धान की खेती में लग रहा है सांप जैसा दिखने वाला रोग, कृषि वैज्ञानिक ने बताया सेथ ब्लाइट का इलाज

धान की खेती में लग रहा है सांप जैसा दिखने वाला रोग, कृषि वैज्ञानिक ने बताया सेथ ब्लाइट का इलाज


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धान की खेती में लग रहा है सांप जैसा दिखने वाला रोग, जानें सेथ ब्लाइट का इलाज

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जिस तरह से इंसान अलग-अलग बीमारियों से प्रभावित होते रहते हैं और फिर इलाज की जरूरत होती है उसी तरह पेड़-पौधे भी बीमार होते हैं. अगर देखरेख नहीं की गई तो ये खराब हो जाते हैं और समय पर रोज की पहचान हो गई और इलाज मिल गया तो फिर मेहनत बर्बाद नहीं होती.

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रोहतास: बिहार के रोहतास जिले में धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है. खेतों में धान के पौधों पर सांप की तरह दिखाई देने वाले धब्बे फसल के लिए खतरे की घंटी हैं. यह सेथ ब्लाइट नामक फफूंदजनित रोग के लक्षण हैं जो अनुकूल मौसम और नमी मिलने पर तेजी से फैलकर धान की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है. समय रहते इसकी पहचान और नियंत्रण नहीं किया गया तो किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है और उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है.

तने के निचले हिस्से से शुरू होता है रोग, ऐसे करें पहचान
लोकल 18 से बातचीत में कृषि वैज्ञानिक डॉ. रमाकांत सिंह ने बताया कि सेथ ब्लाइट के प्रकोप को बढ़ाने में खेतों में लगातार पानी जमा रहना, पौधों के बीच अधिक नमी और जरूरत से ज्यादा यूरिया का इस्तेमाल अहम भूमिका निभाते हैं. इस रोग की शुरुआत आमतौर पर पौधे के निचले हिस्से में तने को ढकने वाले पत्ती के खोल से होती है. यहां अनियमित आकार के हरे-भूरे धब्बे दिखाई देने लगते हैं जो धीरे-धीरे बढ़कर सांप जैसी आकृति बना लेते हैं. इसके बाद रोग पौधे के ऊपरी हिस्से और पत्तियों तक फैल सकता है. गंभीर स्थिति में पौधे कमजोर हो जाते हैं और धान की बालियों के विकास तथा दानों के भरने पर प्रतिकूल असर पड़ सकता और बालियां टूट कर गिर जाती हैं. इससे किसानों को उपज में नुकसान उठाना पड़ता है.

सबसे पहले खेत से निकालें अतिरिक्त पानी, यूरिया पर रखें नियंत्रण
कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि रोग के प्रबंधन के लिए सबसे पहले खेत में जमा अतिरिक्त पानी की निकासी करनी चाहिए. साथ ही यूरिया का इस्तेमाल जरूरत और अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही करना चाहिए. खेत में अत्यधिक नमी और जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन पौधों को रोग के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं इसलिए किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही नियंत्रण के उपाय अपनाने की जरूरत है.

इन फफूंदनाशकों से किया जा सकता है रोग का नियंत्रण
डॉ. रमाकांत सिंह के अनुसार रोग की पहचान होने पर वैलिडामाइसिन का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा प्रोपिकोनाजोल या हेक्साकोनाजोल जैसे फफूंदनाशक भी रोग नियंत्रण के विकल्प हैं. दवा का चयन रोग की स्थिति, फसल की अवस्था और उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार करना चाहिए.

लापरवाही पड़ सकती है भारी, खेतों की नियमित करें निगरानी
सेथ ब्लाइट से धान की फसल को बचाने के लिए समय पर पहचान, अतिरिक्त पानी की निकासी और संतुलित उर्वरक प्रबंधन बेहद जरूरी है. किसानों को पौधों के निचले हिस्से पर दिखाई देने वाले सांप जैसे धब्बों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. शुरुआती अवस्था में रोग की पहचान कर उचित प्रबंधन अपनाने से नुकसान को कम किया जा सकता है.



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