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JEE Advanced Third Attempt Rules: नीट की तरह अब जेईई एडवांस्ड के पैटर्न में भी बदलाव किया जा सकता है. 12 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स की याचिका के बाद आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मनिंद्र अग्रवाल ने जेईई परीक्षा में बदलाव और कोचिंग पर निर्भरता को लेकर बड़ी जानकारी दी है.
JEE Advanced Third Attempt Rules: जेईई एडवांस परीक्षा पैटर्न में बदलाव पर विचार किया जा रहा है
नई दिल्ली (JEE Advanced Third Attempt Rules). इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जेईई एडवांस्ड सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है. जेईई एडवांस्ड परीक्षा पैटर्न में बदलाव की तैयारी चल रही है. आने वाले समय में इस परीक्षा के लिए सिर्फ 2 नहीं, बल्कि 3 मौके मिल सकते हैं. लंबे समय से देश के लाखों युवा कोविड-19 और अन्य असाधारण परिस्थितियां देखते हुए अटेंप्ट्स की सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे. इस मामले पर IIT कानपुर के निदेशक मनिंद्र अग्रवाल ने बड़ा संकेत दिया है.
क्या अब जेईई एडवांस्ड में 3 मौके मिलेंगे?
मौजूदा नियमों के अनुसार, कोई भी अभ्यर्थी 12वीं बोर्ड परीक्षा वाले वर्ष और उसके ठीक अगले साल- यानी कुल 2 बार ही जेईई एडवांस्ड की परीक्षा दे सकता है.
- अभ्यर्थियों की मांग: कोरोना काल में मिली विशेष छूट के बाद से अभ्यर्थी इसे स्थायी रूप से 3 अटेंप्ट करने की मांग कर रहे हैं. हाल ही में 12,000 से अधिक छात्रों ने ऑनलाइन पिटीशन साइन करके इस मांग को फिर से जोर दिया है.
- आईआईटी डायरेक्टर का बयान: NBT की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर मनिंद्र अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि भले ही अभी तुरंत कोई बदलाव लागू न किया जा रहा हो, लेकिन ‘अगले कुछ वर्षों में’ इस पर विचार किया जा सकता है. उन्होंने तीसरा मौका देने की संभावना से इनकार नहीं किया है.
कोचिंग पर बढ़ती निर्भरता पर IIT डायरेक्टर की चिंता
- समस्या: आज के समय में बिना भारी-भरकम फीस वाली कोचिंग के इस परीक्षा को क्रैक करना बहुत मुश्किल माना जाने लगा है. इससे सामान्य और गरीब परिवार के होनहार बच्चों पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.
- समाधान की कोशिश: आईआईटी प्रशासन परीक्षा का पैटर्न बदलने पर मंथन कर रहा है. इससे कोचिंग माफिया का दबदबा कम होगा और सिर्फ रट्टा मारने या शॉर्टकट सीखने वाले नहीं, बल्कि असली वैचारिक समझ वाले छात्र आगे आ सकेंगे.
तीसरे अटेंप्ट से किन स्टूडेंट्स को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
अगर भविष्य में जेईई एडवांस्ड में 3 प्रयासों का नियम लागू होता है तो इससे कई अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी:
- देर से जानकारी पाने वाले स्टूडेंट्स: दूर-दराज या ग्रामीण इलाकों के ऐसे मेधावी छात्र, जिन्हें इस परीक्षा की सही जानकारी थोड़ी देर से मिलती है, उन्हें एक और मौका मिल सकेगा.
- इमरजेंसी सिचुएशन: जो छात्र बीमारी, पारिवारिक आपदा या अपने कंट्रोल से बाहर की समस्याओं के कारण अपना एक मौका गंवा चुके हैं.. वे बिना करियर बर्बाद होने के डर के दोबारा तैयारी कर सकेंगे.
नुकसान: जानकारों का मानना है कि तीसरा मौका मिलने से स्टूडेंट्स तैयारी में एक साल और ज्यादा लगाएंगे. इससे उन पर और उनके परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ (कोचिंग का खर्च) बढ़ सकता है.
जेईई एडवांस्ड परीक्षा पैटर्न में सुधार कैसे होगा?
एकेडमिक्स एक्सपर्ट का मानना है कि सिर्फ अटेंप्ट बढ़ाने से समस्या हल नहीं होगी. जेईई एडवांस्ड परीक्षा का पैटर्न स्कूल की बेसिक पढ़ाई और कॉन्क्लूसिव थिंकिंग पर बेस्ड बनाना जरूरी है. अगर आप जेईई की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ कोचिंग के शॉर्टकट फॉर्मूलों पर निर्भर न रहें. NCERT की किताबों से अपने बेसिक्स मजबूत करें और कॉन्सेप्ट्स की क्लेरिटी पर ज्यादा ध्यान दें. आईआईटी अब रटने के बजाय दिमागी कसरत करवाने वाले सवाल ज्यादा पूछ रहा है.