नई दिल्ली: दिल्ली एक ऐसी जगह है, जो देश की राजधानी होने के साथ ही यहां का कल्चर बहुत ही मिक्स है, क्योंकि यह देश की राजधानी है तो यहां पर हर एक राज्य के लोग रहते हैं. कहीं पर बिहार देखने को मिलता है तो कहीं झारखंड तो कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां पर ज्यादातर उत्तर प्रदेश के लोग रहते हैं. कहीं-कहीं पर जम्मू कश्मीर से लेकर मध्य प्रदेश तक की आबादी नजर आती है.
यही वजह है कि दिल्ली में हर कोई अपने राज्य की पसंदीदा चीज को खरीदना चाहता है. ऐसे में दिल्ली में एक ऐसी छिपी हुई जगह है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, लेकिन यह जगह ऐसी है. जहां पर हर एक राज्य का प्रोडक्ट मिलता है और हर एक राज्य का शोरूम बना हुआ है. यहां शोरूम में उस राज्य के कपड़े से लेकर खाने पीने तक का सारा सामान मिलता है. आइये जानते हैं इस जगह के बारे में.
केरल, बिहार और उत्तर प्रदेश तक के यहां है शोरूम
यहां आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह जगह कौन सी है. यहां पर देश के सभी राज्यों के शोरूम हैं. आपको बता दें कि यह जगह और कोई नहीं, बल्कि दिल्ली का कनॉट प्लेस है. इस पूरे इलाके को ही स्टेट एंपोरिया कॉम्प्लेक्स कहते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि 2 किलोमीटर लंबे इस परिसर में हर एक राज्य का शोरूम है.
यहां पर हैदराबाद, केरल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा से लेकर महाराष्ट्र और जम्मू कश्मीर से लेकर लद्दाख तक के शोरूम यहां पर है. हर एक शोरूम में यहां पर लोकल प्रोडक्ट आपको मिलेगा. यहां के खास कपड़े मिलेंगे और तो और ये शोरूम देखने में भी काफी लग्जरी लगते हैं. यही वजह है कि यहां देश के साथ ही विदेशी पर्यटक भी जाते हैं, क्योंकि दिल्ली घूमने के लिए सबसे ज्यादा विदेशी पर्यटक यहां आते हैं. उनको राजधानी में देश के सभी राज्यों का प्रोडक्ट एक जगह मिल जाता है.
जानें क्यों बनाई गई थी यह जगह
दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट प्लेस में इस जगह को इसलिए बनाया गया था. ताकि इसका मुख्य उद्देश्य केवल दुकानें खोलना नहीं, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना और उनकी कला को बढ़ावा देना है. गांवों और छोटे शहरों में काम करने वाले बुनकरों, शिल्पकारों और कलाकारों के उत्पादों को दिल्ली जैसे बड़े बाजार में पहुंचने का अवसर देना भी इसका उद्देश्य था. किसी राज्य की साड़ी, आभूषण, पेंटिंग, लकड़ी की नक्काशी या धातु से बनी कलाकृति को लोग उसी राज्य की विशेषता के रूप में पहचान सके. हाथ से बनने वाले उत्पादों और पीढ़ियों से चली आ रही कारीगरी को प्रोत्साहन देना भी इसका एक मुख्य उद्देश्य था.