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Varanasi Kolkata Expressway: भारतमाला परियोजना के तहत 672 किमी लंबा वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड सिक्सलेन एक्सप्रेसवे काशी के रिवासा से शुरू होकर बिहार और झारखंड होते हुए कोलकाता पहुंचेगा. इससे 13 घंटे का सफर घटकर महज 6 घंटे रह जाएगा. 3 परतों में ढल रही इस अत्याधुनिक सड़क पर हर 1 किमी पर कैमरे और 30 किमी पर ट्रॉमा सेंटर बनेंगे. यूपी, बिहार, झारखंड और बंगाल के बीच व्यापार, पर्यटन और माल ढुलाई को बड़ी गति मिलेगी.
वाराणसी के रिवासा से कोलकाता तक बनेगा 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (फोटो-AI)
Varanasi Kolkata Expressway: काशी से पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता तक का सफर अब रोमांच के साथ-साथ पूरी तरह बदलने वाला है. भारतमाला परियोजना के तहत बन रहे 672 किलोमीटर लंबे वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड सिक्सलेन एक्सप्रेसवे के धरातल पर उतरने के बाद यह सफर आधा हो जाएगा। वर्तमान में वाराणसी से कोलकाता पहुंचने में 12 से 13 घंटे का समय लगता है, जो इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद घटकर महज 5 से 6 घंटे रह जाएगा। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच निर्बाध सड़क संपर्क बेहतर होगा.
वाराणसी के रिवासा से कोलकाता तक ऐसा होगा रूट
यह छह लेन का ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में वाराणसी के रिवासा से शुरू होकर चंदौली होते हुए आगे बढ़ेगा. इसके बाद यह बिहार के चार जिलों कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया से गुजरेगा. बिहार से निकलकर यह रूट झारखंड के चतरा, हजारीबाग, रांची, बोकारो, धनबाद और रामगढ़ पहुंचेगा. हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक, यह एक्सप्रेसवे पश्चिम बंगाल के पुरुलिया और बांकुड़ा जिलों को जोड़ते हुए अंततः कोलकाता में समाप्त होगा. इस कॉरिडोर के माध्यम से उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल सीधे पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक और बंदरगाह नेटवर्क से जुड़ जाएगा.
निर्माण कार्य में आई तेजी, 3 परतों में ढलाई
एनएचएआई औरंगाबाद परियोजना के निदेशक देवेंद्र कुमार बंसल ने इमामगंज के बतेसा स्थित परियोजना कैंप में मीडिया टूर के दौरान बताया कि एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. गया जिले में 33.5 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण 1248.37 करोड़ रुपये की लागत से जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जिसका 35 फीसदी काम एक साल में पूरा हो चुका है. अधिकारियों ने चपड़ी गांव के पास निर्माण स्थल का मुआयना कराते हुए बताया कि सड़क की ढलाई तीन परतों में की जा रही है, ताकि यह भारी माल ढुलाई के बीच लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे.
चार राज्यों के बीच माल ढुलाई और रोजगार को गति
इस 672 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का लगभग 161 से 162 किलोमीटर हिस्सा बिहार से गुजरेगा. बिहार में इस हिस्से को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि गया खंड दिसंबर 2027 तक पूरा होने की संभावना है. एक्सप्रेसवे बनने से चारों राज्यों के बीच औद्योगिक माल ढुलाई की लागत और समय में भारी कमी आएगी. काशी के व्यापारियों और उद्यमियों के लिए पूर्वी भारत की मंडियों तक पहुंच सुगम होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर नए रोजगार सृजित होंगे.
हर 1 KM पर कैमरे और 30 KM पर ट्रॉमा सेंटर
यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस एक्सप्रेसवे पर अत्याधुनिक निगरानी प्रणाली लगाई जाएगी. मार्ग पर प्रत्येक 1 किलोमीटर पर उच्च गुणवत्ता वाले निगरानी कैमरे और किसी भी आपात स्थिति के लिए हर 30 किलोमीटर पर एक ट्रॉमा सेंटर स्थापित किया जाएगा. इससे दुर्घटनाओं की तत्काल मॉनिटरिंग और घायलों को तुरंत चिकित्सीय सहायता मिल सकेगी. इसके साथ ही, पर्यावरण संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के लिए अकेले गया क्षेत्र में सड़क किनारे 50 हजार पौधे लगाए जाएंगे, जिसके लिए एनएचएआई ने वन विभाग को लगभग 50 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं.