जौनपुर के अकरम जौनपुरी ने 35 साल में लिखे 10 हजार अधिक शायरियां, मोहब्बत, इंसानियत और देशप्रेम का दे रहे पैगाम

जौनपुर के अकरम जौनपुरी ने 35 साल में लिखे 10 हजार अधिक शायरियां, मोहब्बत, इंसानियत और देशप्रेम का दे रहे पैगाम


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जौनपुर के प्रसिद्ध शायर अकरम जौनपुरी पिछले 35 वर्षों से साहित्य की दुनिया में सक्रिय हैं. उन्होंने 10 हजार से अधिक शायरियां लिखी हैं, जिनमें मोहब्बत और इंसानियत की झलक मिलती है. अदाओं में अदाकारी नहीं है, हमें शोहरत की बीमारी नहीं है. अभी कुछ लोग करते हैं मोहब्बत, अभी इंसानियत हारी नहीं है”. अपनी इन पंक्तियों से लोगों के दिलों को छूने वाले जौनपुर के शायर अकरम जौनपुरी ने शेर-ओ-शायरी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है.

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जौनपुर: अदाओं में अदाकारी नहीं है, हमें शोहरत की बीमारी नहीं है. अभी कुछ लोग करते हैं मोहब्बत, अभी इंसानियत हारी नहीं है” अपनी इन पंक्तियों से लोगों के दिलों को छूने वाले जौनपुर के शायर अकरम जौनपुरी ने शेर-ओ-शायरी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है. करीब 35 वर्षों से साहित्य की दुनिया में सक्रिय अकरम जौनपुरी अब तक 10 हजार से अधिक शायरियां लिख चुके हैं. उनकी शायरी में मोहब्बत, इंसानियत, देशप्रेम और सामाजिक एकता की झलक दिखाई देती है.

जौनपुर में हिंदी और उर्दू साहित्य की रही है परंपरा

जौनपुर को शिराज-ए-हिंद कहा जाता है. यह शहर लंबे समय से शिक्षा, कला और साहित्य के लिए जाना जाता है. अकरम जौनपुरी बताते हैं कि शिराज ईरान का एक प्रसिद्ध शहर है, जो इल्म और फन के लिए मशहूर रहा है. इसी वजह से जौनपुर को भी शिराज-ए-हिंद की उपाधि से जाना जाता है. यहां हिंदी और उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा रही है. कई बड़े शायरों ने अपनी रचनाओं से इस परंपरा को आगे बढ़ाया है.

अकरम जौनपुरी की शायरी में अपने वतन और समाज के प्रति प्रेम साफ नजर आता है. देश के प्रति अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए वह कहते हैं, धरती है प्यार-मोहब्बत की, मानवता की पहचान है ये. नफरत की यहां मत बात करो नादानो, हिंदुस्तान है.” उनकी यह शायरी आपसी भाईचारे और देश की एकता का संदेश देती है. उनका मानना है कि शायरी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों के दिलों को जोड़ने और समाज में अच्छी सोच फैलाने का जरिया भी है.

शायरी का जौनपुर में है अच्छा माहौल

अकरम जौनपुरी के मुताबिक, वर्तमान समय में भी जौनपुर में शेर-ओ-शायरी का अच्छा माहौल है. यहां नियमित रूप से साहित्यिक बैठकें और मुशायरे आयोजित होते रहते हैं. इनमें हिंदी और उर्दू के शायर एक साथ मंच साझा करते हैं. वह कहते हैं कि जौनपुर में मोहब्बत और आपसी भाईचारे की अच्छी फिजा है. पुराने शायरों में मुंशी रजा साहब, कामिल शकील साहब और अन्य साहित्यकारों का योगदान उल्लेखनीय रहा है. मौजूदा दौर में भी अहमद निसार साहब, विरहत मछलीशहरी सहित कई शायर अपनी रचनाओं से साहित्य को समृद्ध कर रहे हैं.

करीब 35 वर्षों के अपने साहित्यिक सफर में अकरम जौनपुरी ने हजारों रचनाएं लिखी हैं. अब उनकी दो किताबें जल्द प्रकाशित होने वाली हैं. उनका कहना है कि जो लोग समाज को करीब लाने, दिलों को जोड़ने और अच्छी बातें फैलाने का काम करते हैं, उनका उत्साह बढ़ाया जाना चाहिए. सरकार को भी ऐसे साहित्यकारों की हौसला-अफजाई करनी चाहिए और उनकी समस्याओं को दूर करने के लिए कदम उठाने चाहिए।. अकरम जौनपुरी की शायरी मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम देते हुए साहित्य के प्रति उनकी लंबी साधना को दर्शाती है.



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