दिल्लीवालों की शाम होगी शानदार, फ्लाईओवर के नीचे बनेंगे कैफे और गार्डन
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दिल्लीवालों के लिए फ्लाईओवर के नीचे की खाली जगहों का इस्तेमाल जल्द बदल सकता है. दिल्ली सरकार का लोक निर्माण विभाग यानी PWD आईटीओ फ्लाईओवर के नीचे कैफे, पार्किंग और कॉन्फ्रेंस रूम जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना बना रहा है. डिजाइन में 40 से 50 लोगों के बैठने वाला कंट्रोल रूम, अलग केबिन, हरियाली और आने-जाने के रास्ते भी शामिल हैं. कंसल्टेंट ने डिजाइन सौंप दिया है और अब परियोजना टेंडर की ओर बढ़ सकती है. विभाग ने करीब 50 फ्लाईओवर को अपग्रेड करने के लिए चिन्हित किया है. लाजपत नगर और मोती नगर जैसे कुछ फ्लाईओवर के नीचे पहले से पार्क विकसित हैं.
दिल्ली PWD आईटीओ फ्लाईओवर के नीचे कैफेटेरिया, पार्किंग, कॉन्फ्रेंस रूम और हरियाली विकसित करने की योजना बना रहा है. (फाइल फोटो)
दिल्ली में फ्लाईओवर के नीचे से गुजरते समय आपने भी कई बार खाली जगहों पर नजर डाली होगी. कहीं गाड़ियों की पार्किंग दिखती है तो कहीं कूड़े का ढेर और सुनसान कोने. लेकिन अब इन जगहों की तस्वीर बदलने की तैयारी है. दिल्लीवालों को जल्द ही फ्लाईओवर के नीचे कैफे में कॉफी पीने से लेकर बैठकर मीटिंग करने तक की सुविधा मिल सकती है. दिल्ली सरकार का लोक निर्माण विभाग यानी PWD इन खाली जगहों का बेहतर इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है. इसकी शुरुआत आईटीओ फ्लाईओवर के नीचे की जगह से करने की तैयारी है. यहां कैफेटेरिया के साथ पार्किंग और कॉन्फ्रेंस रूम जैसी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है. यानी शहर की बेकार पड़ी जगहों को रोजमर्रा के काम आने वाली सुविधाओं में बदलने की कोशिश होगी.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इस योजना का मकसद केवल खाली जगह को सजाना नहीं है. इसके जरिए सार्वजनिक जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने और आसपास के इलाके को ज्यादा व्यवस्थित बनाने पर जोर है. अधिकारियों के मुताबिक आईटीओ फ्लाईओवर के नीचे की जगह के लिए एक कंसल्टेंट ने डिजाइन तैयार कर विभाग को सौंप दिया है. अब परियोजना को टेंडर की प्रक्रिया की ओर ले जाने की तैयारी है. प्रस्ताव में बैठने की जगहों के साथ हरियाली और आने-जाने के लिए अलग रास्ते भी शामिल हैं. यदि योजना आगे बढ़ती है तो लोगों को शहर के बीचोंबीच नई सुविधाएं मिल सकती हैं. हालांकि अभी इसे प्रस्तावित परियोजना के तौर पर ही देखना चाहिए. काम कब शुरू होगा और सुविधाएं कब तैयार होंगी इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
आईटीओ फ्लाईओवर के नीचे क्या-क्या बनेगा?
आईटीओ फ्लाईओवर के नीचे तैयार किए गए डिजाइन में कैफेटेरिया और पार्किंग की व्यवस्था का प्रस्ताव है. यहां PWD का कंट्रोल रूम बनाने की भी योजना है. इसमें करीब 40 से 50 लोगों के बैठने की जगह होगी. इसके अलावा कॉन्फ्रेंस रूम और अलग-अलग केबिन भी बनाए जा सकते हैं. डिजाइन में हरियाली वाले हिस्से और व्यवस्थित प्रवेश तथा निकास मार्ग शामिल हैं. रैंप बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है ताकि जगह का इस्तेमाल सुविधाजनक तरीके से किया जा सके.
50 फ्लाईओवर के नीचे जगह इस्तेमाल करने की तैयारी
आईटीओ की परियोजना दिल्ली में फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़ी जमीनों को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने की बड़ी योजना का हिस्सा है. अधिकारियों के मुताबिक करीब 50 फ्लाईओवर को अपग्रेड करने के लिए पहचाना गया है. विभाग का मानना है कि कई जगहों पर गंदगी और अव्यवस्थित पार्किंग की जगह उपयोगी सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं. इससे जमीन का बेहतर प्रबंधन होगा और कुछ जगहों से सरकार को राजस्व भी मिल सकेगा.
कुछ फ्लाईओवर के नीचे पहले से हैं सुविधाएं
दिल्ली में कुछ फ्लाईओवर के नीचे पहले ही अलग तरह की सुविधाएं विकसित की जा चुकी हैं. लाजपत नगर और मोती नगर फ्लाईओवर के नीचे घेराबंदी वाले पार्क बनाए गए हैं. वहीं सुखदेव विहार और इंद्रप्रस्थ फ्लाईओवर के नीचे सरकारी विभागों के कार्यालय चलते हैं. इन्हीं उदाहरणों के आधार पर दूसरी जगहों के विकास की संभावनाएं भी देखी जा रही हैं.
कई बड़े फ्लाईओवर भी योजना में शामिल
विभाग की विस्तृत सूची में रिंग रोड और आउटर रिंग रोड के हिस्सों के साथ वजीराबाद, आश्रम, गीता कॉलोनी, मुकुंदपुर और रानी झांसी फ्लाईओवर जैसे नाम शामिल हैं. लंबाई के लिहाज से न्यू RTR फ्लाईओवर करीब 2,650 मीटर का है. रानी झांसी फ्लाईओवर की लंबाई करीब 2,000 मीटर और जखीरा फ्लाईओवर की लंबाई करीब 1,600 मीटर बताई गई है. आजादपुर, आनंद विहार, मुनिरका, नारायणा और AIIMS फ्लाईओवर के नीचे की जगहों पर भी इसी तरह विकास की संभावनाएं हैं. फिलहाल आईटीओ परियोजना का अगला अहम पड़ाव टेंडर प्रक्रिया है. इसके बाद ही काम की समयसीमा और सुविधाओं की अंतिम तस्वीर साफ होगी.