वहीं, रेलवे की ओर से 75 करोड़ रुपये दो किस्तों में जमा कराए गए हैं.

कहा कितनी अधिग्रहण हो चुकी भूमि
गांववार आंकड़ों के अनुसार, कांधनी में 30,063 वर्गमीटर की आवश्यकता के मुकाबले 24,145 वर्गमीटर भूमि का अधिग्रहण हुआ है. बुलाकीपुर लुहन्ना में 3,618 वर्गमीटर में से 95 वर्गमीटर, जबकि सैदपुरा में 3,741 वर्गमीटर में से 3,306 वर्गमीटर भूमि अधिग्रहीत की गई है. इसी तरह विचारपुरा में 25,069 वर्गमीटर में से 21,876 वर्गमीटर, डूंगरी में 81,273 वर्गमीटर में से 74,018 वर्गमीटर, आलमपुर हौज में 22,672 वर्गमीटर में से 21,311 वर्गमीटर, हरसौली में 15,414 वर्गमीटर में से 15,108 वर्गमीटर और सराय ऐसर में 28,320 वर्गमीटर में से 27,798 वर्गमीटर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है. शेष भूमि का अधिग्रहण और निर्माण कार्य की प्रगति निर्धारित समयसीमा में परियोजना पूरी करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी.

यात्रियों को मिलेगा आराम
रेल फ्लाईओवर परियोजना को इटावा के रेल नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके पूरा होने से न केवल ब्रांच लाइनों की ट्रेनों को लाभ मिलने की उम्मीद है, बल्कि दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रेलमार्ग पर परिचालन का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है. स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि रेलवे की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से यात्रियों को बेहतर समयपालन, मालगाड़ियों के अधिक सुचारु संचालन और रेल संपर्क व्यवस्था में सुधार का लाभ मिलेगा. इसके साथ ही इटावा जंक्शन की परिचालन क्षमता भी मजबूत होगी.

2017 तक बदल जाएगा इटवा में रेल सेवा संचालन
इटावा से मध्य प्रदेश और राजस्थान की ओर रेल संपर्क के विस्तार की संभावनाओं के बीच इस फ्लाईओवर को भविष्य की रेल सुविधाओं के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है. हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक लाभ आगे की रेल योजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा. करीब 866 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह 9.711 किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि इटावा में रेल परिचालन की पुरानी बाधाओं को दूर करने की एक महत्वपूर्ण पहल है. यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार इसका निर्माण पूरा होता है, तो मार्च 2027 के बाद इटावा से जुड़ी कई रेल सेवाओं के संचालन में सुधार की उम्मीद की जा सकती है.



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