फ्रांस में फिर क्रांति की आहट? जल उठा मैक्रों का देश, छात्रों के बाद आम जनता ने किया विद्रोह

फ्रांस में फिर क्रांति की आहट? जल उठा मैक्रों का देश, छात्रों के बाद आम जनता ने किया विद्रोह


France Latest News Hindi: फ्रांस में पहले स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की कमी के खिलाफ शुरू हुआ विरोध अब महंगाई, सरकारी खर्च और आम लोगों के गिरते जीवन स्तर को लेकर बड़े आंदोलन में बदल गया है. शनिवार को देश के कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. हालात ऐसे बिगड़े कि पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और प्रदर्शनकारियों के साथ झड़पें हुईं. कई जगह तोड़फोड़ और पुलिस, मीडिया तथा सरकारी इमारतों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं भी सामने आईं.

फ्रांसीसी अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार दोपहर तक पेरिस के बाहर 140 विरोध प्रदर्शनों में करीब 32,800 लोगों के शामिल होने की जानकारी दर्ज की गई थी. अधिकारियों ने इस हिंसा के लिए उस समूह को जिम्मेदार ठहराया, जिसे ‘अल्ट्रा-लेफ्ट’ कहा जाता है. हालांकि, प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों की राजनीतिक सोच एक जैसी होने की बात रिपोर्ट में नहीं कही गई है.

स्कूलों से शुरू हुआ था आंदोलन

इस आंदोलन की शुरुआत पिछले महीने पेरिस के गरीब उत्तरी इलाकों के हाई स्कूलों से हुई थी. वहां छात्र शिक्षकों की कमी और स्कूलों में खराब सुविधाओं को लेकर नाराज थे. धीरे-धीरे यह विरोध बड़े मुद्दों से जुड़ता चला गया. अब प्रदर्शनकारी आर्थिक असमानता, सरकारी खर्च और आम लोगों के जीवन स्तर को लेकर भी आवाज उठा रहे हैं.

शनिवार को कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान हिंसक घटनाएं हुईं. फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, मार्सेई में तोड़फोड़ की गई और कुछ जगह पुलिस, मीडिया तथा सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया गया. पेरिस के मध्य हिस्से में पुलिस की भारी तैनाती देखी गई. खास तौर पर शांज-एलीजे और आर्क डी ट्रायम्फ जैसे प्रमुख स्थलों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई. इन जगहों को दो अधिकृत प्रदर्शनों के तय रास्तों से बाहर रखा गया था.

पीली जैकेट वाले आंदोलन की यादें ताजा

प्रदर्शन के दौरान चमकीली पीली जैकेट पहने लोगों ने सड़कों को भी रोका. इस नजारे ने फ्रांस में 2018 में शुरू हुए ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन की याद दिला दी थी. उस समय डीजल पर टैक्स बढ़ाने के विरोध से शुरू हुआ आंदोलन बाद में महंगाई और आर्थिक असमानता के खिलाफ बड़े प्रदर्शन में बदल गया था. मार्सेई के मेयर ने बताया कि शहर के टाउन हॉल में तोड़फोड़ हुई है. प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से बातचीत के बाद शहर में अतिरिक्त पुलिस भेजी जा रही है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 100 लोग प्रदर्शन शुरू होने वाली जगह की ओर बढ़ते हुए पुलिस के खिलाफ नारे लगा रहे थे.

मैक्रों के सामने बढ़ती चुनौती

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यकाल के आखिरी दौर में यह आंदोलन उनके लिए नई चुनौती बनकर सामने आया है. देश में राजनीतिक बंटवारा बढ़ा है और अर्थव्यवस्था को लेकर दबाव भी गहराया है. सरकारी कर्ज कम करने की फ्रांस की कोशिशों से निवेशकों की चिंता दूर नहीं हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के लिए कर्ज लेने की लागत दो दशक से ज्यादा समय के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. ऐसे में महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं और जीवन स्तर को लेकर उठ रहा गुस्सा सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है.

पुलिस की कार्रवाई पर भी उठे सवाल

प्रदर्शन के बीच पुलिस की कार्रवाई भी जांच के दायरे में है. इससे पहले हुए प्रदर्शनों में कई लोग घायल हुए थे. इनमें एक किशोर भी शामिल था, जिसका स्टन ग्रेनेड उठाने के बाद हाथ चला गया था. प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकॉर्नू ने कहा कि 900 से ज्यादा पुलिस अधिकारी भी घायल हुए हैं. वहीं, पुलिस की निगरानी करने वाली संस्था पुलिसकर्मियों की हिंसा से जुड़े कम से कम दो दर्जन आरोपों की जांच कर रही है. छात्रों के प्रदर्शनों के दौरान फ्रांस ने स्टन ग्रेनेड के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. लेकिन गृह मंत्री लॉरां नुनेज ने कहा कि शनिवार के प्रदर्शनों में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है.



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