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Good News for India: डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ने वाला है. त्यौहारों के सीजन में अमेरिका ने रूस पर लगे प्रतिबंधों में छूट देने का ऐलान किया है. प्रतिबंधों, पाबंदियों और टैरिफ में छूट मिलने के बाद मॉस्को के साथ-साथ भारत को भी राहत मिल जाएंगी.
ट्रंप के फैसले से रूस के साथ-साथ भारत भी खुश.
Tariff Relief for India: अमेरिका से ऐसी खबर आई है, जिससे रूस के साथ-साथ भारत को भी फायदा होने वाला है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस के खिलाफ लगाए जाने वाले कई प्रतिबंधों, पाबंदियों और टैरिफ में छूट देने का फैसला किया है. यह कदम रूस पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से कानून पर साइन करने के कुछ ही सप्ताह बाद उठाया गया है. इस कानून का मकसद ही यूक्रेन पर रूस के हमले को लेकर मॉस्को पर आर्थिक दबाव बनाना था लेकिन अब ट्रंप प्रशासन इससे पलट गया है पर क्यों?
अमेरिकी सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका में डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. सरकार इन कीमतों को कम करने की कोशिश कर रही है. इसके साथ ही नवंबर में होने वाले मिड टर्म चुनाव भी नजदीक हैं, ऐसे में ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण प्रशासन के लिए अहम माना जा रहा है. ऊर्जा से जुड़े विवाद के अलावा जानकारों का मानना है कि इस फैसले से भारत के लिए कूटनीतिक अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
भारत को 100% अतिरिक्त टैरिफ के खतरे से राहत
ट्रंप के आदेश में नए कानून के तहत रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों से छूट दी गई है. इससे भारत को फिलहाल राहत मिल सकती है, क्योंकि भारत रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार है. हालांकि यह भारत के लिए अलग से घोषित छूट नहीं, बल्कि कानून के संबंधित टैरिफ पर व्यापक छूट है.
रूस पर लगे प्रतिबंधों पर राहत.
ट्रंप प्रशासन के फैसले में क्या-क्या?
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े नए कानून के कई अहम प्रावधानों पर फिलहाल छूट देने का फैसला किया है.
- 16 अक्टूबर को जारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि इन प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है. इसके लिए उन्होंने अमेरिकी संसद को लिखित प्रमाण पत्र भी सौंपा है.
- इस आदेश के तहत कानून के कई प्रतिबंधों और रूस से जुड़े कुछ अतिरिक्त शुल्कों को फिलहाल लागू नहीं करने की छूट दी गई है. यह छूट अगले आदेश तक जारी रहेगी.
- राष्ट्रपति या विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि से सलाह के बाद, जरूरत पड़ने पर इसे खत्म करने या आगे कार्रवाई करने का फैसला ले सकते हैं.
- हालांकि यह छूट रूस से जुड़े पहले के सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को खत्म नहीं करती. ट्रंप प्रशासन ने साफ किया है कि रूस की बाकी नुकसानदेह गतिविधियों को लेकर पहले जारी किए गए कार्यकारी आदेशों के तहत लगे प्रतिबंध अपनी जगह बने रहेंगे.
क्यों ट्रंप प्रशासन को लेना पड़ा यू टर्न?
ट्रंप प्रशासन ने एक तरफ रूस से जुड़े टैरिफ बढ़ाने का प्रावधान रखा है, वहीं दूसरी तरफ नए कानून के कई प्रावधानों से छूट भी दी है. व्हाइट हाउस के आदेश के मुताबिक इस छूट का आधार अमेरिका का राष्ट्रीय हित है. हालांकि इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं. दरअसल ट्रंप ने कुछ हफ्ते पहले ही लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026 पर हस्ताक्षर किए. इस कानून के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति उन देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगा सकते हैं जो रूस से सबसे ज्यादा तेल या गैस खरीदते हैं. अब अमेरिका का यू टर्न यहां होने वाले मिड टर्म इलेक्शन को लेकर है. यूक्रेन और यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने ट्रंप के डीजल सौदे की आलोचना की. उनका कहना है कि इससे रूस को युद्ध के लिए पैसे मिल सकते हैं लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इससे भारत को अपने रूसी तेल खरीदने का बचाव करने में आसानी हो सकती है. खासकर जब अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ऊर्जा की कीमतें बहुत बढ़ गई हैं.