कानपुर : मर्चेंट नेवी में करीब 20 साल से नौकरी कर रहे चीफ इंजीनियर नितिन शुक्ला आखिरकार अपने घर लौट आए. उन्होंने होर्मुज में ड्रोन हमले के दौरान अदम्य साहस दिखाया, जिसकी बात हर तरफ हो रही है. जैसे ही नितिन शुक्ला घर लौटे तो सभी ने ढोल-नगाड़ों से स्वागत किया. वहीं चीफ इंजीनियर ने खौफनाक दिनों के बारे में सब बताया.
नितिन शुक्ला कानपुर के श्याम नगर के रहने वाले हैं. करीब 20 वर्षों से मर्चेंट नेवी में सेवाएं दे रहे नितिन की सकुशल वापसी से परिवार ने राहत की सांस ली. कानपुर में एक और आस पड़ोस के लोगों ने ढोल नगाड़े के साथ स्वागत किया. वहीं सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने यह निर्णय लिया है दशहरा से लेकर दीपावली तक हर रोज अलग-अलग स्थान पर इस वीर जांबाज मर्चेंट नेवी के इंजीनियर का सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा.
यह है मामला
9 अक्टूबर को होर्मुज क्षेत्र में उनके जहाज पर ड्रोन हमला हुआ. उस समये उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना जहाज पर मौजूद 21 क्रू मेंबर्स को लाइफबोट के जरिए सुरक्षित निकालने में अहम भूमिका निभाई थी. हमले के बाद स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी. ऐसे समय में उन्होंने क्रू मेंबर्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दी और सभी को लाइफबोट में भेजने के बाद खुद सबसे आखिर में सवार हुए. इस दौरान उनके पासपोर्ट और अन्य जरूरी दस्तावेज भी जहाज पर ही जल गए.
खुद बताई पूरी दास्तां
सहासी मर्चेंट नेवी अफसर ने बताया कि 9 अक्टूबर को जहाज पर कुछ कर्मचारी डेक पर काम कर रहे थे. तभी उन्होंने ड्रोन को आते देखा. कुछ ही देर में ड्रोन ने डेक पर हमला कर दिया. अचानक हुए हमले से जहाज पर अफरातफरी मच गई. जहाज पर क्रूड ऑयल होने के कारण आग लगने का खतरा और भी बढ़ गया था. सभी ने सावधानी बरती और फायर फाइटिंग सिस्टम की मदद से आग पर काबू पा लिया. उस समय लगा कि शायद खतरा टल गया है, लेकिन मन में बैठा डर खत्म नहीं हुआ. नितिन और उनकी टीम जहाज की मशीनरी को हुए नुकसान का आकलन करने और रिपोर्ट तैयार करने में जुट गई. कंपनी से जहाज को पोर्ट पर ले जाने को लेकर भी बातचीत चल रही थी. हालांकि, इसके लिए अनुमति और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी थीं.
उन्होंने कहा कि 10 अक्टूबर को जहाज को हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए कोस्ट गार्ड और बम निरोधक टीम भी पहुंची. उम्मीद थी कि नुकसान का आकलन होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन शाम करीब 5:30 बजे अचानक हालात बदल गए. लगातार चार से पांच हमले हुए. इसके बाद जहाज में आग लग गई. आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि उसे काबू करना मुश्किल होता जा रहा था. फायर कंट्रोल स्टेशन से सूचना देकर आग बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन हालात बिगड़ते चले गए. यह ड्रोन हमला था या मिसाइल हमला, उस समय यह स्पष्ट कर पाना मुश्किल था. सामने जहाज में फैलती आग थी और पीछे जान बचाने की चुनौती. ऐसे में सबसे जरूरी था कि जहाज पर मौजूद सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए.
उन्होंने आगे कहा कि हालात में घबराने के बजाय अपने साथियों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी संभाली. पहले 21 क्रू मेंबर्स को लाइफबोट के जरिए बाहर निकाला और फिर खुद उसमें सवार हुए. जहाज से दूर निकलते समय पीछे आग और तबाही का मंजर साफ दिख रहा था. ऐसे में लग रहा था कि किसी भी तरह से सुरक्षित घर पहुंच जाए. लाइफबोट से करीब पांच मील का सफर तय करने में लगभग आधा घंटा लगा. इसके बाद सभी लोग सुरक्षित पोर्ट तक पहुंचे. यूएई कोस्ट गार्ड ने उनका रेस्क्यू किया और मिलिट्री बेस पर ले जाया गया. इसके बाद स्थानीय एजेंसी और कंपनी के अधिकारियों की मदद से सभी 22 लोगों को शारजाह के एक होटल में ठहराया गया.
हमले के दौरान नितिन और उनके साथियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप, पासपोर्ट और दूसरे जरूरी दस्तावेज जहाज पर ही छूट गए थे. ऐसे में सुरक्षित जगह पहुंचने के बाद भी मुश्किलें खत्म नहीं हुईं. घर लौटने के लिए जरूरी कागजात जुटाने थे और औपचारिकताएं पूरी करनी थीं. नितिन ने बताया कि कंपनी और वहां के एजेंट ने मदद की. जरूरी दस्तावेज तैयार होने के बाद ही भारत लौटने का रास्ता साफ हो सका. आखिरकार घर वापस आ गया. अब सब ठीक है.