जरा सोचिए, एक ऐसा बेशकीमती हीरा, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में है. चोर उसे चुराकर भाग जाते हैं, पुलिस उसकी तलाश में जुट जाती है, लेकिन उसका पता किसी हाईटेक जांच या जासूसी से नहीं, बल्कि एक भूखी नौकरानी के सेब काटने से चलता है. सुनने में किसी फिल्म की कहानी जैसा लगता है, लेकिन फ्रांस के मशहूर गुलाबी हीरे ‘ग्रैंड कॉन्डे’ की कहानी कुछ ऐसी ही है. करीब 100 साल पहले चोरी हुआ यह दुर्लभ हीरा अब एक बार फिर लोगों के सामने आने जा रहा है.
9 कैरेट का नाशपाती के आकार वाला यह गुलाबी हीरा अक्टूबर 1926 में फ्रांस के शांटिली महल (Chateau de Chantilly) से चोरी हुआ था. रात के अंधेरे में हुई इस चोरी ने अपने समय में खूब सुर्खियां बटोरी थीं. चोर हीरा लेकर तो भाग निकले, लेकिन उन्होंने इसे छिपाने के लिए जो तरीका अपनाया, वही आगे चलकर उनकी मुसीबत बन गया. अब यह हीरा फ्रांस के शांटिली महल में स्थित कॉन्डे म्यूजियम के एक्जीबिशन में रखा जाएगा. यह प्रदर्शनी 3 जनवरी तक चलेगी. करीब एक सदी बाद हीरे की वापसी ने उसकी चोरी और बरामदगी की पुरानी कहानी को फिर चर्चा में ला दिया है.
चोरों ने सेब के अंदर छिपाया था करोड़ों का हीरा
अक्टूबर 1926 की एक रात चोर शांटिली महल में घुसे और ‘ग्रैंड कॉन्डे’ को लेकर फरार हो गए. यह कोई साधारण पत्थर नहीं था. गुलाबी रंग, नौ कैरेट वजन और नाशपाती जैसी बनावट वाला यह हीरा फ्रांस के शाही खजाने से जुड़ा था. फ्रांसीसी क्रांति के दौर में भी ये हीरा बच गया था. चोरी के बाद चोरों ने हीरे को छिपाने के लिए एक अजीब तरीका चुना. उन्होंने सेब के अंदर खाली जगह बनाई और उसमें हीरा छिपा दिया. शायद उन्हें लगा होगा कि फल के अंदर छिपी इस कीमती चीज तक किसी की नजर नहीं पहुंचेगी. लेकिन कहानी में एक ऐसा मोड़ आया, जिसकी कल्पना शायद चोरों ने भी नहीं की होगी.
नौकरानी के सेब काटने से खुला राज
चोरी के कुछ हफ्तों बाद चोर जिस होटल में ठहरे हुए थे, वहां एक नौकरानी की नजर सेब पर पड़ी. भूख लगी तो उसने सेब खाने के लिए काटा. इसी दौरान सेब के भीतर छिपा हीरा सामने आ गया. जिस चीज को चोरों ने अपनी चालाकी से छिपाया था, उसका राज एक साधारण-सी घटना ने खोल दिया. हीरा बरामद हो गया और उसकी चोरी की कहानी अखबारों तक पहुंच गई. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक शांटिली महल के कॉन्डे म्यूजियम के निदेशक मैथ्यू डेल्डिक ने कहा कि सेब वाली कहानी भले ही सुनने में अविश्वसनीय लगे, लेकिन उस समय के अखबार इस खबर से छाए रहते थे. यानी यह कहानी महज कोई दिलचस्प किस्सा नहीं है.
अब फिर दुनिया के सामने क्यों आ रहा हीरा?
करीब 100 साल पहले चोरी हुआ ‘ग्रैंड कॉन्डे’ अब फिर से लोगों के सामने है. इसे कॉन्डे म्यूजियम में दिखाया जा रहा है, जहां दर्शक इस दुर्लभ रत्न को देख सकते हैं. लेकिन इस बार प्रदर्शनी सिर्फ हीरे की चमक तक सीमित नहीं है. म्यूजियम ने इसके इतिहास और चोरी से जुड़ी कुछ ऐसे पुराने डॉक्यूमेंट भी शामिल किए हैं, जो पहले सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए थे.
क्या हीरे को फिर खतरा है?
पिछले 12 महीनों में यूरोप के म्यूजियमों में चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं. इनमें पेरिस के लूव्र म्यूजियम में दिनदहाड़े गहनों की चोरी की घटना भी शामिल है. ऐसे माहौल में करीब एक सदी पहले चोरी हो चुके बेशकीमती हीरे को सार्वजनिक रूप से दिखाना सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करता है. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक म्यूजियम के निदेशक मैथ्यू डेल्डिक ने यह नहीं बताया कि हीरे का कितना बीमा कराया गया है. हालांकि, उन्होंने बताया कि हीरे की पहचान को लेकर विस्तार से वैज्ञानिक और एकेडमिक अध्ययन किए गए हैं.
गुलाबी हीरे इतने दुर्लभ क्यों होते हैं?
‘ग्रैंड कॉन्डे’ की कहानी जितनी दिलचस्प है, उसका गुलाबी रंग भी उसे खास बनाता है. प्राकृतिक रूप से मिलने वाले गुलाबी हीरे बेहद दुर्लभ होते हैं. इसी वजह से नीलामी में इनकी कीमत कई बार करोड़ों डॉलर तक पहुंच जाती है. नीलामी घर सोथबीज के मुताबिक, 2017 में एक गुलाबी हीरा नीलामी में 7.12 करोड़ डॉलर (6.64 अरब रुपये) में बिका था. यह गुलाबी हीरे के लिए अब तक मिली सबसे ऊंची नीलामी कीमत बताई गई है. हालांकि, ‘ग्रैंड कॉन्डे’ की मौजूदा कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है. इसलिए 2017 में बिके हीरे की कीमत के आधार पर इसकी कीमत तय नहीं की जा सकती. लेकिन अनुमानों के मुताबिक इसकी कीमत भी अरबों में होगी.
आखिर कहां से आया था ‘ग्रैंड कॉन्डे’?
इस हीरे की कहानी का एक हिस्सा आज भी रहस्य बना हुआ है. ये हीरा असल में कहां से आया इसका कोई भी साफ जवाब अब तक नहीं मिला है. शांटिली महल के मुताबिक, ‘ग्रैंड कॉन्डे’ का पहला दर्ज उल्लेख 1740 में मिलता है. उस समय लुई हेनरी डी बॉर्बन, प्रिंस ऑफ कॉन्डे की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति की लिस्ट तैयार की गई थी. इसी लिस्ट में हीरे का जिक्र किया गया था. इसके बाद यह फ्रांस के राजा लुई फिलिप प्रथम की पत्नी, रानी मैरी-अमेलिया ऑफ बॉर्बन-सिसिली के संग्रह का हिस्सा बना. आगे चलकर यह उनके बेटे प्रिंस हेनरी ऑफ ऑर्लियन्स, ड्यूक ऑफ ओमाल के पास पहुंचा. ड्यूक ऑफ ओमाल ने अपनी संपत्ति इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रांस को सौंप दी. आज शांटिली महल का मालिकाना हक इसी संस्थान के पास है.