ग्राउंड रिपोर्ट: राघोपुर नाव हादसे से भी नहीं जागा भागलपुर प्रशासन, यहां भी ड़ेंगी के सहारे आवागमन

ग्राउंड रिपोर्ट: राघोपुर नाव हादसे से भी नहीं जागा भागलपुर प्रशासन, यहां भी ड़ेंगी के सहारे आवागमन


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वैशाली के राघोपुर में नाव हादसे में 13 बच्चों की मौत के बाद भी भागलपुर के दियारा क्षेत्र में लोग जान जोखिम में डालकर छोटी नाव से यात्रा करने को मजबूर हैं. यहाँ पुल नहीं होने से नाव ही एकमात्र सहारा है

भागलपुर: वैशाली के राघोपुर में नाव फटने की एक दुर्घटना में 13 बच्चों की जान चली गई. इस नाव में 20 से अधिक बच्चे सवार थे और सभी नाव में सवार होकर दूसरे गांव भोज खाने जा रहे थे. आवागमन के लिए पुल नहीं होने से नाव ही एक मात्र सहारा बचता है. गांव के लोग शासन-प्रशासन से नाव बदलने के लिए लगातार कह रहे थे लेकिन, उनकी बातों को अनसुना किया गया. इसका नतीजा एक भीषड़ हादसा जिसमें कई बच्चों की जान चली गई. राघोपुर के इस हादसे के बाद भी शासन-प्रशासन अभी भी सबक लेने को तैयार नहीं है. गंगा किनारे बसे भागलपुर में शहरी क्षेत्र के ठीक दूसरी तरफ गंगा के किनारे दियारा इलाका बसा है. यहां भी आने-जाने का साधन सिर्फ छोटी नाव है. इसके सहारे ही लोग आवागमन करते हैं. नाव के सहारे लोग अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा करते हैं. ऐसे में जरूरी है कि शासन-प्रशासन समय रहते लोगों की उन जरूरी सुविधाओं पर ध्यान दे जो बच्चों से लेकर बड़े और बुजुर्ग सभी की जान के लिए भी खतरा है.

नाव से होता है आवागमन
इसे लेकर लोकल 18 की टीम जब यूनिवर्सिटी के ठीक पीछे पहुंची तो वहां पर गंगा के दूसरे छोर पर शंकरपुर, बिंद टोली और रतीपुर समेत कई इलाके बसे हुए हैं. लगभग 40 हजार की आबादी गंगा के दूसरे छोर पर बसी हुई है. इन सभी के आवागमन का साधन छोटी-छोटी नाव हैं. गंगा के तट पर करीब 20 से 25 नाव लगी हुई रहती हैं. इन्हीं नाव के जरिए पुरुष, महिलाए, बच्चे और बुजुर्ग सब यात्रा करते हैं.

इस बारे में वहां के ग्रामीणों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि खतरा तो उन्हें भी महसूस होता है लेकिन, उनके पास आने-जाने का कोई दूसरा उपाय नहीं है. सिर्फ नाव ही सहारा है. यहां पर पुल नहीं है. उन्होंने बताया कि पुल को लेकर कई बार लोगों ने आंदोलन भी किया तब जाकर पुल दिया गया है. उसका निर्माण कार्य अभी तक नहीं हो पाया है जिस कारण नाव ही एक सहारा है. पुल के निर्माण के बाद कुछ सहारा जरूर मिलेगा.



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