Atar Singh Bhadana Murder : भरतपुर में पूर्व विधायक की हत्या से पहले क्या पुलिस को थी भनक? कांस्टेबल पर कार्रवाई के बाद उठ रहे सवाल

Atar Singh Bhadana Murder : भरतपुर में पूर्व विधायक की हत्या से पहले क्या पुलिस को थी भनक? कांस्टेबल पर कार्रवाई के बाद उठ रहे सवाल


भरतपुर. पूर्व विधायक अतर सिंह भड़ाना हत्याकांड में पुलिस विभाग ने एक और कार्रवाई की है. वैर थाने में तैनात कांस्टेबल पवन कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है. आरोप है कि ड्यूटी के दौरान समय पर सूचना नहीं देने के कारण यह कदम उठाया गया. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कांस्टेबल की जिम्मेदारी आसूचना जुटाने की थी, लेकिन घटना से पहले गांव में लोगों के जुटने, हथियार इकट्ठा करने और भड़ाना की खदान तक पहुंचने की गतिविधियों की सूचना समय पर नहीं दी गई.

इस मामले में इससे पहले वैर थाने के थानाधिकारी को भी सस्पेंड किया जा चुका है. वहीं, दो RPS अधिकारियों को लाइन हाजिर किया गया था. अब कांस्टेबल पर हुई कार्रवाई के बाद साफ है कि विभाग हत्याकांड से पहले की सूचना व्यवस्था और पुलिस की भूमिका की भी जांच कर रहा है.

गांव में जुटे लोग, हथियार आए, फिर खदान तक पहुंचे हमलावर
पुलिस के मुताबिक, वैर थाने के नजदीक ही भौंडा गांव है. आरोप है कि हत्याकांड से पहले मुकेश फौजी ने ग्रामीणों को इकट्ठा किया और हथियार जुटाए. इसके बाद हमलावर करीब दो किलोमीटर दूर स्थित अतर सिंह भड़ाना की खदान तक पहुंचे, जहां 11 अक्टूबर को भड़ाना की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. इस पूरे घटनाक्रम में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब गांव में लोगों को इकट्ठा करने और हथियार जुटाने जैसी गतिविधियां हो रही थीं, तब पुलिस तक समय पर सूचना क्यों नहीं पहुंची.

अधिकारियों को समय रहते नहीं दी सूचना
कांस्टेबल पवन कुमार पर कार्रवाई की वजह भी यही बताई गई है कि आसूचना संकलन की जिम्मेदारी होने के बावजूद समय रहते अधिकारियों को जानकारी नहीं दी गई. हालांकि, यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना से पहले पुलिस को किस स्तर पर क्या जानकारी मिली थी और सूचना मिलने के बाद क्या कदम उठाए गए. विभागीय जांच में इन पहलुओं की अहम भूमिका रहेगी.

दो साल से चल रहा था खदान और रास्ते का विवाद
इस हत्याकांड के पीछे खदान और रास्ते का विवाद भी अहम बताया जा रहा है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुकेश फौजी सेना में सूबेदार के पद से रिटायर हुआ था. आरोप है कि वह करीब दो साल से अतर सिंह भड़ाना के खिलाफ ग्रामीणों को लामबंद कर रहा था. इस दौरान खदान तक जाने वाले रास्ते को लेकर विरोध और आंदोलन भी किए गए. बताया जा रहा है कि खदान के रास्ते में खाइयां खोदकर आवाजाही रोकने की कोशिश भी हुई थी.

ग्रामीणों को भड़काए जाने का आरोप
रास्ते से जुड़े विवाद में मुकेश फौजी अदालत में हार चुका था. इसके बावजूद खदान दोबारा शुरू होने की आशंका को लेकर तनाव बना हुआ था. इसी बीच अतर सिंह भड़ाना खदान फिर से शुरू करवाने के लिए भौंडा गांव पहुंचे थे. आरोप है कि इसके बाद ग्रामीणों को भड़काया गया और 11 अक्टूबर को उन पर हमला हुआ. इस हमले में भड़ाना की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है.

जिला परिषद चुनाव लड़ने की तैयारी में था मुकेश फौजी
इस मामले में मुकेश फौजी की राजनीतिक तैयारी का पहलू भी चर्चा में है. जानकारी के मुताबिक, वह जिला परिषद सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था. इसके लिए पोस्टर भी छपवा लिए गए थे. बताया जा रहा है कि वह कांग्रेस से टिकट लेने की कोशिश में था. हालांकि, चुनाव लड़ने की तैयारी और हत्याकांड के बीच संबंध को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के तथ्यों को देखना जरूरी होगा. फिलहाल सामने आए इनपुट के अनुसार, खदान के रास्ते का पुराना विवाद और खदान दोबारा शुरू होने की आशंका इस मामले के अहम पहलू हैं.

पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
अतर सिंह भड़ाना की हत्या के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं. वैर थाने के थानाधिकारी को पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है. दो RPS अधिकारियों को लाइन हाजिर करने के बाद अब कांस्टेबल पवन कुमार पर कार्रवाई हुई है. कांस्टेबल की जिम्मेदारी आसूचना जुटाने की थी. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, समय पर सूचना नहीं देने को ड्यूटी में लापरवाही माना गया है.

यह भी है जांच का अहम हिस्ता
अब जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि हमले से पहले की गतिविधियों की जानकारी किसे थी, सूचना क्यों नहीं पहुंची और समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी. हत्याकांड में आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ पुलिस की सूचना व्यवस्था की जांच भी महत्वपूर्ण हो गई है. आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना से पहले क्या-क्या हुआ था और किन स्तरों पर लापरवाही रही.



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