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Banking Situation : विपक्ष ने भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर तंज कसा तो सरकार ने आंकड़ों से दिया जवाब. वित्त मंत्रालय ने कहा कि अब एक साल में सरकारी बैंकों को 2 लाख करोड़ का फायदा हुआ है. आज मोबाइल और ब्रांच के रूप में बैंकिंग सेवाएं देशभर में पहुंच चुकी हैं. इससे पहले विपक्ष ने कहा था कि सरकारी की नीतियों ने बैंकिंग सिस्टम को खराब कर दिया है.
सरकारी बैंकों का फंसा कर्ज 2 फीसदी से भी नीचे जा चुका है.
नई दिल्ली. देश के सरकारी बैंकों की हालत बीते कुछ साल में काफी मजबूत हुई है, जिसकी बानगी उनके मुनाफे में भी दिखती है. बावजूद इसके विपक्ष ने सरकारी बैंकों की हालत खराब होने का आरोप लगाया. इस पर वित्त मंत्रालय ने जवाब दिया कि बैंकिंग सुधार और नीतियों से बीते साल सभी सरकारी बैंकों को करीब 2 लाख करोड़ का मुनाफा हुआ है. मंत्रालय ने कहा कि बैंकों का फंसा कर्ज काफी हद तक मुक्त हो चुका है, जिससे उनका मुनाफा बढ़ रहा है.
वित्त मंत्रालय ने यह जवाब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के आरोपों पर दिया. मंत्रालय ने कहा कि सरकार के लगातार हस्तक्षेप और बैंकिंग सुधारों के चलते सरकारी बैंकों ने वित्तवर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वाधिक 1.98 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया. वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि इससे सरकारी बैंकों का कुल एनपीए घटकर कई दशकों के निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो अभी 1.93 फीसदी है.
बैंकों पर क्या आरोप लगे
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि सरकार ने बैंकिंग व्यवस्था को सूदखोरी से भी ज्यादा खराब बना दिया है. उन्होंने साल 2014 से बैंकिंग सुधारों को संभालने के तरीके को लेकर सरकार की आलोचना की थी. उन्होंने मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर जुर्माना, नोटबंदी, सेवा शुल्क, कर्ज माफी और कर्ज तक पहुंच और बैंक कर्मचारियों के साथ व्यवहार सहित कई मुद्दों पर सवाल उठाए थे. मिनिमम बैलेंस पर सरकार ने कहा कि अधिकांश सरकारी बैंकों ने अपने सामान्य बचत खातों में मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर लगने वाले शुल्क या तो पूरी तरह माफ कर दिए हैं या कम कर दिए हैं.
सरकार ने बांध रखे हैं वसूली एजेंट के हाथ
मंत्रालय ने बैंकों के वसूली एजेंट पर भी पूर्ण नियंत्रण की भी बात कही है. आरबीआई ने साफ कहा है कि एजेंट ग्राहकों को डरा-धमका या परेशान नहीं कर सकते. हर नागरिक तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सेवा केंद्र भी बनाए गए हैं. इससे देश के सभी गांव बैंकिंग केंद्रों से जुड़ गए हैं. नोटबंदी के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि यह एक आर्थिक निर्णय था, जिसे काले धन, जाली मुद्रा और अवैध सीमा पार वित्तपोषण पर अंकुश लगाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया था.
यूपीआई से पूरे देश को फायदा
मंत्रालय ने बताया कि अधिक लेनदेन औपचारिक वित्तीय व्यवस्था के दायरे में आए और यूपीआई जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों को अपनाने को भी बढ़ावा मिला. आर्थिक गतिविधियों को औपचारिक स्वरूप देने और डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार करने से नोटबंदी ने भारत की विशाल असंगठित अर्थव्यवस्था को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में मदद की और दीर्घकालिक पारदर्शिता को बढ़ावा दिया. बैंक के लॉकरों में रखी कीमती धातुओं, निवेश प्रमाणपत्रों और अन्य विरासत में मिली वस्तुओं के गायब होने के आरोप पर मंत्रालय ने कहा कि लॉकर में रखी वस्तुओं का खोना एक असाधारण घटना है. यदि बैंक की सेवा में कमी के कारण ऐसा होता है, तो बैंक ग्राहक को मुआवजा देने के लिए उत्तरदायी है.