Russian Oil : पश्चिमी देशों का नाटक है रूसी तेल पर लगा प्रतिबंध, खुद भारत से बढ़ाई 43 फीसदी खरीद

Russian Oil : पश्चिमी देशों का नाटक है रूसी तेल पर लगा प्रतिबंध, खुद भारत से बढ़ाई 43 फीसदी खरीद


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Russian Oil : जिन पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगाया था, वही देश भारत से रूसी तेल से तैयार ईंधन खरीद रहे हैं. आंकड़ों में साफ दिख रहा है कि इन देशों ने भारत से आयात 43 फीसदी बढ़ गया है. भारत से निर्यात किया जाने वाला यह तेल रूसी क्रूड से बना है और इसे खरीदने वालों में अमेरिका भी शामिल रहा है.

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पश्चिमी देशों ने भारत से रूसी क्रूड से बना ईंधन खूब खरीदा है.

नई दिल्ली. अमेरिका और यूरोप सहित तमाम पश्चिमी देशों ने एक तरफ तो रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा रखा है और दूसरी ओर खुद ही भारत सहित अन्य देशों से रूसी तेल से बने ईंधन खरीद रहे हैं. पश्चिमी देश अपने ही फैसले के खिलाफ इस कदर रूसी ईंधन खरीद रहे कि उनका भारत से निर्यात 43 फीसदी बढ़ गया है. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण जारी रखते हुए भारत और दो अन्य देशों की रिफाइनरियों ने पश्चिमी देशों को तेल उत्पादों का निर्यात सितंबर में 43 फीसदी बढ़ा दिया है.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत सहित दो अन्य देशों से पश्चिमी देशों को करीब 1 अरब यूरो यानी 12 हजार करोड़ रुपये का तेल भेजा गया, जो रूसी क्रूड से बनाया गया है. यह निर्यात उन देशों को किया गया, जिन्होंने रूसी कच्चे तेल से बने ईंधन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. भारत में गुजरात स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जामनगर रिफाइनरी ने सितंबर में यूरोपीय संघ (ईयू) के बंदरगाह पर पहुंचे 7 में से 6 मालवाहक जहाज को ईंधन की आपूर्ति की है. यह सप्लाई ऐसे समय हुई, जब यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल से तैयार तेल उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा रखा है.

किस देश ने कितना तेल खरीदा
सीआरईए की रिपोर्ट में भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की उन रिफाइनरियों से हुए निर्यात का आकलन किया गया है, जो रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण करती हैं. इन देशों की रिफाइनरी से यूरोपीय संघ ने 66.7 करोड़ यूरो, ऑस्ट्रेलिया ने 16.8 करोड़ यूरो, अमेरिका ने 15.4 करोड़ यूरो और न्यूजीलैंड ने 1.9 करोड़ यूरो के तेल उत्पाद खरीदे. इन उत्पादों में 29.5 करोड़ यूरो मूल्य के उत्पाद रूसी कच्चे तेल से तैयार किए गए थे. भारत की जामनगर रिफाइनरी ने अमेरिका को भी सबसे अधिक मूल्य का निर्यात किया, जिसकी कीमत 12.2 करोड़ यूरो थी. जुलाई से सितंबर के दौरान रिफाइनरी के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 32 फीसदी रही.

भारत से किन देशों को निर्यात
यूरोपीय संघ को भेजे गए सात मालवाहक जहाज में से तीन इटली, दो रोमानिया और एक-एक स्पेन और साइप्रस पहुंचे. रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण करने वाली रिफाइनरी इकाइयों से यूरोपीय संघ के बंदरगाहों के लिए घोषित निर्यात का मूल्य अगस्त की तुलना में सितंबर में 80 फीसदी बढ़ा. इसमें जामनगर रिफाइनरी से भेजा गया 1.04 लाख टन गैस ऑयल (डीजल) का एक जहाज भी शामिल है, जो अभी रॉटरडैम के रास्ते में था. यूरोपीय संघ ने जनवरी, 2026 में रूसी कच्चे तेल से तैयार तेल उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाया था, लेकिन शुद्ध कच्चा तेल निर्यातक देशों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है. सीआरईए का कहना है कि इस छूट से नियमों में एक खामी रह जाती है, क्योंकि किसी देश का शुद्ध तेल निर्यातक होना यह सुनिश्चित नहीं करता कि उसकी रिफाइनरी रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण नहीं करेंगी.

भारत का रूसी तेल आयात भी घटा
सीआरईए के अनुसार, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात सितंबर में 13 फीसदी घट गया. यह लगातार दूसरी मासिक गिरावट थी और अप्रैल के बाद सबसे निचला स्तर था. देश की तीन सबसे बड़ी रूसी तेल आयातक रिफाइनरी इकाइयों में भी आयात कम हुआ. जामनगर में 27 फीसदी, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) की पारादीप रिफाइनरी में 21 फीसदी और नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी में 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. रिपोर्ट में कहा गया है कि आयात में गिरावट के बावजूद वाडिनार ने जामनगर को पीछे छोड़ते हुए सितंबर में भारत के सबसे बड़े रूसी कच्चे तेल आयातक का स्थान हासिल कर लिया. भारत सितंबर, 2026 में रूस से जीवाश्म ईंधन खरीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश रहा. भारत ने इस महीने रूस से कुल 410 करोड़ यूरो का ईंधन आयात किया. इसमें 360 करोड़ यूरो का कच्चा तेल शामिल था, जिसकी कुल खरीद में 88 फीसदी हिस्सेदारी रही. शेष आयात में 30.9 करोड़ यूरो का कोयला और 16.1 करोड़ यूरो के तेल उत्पाद शामिल थे.



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