नैनीताल में खाकी पर सवाल, सिपाही ने महिला दरोगा को जड़ा थप्पड़, तानी पिस्टल, अब जांच शुरू 

नैनीताल में खाकी पर सवाल, सिपाही ने महिला दरोगा को जड़ा थप्पड़, तानी पिस्टल, अब जांच शुरू 


नैनीताल : किसी भी सुरक्षा एजेंसी के जवान अपने अनुशासन के लिए जाने जाते हैं. सिपाही से लेकर डीजी तक सब एक दूसरे का वर्दी से सम्मान करते हैं. सिपाही अपने इमिडिएट बॉस दरोगा यानी सब इंस्पेक्टर को देखते ही जय हिंद कहते हुए सलाम ठोकता है. मगर, उत्तराखंड पुलिस में ऐसा नहीं हो रहा. यहां सिपाही सलाम ठोकने के बजाय दरोगा से मारपीट कर अपना हाथ साफ कर रहे हैं. नैनीताल जिले में कुछ ऐसी ही घटना देखने को मिली है. यहां एक महिला दरोगा ने सिपाही पर मारपीट करने का आरोप लगाया है. इसकी शिकायत भी दर्ज कराई गई है.

क्या है मामला
कुछ दिन पहले सुबह के समय विवाद के बाद कोतवाली के अंदर महिला हेल्प डेस्क के पास एसओजी में तैनात कर्मी और हल्द्वानी सर्किल में तैनात एक महिला दरोगा के बीच बहसबाजी हो गई. पहले कहासुनी होती रही और बात जब और बढ़ी तब एसओजी कर्मी ने महिला दरोगा को थप्पड़ जड़ दिया. इतना ही नहीं कहासुनी के बाद कनपटी पर पिस्टल भी तान दी थी, जिसके बाद महिला दरोगा ने शिकायत दी थी. उसने बताया कि एसओजी में तैनात सिपाही अनिल गिरी ने उनके साथ मारपीट की. इसके बाद कई धाराओं में केस दर्ज हुआ और जांच शुरू.

आरोपी सिपाही सस्पेंड
महिला दरोगा से मारपीट का आरोपी सिपाही अनिल गिरी नैनीताल जिले की एसओजी में तैनात था. 11 अक्टूबर को जैसे ही मामले की शिकायत नैनीताल के पुलिस कप्तान मंजूनाथ टीसी से हुई उन्होंने सिपाही का ट्रांसफर एसओजी से नैनीताल कोतवाली में कर दिया. मामला यहां शांत नहीं हुआ. महिला दरोगा अपनी शिकायत लेकर फिर पुलिस कप्तान और आईजी से मिली. उन्होंने मारपीट करने वाले सिपाही के खिलाफ कनूनी कार्रवाई की इच्छा जाहिर करते हुए एफआईआर करने की मांग की. सूत्रों के मुताबिक दरोगा ने थाने के भीतर हुई मारपीट का सीसीटीवी वीडियो भी दिखाया. इसके बाद हड़कंप मचा और पुलिस कप्तान ने आरोपी सिपाही को सस्पेंड कर दिया.

शिकायत में क्या कहा महिला चौकी इंचार्ज ने?
कोतवाली प्रभारी को दी गई शिकायत में महिला चौकी इंचार्ज ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 3:15 बजे SOG में तैनात सिपाही अनिल गिरी ने अपने मोबाइल नंबर से उन्हें फोन किया. आरोप है कि इस दौरान सिपाही ने उनके साथ गाली-गलौज की और महिला अधिकारी की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया. महिला दरोगा के मुताबिक, सिपाही ने उन्हें, उनके पति और बच्चों को जान से मारने की धमकी भी दी. शिकायत में यह भी कहा गया है कि सिपाही ने पांच मिनट के भीतर चौकी पहुंचने की बात कही, जिसके बाद महिला अधिकारी ने खुद और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई. उन्होंने 10 अक्टूबर को ही इस मामले की लिखित, मौखिक और व्हाट्सऐप के माध्यम से SSP नैनीताल को सूचना दी थी.

अगले दिन ड्यूटी के दौरान फिर धमकी देने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, 11 अक्टूबर को महिला दरोगा की ड्यूटी परीक्षा के दौरान पुलिस सेक्टर अधिकारी के रूप में लगाई गई थी. वह सुबह छह बजे से ड्यूटी पर थीं. इसी दौरान आरोप है कि सिपाही अनिल गिरी ने SOG के सरकारी मोबाइल नंबर से उनके निजी नंबर पर कॉल की. महिला अधिकारी का आरोप है कि फोन पर सिपाही ने SSP से शिकायत करने को लेकर सवाल उठाए और उन्हें फिर धमकी दी. शिकायत में दावा किया गया है कि इसके बाद कोतवाली के भीतर सिपाही ने उन पर पिस्टल भी तान दी. ये सभी आरोप महिला चौकी इंचार्ज की शिकायत पर आधारित हैं. मामले में पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने आना बाकी है.

पहले भी ट्रांसफर होने के बावजूद SOG में तैनाती का दावा
इस मामले में SOG सिपाही अनिल गिरी की तैनाती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मारपीट के आरोपों से जुड़े एक मामले में अनिल गिरी और SOG में तैनात कुछ अन्य पुलिसकर्मियों का पुलिस मुख्यालय की जांच के आधार पर कुमाऊं रेंज से गढ़वाल रेंज में तबादला किया गया था. हालांकि, आरोप है कि पुलिस मुख्यालय के आदेश के बावजूद संबंधित पुलिसकर्मियों को जिले से रिलीव नहीं किया गया और वे अब भी SOG में तैनात हैं. यदि यह जानकारी सही है, तो तबादला आदेश के अनुपालन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना जरूरी है.

पहले भी महिला दरोगा से मारपीट का मामला
सूत्रों के मुताबिक, जिले में इससे पहले भी एक महिला चौकी इंचार्ज के साथ सिपाही द्वारा मारपीट किए जाने का मामला सामने आया था. हालांकि, उस मामले में FIR दर्ज होने की पुष्टि नहीं है. बताया जाता है कि संबंधित सिपाही का तबादला पिथौरागढ़ कर दिया गया था. इन घटनाओं के दावों के बीच पुलिस महकमे में महिला अधिकारियों की सुरक्षा, शिकायतों पर कार्रवाई और विभागीय आदेशों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. फिलहाल, मौजूदा मामले में महिला चौकी इंचार्ज की शिकायत पर पुलिस का आधिकारिक पक्ष और जांच की स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है.



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