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Pilot Baba Ashram Nainital: अगर आप नैनीताल के आसपास घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो गेठिया में स्थित महायोगी पायलट बाबा के आश्रम आ सकते हैं. हल्द्वानी-अल्मोड़ा रोड पर स्थित यह आश्रम अपनी भव्यता, करीब 50 फीट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा और मां भगवती के मंदिर के लिए जाना जाता है. बताया जाता है कि 1980 के दशक में बने इस आश्रम में अब 100 से ज्यादा कमरे हैं. हालांकि, यहां आम पर्यटकों को प्रवेश की अनुमति नहीं है और मुख्य रूप से बाबा के अनुयायी ही यहां आ सकते हैं. लेकिन आप आश्रम के बाहर स्थित मंदिर के दर्शन कर सकते हैं. यहां आपको आध्यात्म की अनुभूति होगी. आश्रम से जुड़ी साधना की कहानियां और इसकी खास बनावट इसे आसपास के धार्मिक स्थलों से अलग बनाती हैं.
Pilot Baba Ashram Nainital: नैनीताल के आसपास घूमने के लिए वैसे तो कई खूबसूरत जगहें हैं, लेकिन गेठिया गांव में बना महायोगी पायलट बाबा का आश्रम ( Pilot Baba Ashram) अपनी अलग पहचान रखता है. कई बीघे में फैले इस आश्रम में 50 फीट ऊंची हनुमान जी की मूर्ति और मां दुर्गा का मंदिर देखने को मिलता है. हल्द्वानी-अल्मोड़ा रोड पर स्थित यह आश्रम धार्मिक मान्यताओं और पायलट बाबा से जुड़ी कहानियों के लिए भी जाना जाता है.
नैनीताल जिले के भीमताल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले तल्ला गेठिया गांव में स्थित इस आश्रम में सुंदर मूर्तियां और करीब 100 से ज्यादा कमरे हैं. हालांकि, यहां आश्रम के अंदर आम लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं है. आश्रम में केवल बाबा के देशी-विदेशी भक्त ही आ सकते हैं. इसके इतिहास और मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के कारण यह जगह लोगों के बीच खास महत्व रखती है. लेकिन आप यहां आश्रम में स्थित मंदिर के दर्शन कर सकते हैं. मंदिर में आपको आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा. यहां हनुमान जी की करीब 50 फीट ऊंची मूर्ति और दुर्गा माता का मंदिर सबसे बड़ा आकर्षण है.
स्थानीय लोग बताते हैं कि महायोगी पायलट बाबा ने इस आश्रम को 1980 के दशक में बनवाया था. उस समय यहां कुछ ही कमरे थे. धीरे-धीरे बाबा की प्रसिद्धि बढ़ने के साथ आश्रम का विस्तार होता गया और आज यहां करीब 100 से ज्यादा कमरे मौजूद हैं. आश्रम की ओर जाते समय रास्ते में हनुमान जी की करीब 50 फीट ऊंची मूर्ति भी देखने को मिलती है. वहीं, आश्रम में बना मां दुर्गा का मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है. यहां से गुजरने वाले पर्यटक मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं.
मां दुर्गा के मंदिर से जुड़ी है खास मान्यता
मंदिर के पुजारी संपूर्णानंद त्रिपाठी बताते हैं कि पायलट बाबा ने साधना के दौरान कई अन्य लोकों के दर्शन किए थे. इसके बाद उन्होंने यहां देवी की मूर्ति स्थापित की. पुजारी के मुताबिक, मान्यता है कि जब कोई सिद्ध योगी किसी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करता है, तो वह विशेष महत्व रखती है. इसी मान्यता के चलते श्रद्धालु मंदिर में मां भगवती का ध्यान करने और उनका आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं. लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मां का ध्यान करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
बिहार के सासाराम में हुआ था पायलट बाबा का जन्म
संपूर्णानंद त्रिपाठी बताते हैं कि महायोगी पायलट बाबा का जन्म बिहार के सासाराम में हुआ था. वह अपने गुरु हरि बाबा से काफी प्रभावित थे. गुरु से प्रेरित होकर उन्होंने संन्यास लिया और कई महीनों तक हिमालय में तपस्या की. इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड के कालीचौड़ मंदिर में भी साधना की थी. बताया जाता है कि उन्होंने पिंडारी ग्लेशियर में 33 दिनों तक समाधि लगाई थी. उनकी साधना और आध्यात्मिक जीवन से जुड़ी कई बातें आज भी उनके भक्तों के बीच चर्चा में रहती हैं.
बाबा के आने पर आश्रम में जुटते थे भक्त
स्थानीय निवासी मनोज जोशी बताते हैं कि आम दिनों में आश्रम में शांति रहती है. हालांकि, जब भी पायलट बाबा आश्रम में आते थे, उस दौरान यहां भक्तों की भीड़ देखने को मिलती थी. उनके मुताबिक, बाबा के भक्त केवल भारत में ही नहीं, बल्कि जर्मनी, जापान, इटली और रूस जैसे देशों में भी हैं. इसी वजह से आश्रम से देश-विदेश के कई श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है.
महायोगी पायलट बाबा का आश्रम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में भीमताल ब्लॉक के अंतर्गत तल्ला गेठिया गांव में स्थित है. यह हल्द्वानी से करीब 30 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा-हल्द्वानी रोड पर पड़ता है. मुख्य सड़क के पास स्थित होने के चलते आप यहां बिना किसी परेशानी के पहुंच सकते हैं.