नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल में आंखों से जुड़ी समस्याएं लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं. आंखों में जलन, खुजली, लालिमा, किरकिरापन और पानी आने जैसी शिकायतों के साथ मरीज बीडी पांडे जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं. अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपिका लोहनी के मुताबिक, इन दिनों ड्राई आई यानी आंखों में सूखापन और पिंक आई यानी आई फ्लू से पीड़ित मरीज सामने आ रहे हैं. इनमें बच्चे और बड़े, दोनों शामिल हैं. डॉक्टरों ने आंखों में होने वाली इन परेशानियों को नजरअंदाज न करने और समय रहते उचित उपचार करने की अपील की है.
डॉ. दीपिका लोहनी के अनुसार, इन दिनों अस्पताल में रोजाना ड्राई आई के करीब 5 से 10 मरीज पहुंच रहे हैं. वहीं, पिंक आई यानी आई फ्लू के लगभग 4 से 5 मरीज प्रतिदिन उपचार के लिए आ रहे हैं. इसके अलावा, स्क्रीन टाइम से जुड़ी आंखों की परेशानी के करीब 5 से 6 मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं. डॉक्टर के मुताबिक, आंखों से जुड़ी इन समस्याओं का असर बच्चों पर भी देखने को मिल रहा है. लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन और असहजता महसूस हो सकती है. ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के स्क्रीन टाइम पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
पलकों का चिपकना हो सकता है आई फ्लू का संकेत
पिंक आई को आमतौर पर आई फ्लू भी कहा जाता है, इसमें आंखों में संक्रमण और सूजन के कारण कई तरह के लक्षण दिखाई दे सकते हैं. आंखें लाल होना, पानी आना, खुजली, चुभन और किरकिरापन इसके प्रमुख लक्षण हैं. कुछ मरीजों को सुबह उठने पर पलकों के चिपकने की परेशानी भी होती है. डॉ. दीपिका लोहनी के मुताबिक, आई फ्लू के कुछ प्रकार संक्रामक होते हैं और संक्रमित आंखों के स्राव या दूषित हाथों और वस्तुओं के संपर्क से फैल सकते हैं. इसलिए संक्रमण से बचाव के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है. डॉक्टरों की सलाह है कि आंखों को बार-बार हाथों से न छुएं और हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोते रहें. तौलिया, रुमाल और आंखों के संपर्क में आने वाली व्यक्तिगत वस्तुएं दूसरों के साथ साझा करने से बचें. आंखों में लालिमा या स्राव की समस्या होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं या आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें.
क्या है ड्राई आई की समस्या, क्यों होती है जलन?
डॉक्टर दीपिका लोहनी बताती हैं कि ड्राई आई यानी आंखों में सूखापन होने पर आंखों की सतह को नम रखने वाली आंसुओं की परत यानी टियर फिल्म की मात्रा या गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. इसके कारण आंखों में सूखापन, जलन, चुभन और कुछ पड़ा होने जैसा एहसास हो सकता है. हैरानी की बात यह है कि सूखापन होने के बावजूद कुछ लोगों की आंखों से पानी भी आने लगता है. उन्होंने बताया कि, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से भी आंखों में परेशानी बढ़ सकती है. स्क्रीन पर लगातार ध्यान केंद्रित करने के दौरान लोग सामान्य से कम बार पलकें झपकाते हैं. इससे आंखों की नमी प्रभावित हो सकती है और जलन या थकान महसूस होने लगती है.
मोबाइल और कंप्यूटर इस्तेमाल करने वाले अपनाएं ये उपाय
डॉक्टर के मुताबिक, स्क्रीन के इस्तेमाल के दौरान बीच-बीच में ब्रेक लेना और नियमित रूप से पलकें झपकाना आंखों की परेशानी कम करने में मददगार हो सकता है. इसके लिए 20-20-20 नियम अपनाया जा सकता है. यानी हर 20 मिनट स्क्रीन देखने के बाद करीब 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को देखें. यह नियम आंखों के तनाव को कम करने में मदद कर सकता है, हालांकि इससे हर तरह की आंखों की समस्या से बचाव की गारंटी नहीं मिलती. इसके अलावा, स्क्रीन को उचित दूरी पर रखें, पर्याप्त रोशनी में काम करें और आंखों में लगातार जलन या सूखापन होने पर नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें. बच्चों को भी मोबाइल और कंप्यूटर से नियमित अंतराल पर ब्रेक दिलाना जरूरी है.