अमेरिका में H-1B वीजा और विदेशी पेशेवरों की नौकरियों को लेकर बहस जारी है. इसी बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने ‘विदेशी बंधुआ मजदूर’ वाले बयान पर सफाई दी है. उन्होंने माना कि उनकी बात कहने का तरीका गलत हो सकता है, लेकिन अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता पर कायम रहे. अपनी बात समझाने के लिए वेंस ने पत्नी उषा वेंस के परिवार का उदाहरण भी दिया. उन्होंने कहा कि उनके सास-ससुर दक्षिण भारत से अमेरिका आए थे और उनकी बेटी आज अमेरिका की सेकंड लेडी हैं. वेंस ने साफ किया कि उनका मकसद अप्रवासियों का अपमान करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था पर सवाल उठाना है, जिसमें कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों को रखने से फायदा मिल सकता है.
‘मेरी भाषा गलत रही तो जिम्मेदारी मेरी’
अमेरिकी चैनल CBS न्यूज के कार्यक्रम ‘थिंग्स दैट मैटर – अ टाउन हॉल विद वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस’ में एक नागरिक ने वेंस से उनके पुराने बयान को लेकर सवाल किया. करीब 20 साल पहले अमेरिका आईं निव अगरम ने कहा कि उन्हें सीमा सुरक्षा, मानव तस्करी और नशीले पदार्थों से जुड़ी चिंताएं थीं, न कि यह कि अप्रवासी अमेरिकियों की नौकरियां छीन रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जब इमीग्रेशन अधिकारियों की कार्रवाई और H-1B कर्मचारियों को ‘विदेशी बंधुआ मजदूर’ कहने जैसे बयान सामने आते हैं, तो इससे अमेरिकी नागरिकों और अप्रवासियों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है. उन्होंने वेंस से पूछा कि जिन समस्याओं को सरकार को हल करना चाहिए, उनके लिए अप्रवासियों को जिम्मेदार क्यों ठहराया जा रहा है.
जवाब में वेंस ने कहा कि उनका इरादा किसी भी अप्रवासी को अमानवीय दिखाने का नहीं था. उन्होंने स्वीकार किया कि अगर उनकी भाषा कहीं गलत रही है, तो इसकी जिम्मेदारी उनकी है. वेंस ने कहा, ‘मैं खुद कई अप्रवासियों से प्यार करता हूं. मेरे सास-ससुर दक्षिण भारत से आए हैं. उनकी बेटी अमेरिका में पैदा हुई और आज देश की सेकंड लेडी है. मुझे उस पर बहुत गर्व है और मैं उससे बहुत प्यार करता हूं.’
H-1B वीजा व्यवस्था पर क्या है वेंस की आपत्ति?
वेंस ने अपने विवादित बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनकी आलोचना विदेशी कर्मचारियों के बजाय उस व्यवस्था को लेकर है, जिसमें H-1B वीजा पर आए कर्मचारी अपने एंप्लॉयर पर काफी हद तक निर्भर हो सकते हैं. उनके मुताबिक, H-1B वीजा के तहत कंपनी यह प्रमाणित करती है कि संबंधित काम के लिए उसे उपयुक्त अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला. ऐसे में विदेशी कर्मचारी की नौकरी और अमेरिका में रहने की स्थिति एक-दूसरे से जुड़ जाती है. अगर कर्मचारी अपने बॉस से विवाद में पड़ता है या उसकी नौकरी चली जाती है, तो उसे अमेरिका में अपना प्रवास जारी रखने में मुश्किल हो सकती है.
वेंस का तर्क है कि ऐसी व्यवस्था कंपनियों को जरूरत से ज्यादा ताकत देती है. इसी संदर्भ में उन्होंने H-1B कर्मचारियों के साथ होने वाले व्यवहार की तुलना बंधुआ मजदूरी से की थी. हालांकि, यह उनकी व्यवस्था की आलोचना करने के लिए इस्तेमाल की गई उपमा थी. उन्होंने बड़ी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर एक खरब डॉलर की कंपनी यह दावा करती है कि उसे अकाउंटेंट नहीं मिल रहा और वह पहले से काम कर रहे अमेरिकी कर्मचारी को हटाकर विदेश से किसी व्यक्ति को नियुक्त करती है, तो इससे अमेरिकी कर्मचारी को नुकसान हो सकता है. वेंस के अनुसार, ऐसी स्थिति विदेशी कर्मचारी के हित में भी नहीं है.
सामाजिक सामंजस्य पर भी उठाए सवाल
अपनी बात आगे बढ़ाते हुए वेंस ने सामाजिक सामंजस्य यानी समाज में लोगों के बीच जुड़ाव और साझा पहचान का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि वह ऐसा देश चाहते हैं, जहां समुदाय की भावना बनी रहे. वेंस के मुताबिक, जब बहुत कम समय में बड़ी संख्या में लोग किसी देश में आते हैं, तो वहां के समाज का स्वरूप बदल सकता है. उन्होंने अपने पड़ोस का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ लोग अपने आसपास अपनी भाषा बोलने वाला व्यक्ति तक नहीं ढूंढ पाते. उन्होंने इसे किसी खास समुदाय की आलोचना बताते हुए पेश नहीं किया, बल्कि कहा कि अगर कोई अमेरिकी अपने पड़ोस में ऐसे लोगों के साथ रहना चाहता है, जिनसे उसकी कुछ समानताएं हों, तो इसमें गलत नहीं है.
उषा वेंस के भारतीय परिवार का जिक्र क्यों अहम?
वेंस की पत्नी उषा वेंस भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक हैं और उनके माता-पिता भारत के दक्षिणी हिस्से से अमेरिका आए थे. ऐसे में अपने परिवार का उदाहरण देकर वेंस ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि विदेशी मूल के लोगों के प्रति उनके व्यक्तिगत रिश्ते और H-1B व्यवस्था को लेकर उनकी राजनीतिक सोच अलग-अलग मुद्दे हैं.