CLAT में लाए AIR 40, अब CJI से मिली लॉ की डिग्री, बेटे की सफलता पर भावुक हुए असम CM हिमंत बिस्वा सरमा

CLAT में लाए AIR 40, अब CJI से मिली लॉ की डिग्री, बेटे की सफलता पर भावुक हुए असम CM हिमंत बिस्वा सरमा


नई दिल्ली: बच्चों की सफलता माता-पिता के लिए सबसे खुशी के पलों में से एक होती है. जब सालों की मेहनत का नतीजा सामने आता है, तो माता-पिता के लिए अपनी भावनाओं को रोक पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसा ही कुछ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ हुआ. उनके बेटे नंदिल सरमा को बेंगलुरु की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) से लॉ की डिग्री मिली है. इस खास मौके पर मुख्यमंत्री ने अपने बेटे की एक तस्वीर साझा की और बताया कि उस समय वह मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि एक गर्व महसूस करने वाले पिता थे.

बेटे को डिग्री मिलते ही भावुक हुए हिमंत बिस्वा सरमा

हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपने बेटे नंदिल की तस्वीर साझा की. इस तस्वीर में नंदिल भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से अपनी लॉ की डिग्री लेते नजर आए. इस खास पल को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि उस दिन वह सिर्फ एक गर्व करने वाले पिता थे.

उन्होंने बताया कि बेटे को डिग्री लेते हुए देखना उनके लिए बेहद भावुक पल था. इस मौके पर उन्हें अपने बेटे के साथ बिताए पुराने दिन भी याद आ गए. एक पिता के तौर पर बेटे की मेहनत और सफलता को सामने देखकर उनकी खुशी साफ झलक रही थी.

CLAT की तैयारी के लिए बेटे ने लिया था एक साल का ब्रेक

हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने संदेश में बेटे की पढ़ाई से जुड़ा एक खास किस्सा भी साझा किया. उन्होंने बताया कि जब नंदिल ने CLAT की तैयारी के लिए एक साल का ब्रेक लेने की बात कही थी, तो उनके मन में कई सवाल और चिंताएं थीं. उन्होंने अपनी पत्नी रिनिकी और खुद के साथ हुई उस बातचीत को याद किया.

हालांकि, नंदिल को अपने फैसले पर पूरा भरोसा था. उन्होंने तय किया कि वह एक साल तक CLAT की तैयारी करेंगे और इसके लिए उन्होंने पूरी मेहनत की. उनकी मेहनत रंग भी लाई और उन्होंने इस परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 40 हासिल की.

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेटे की इस सफलता ने उन्हें एक अहम बात सिखाई. माता-पिता अपने बच्चों को सही रास्ता दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार बच्चों के फैसलों पर भरोसा करना भी उतना ही जरूरी होता है. उन्होंने नंदिल को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उन्हें अपने बेटे पर बहुत गर्व है.

लॉ की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को CJI सूर्यकांत का संदेश

वहीं, NLSIU बेंगलुरु के 34वें दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कानून (Law) की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि कानून की शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ किताबों और कानूनी नियमों को समझना नहीं है. छात्रों को अलग-अलग विचारों को समझना और समाज के हर वर्ग की बात सुनना भी सीखना चाहिए.

उन्होंने कहा कि वकालत के पेशे में कानून की जानकारी के साथ-साथ सही बात के लिए खड़े होने का साहस भी जरूरी है. एक अच्छे वकील को उन लोगों की आवाज भी सुननी चाहिए, जिनकी बात अक्सर समाज में अनसुनी रह जाती है.

न्याय और संविधान के मूल्यों को बनाए रखने की अपील

CJI सूर्यकांत ने नए लॉ ग्रेजुएट से न्याय की रक्षा करने, लोगों की आजादी का सम्मान करने और संविधान के मूल्यों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने की अपील की. उन्होंने कहा कि देश को ऐसे कानून के जानकारों की जरूरत है, जो केवल अपने पेशे तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी योगदान दें.

उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि वे अपने करियर में ऐसा काम करें, जिसका समाज और देश पर अच्छा असर पड़े. उनके अनुसार, कानून का पेशा केवल नियमों को जानने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें न्याय के लिए खड़े होना और दूसरों के विचारों को समझना भी जरूरी है.



Source link