गन्‍ने से बना एथेनॉल नहीं खरीदेगी सरकारी तेल कंपनियां, चीनी पर क्‍या होगा असर?

गन्‍ने से बना एथेनॉल नहीं खरीदेगी सरकारी तेल कंपनियां, चीनी पर क्‍या होगा असर?


Last Updated:

Ethanol : भारत में चीनी से एथेनॉल बनाया जाता है. लेकिन, कम बारिश के कारण गन्‍ना उत्‍पादन में कमी आने की आशंकाओं के बीच एक महत्‍वपूर्ण फैसला लिया गया है. सरकारी तेल कंपनियां एक नवंबर से चीनी से बने एथेनॉल की खरीद नहीं करेगी.

Zoom

भारत पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाता है.

नई दिल्‍ली. सरकारी तेल विपणन कंपनियां 1, नवंबर से गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे से तैयार एथेनॉल नहीं खरीदेगी. इस कदम से बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. यह आदेश भारत में 1 नवंबर से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष से लागू होगा। इस साल बारिश कम होने के कारण गन्ने के उत्पादन पर असर पड़ा है. इससे चीनी का रेट काफी बढ़ गया है.

ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 11 अरब लीटर एथेनॉल की खरीद हेतु संयुक्त टेंडर जारी किया है. नए टेंडर दस्तावेजों में सरकार के ताजा दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि इस बार गन्ने के सीधे रस, शुगर सिरप या बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए कोई बोली स्वीकार नहीं की जाएगी. इसका सीधा मतलब यह है कि मिलों के पास मौजूद गन्ने का अधिकतम इस्तेमाल अब केवल और केवल चीनी उत्पादन के लिए किया जाएगा.

अल नीनो की मार से उत्‍पादन कम होने की आशंका

ब्राजील के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक देश भारत में इस बार मानसूनी बारिश का मिजाज काफी असंतुलित रहा. शक्तिशाली अल नीनो के असर के चलते प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में सूखे जैसे हालात बने, जिससे गन्ने की पैदावार और रिकवरी दर पर गहरा असर पड़ा. उत्पादन में गिरावट की आशंका के बीच सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

20% एथेनॉल ब्लेंडिंग पर नहीं आएगी आंच

गन्ने से एथेनॉल बनाने पर लगी इस पाबंदी का असर भारत के पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की योजना पर नहीं पड़ेगा. एथेनॉल की आपूर्ति के लिए तेल कंपनियों ने वैकल्पिक रास्तों को खुला रखा है. नए टेंडर के तहत आपूर्तिकर्ता अब सी-हैवी शीरा, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास मौजूद अतिरिक्त चावल, खराब खाद्यान्न, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत स्वीकृत अन्य वैकल्पिक कृषि अवशेषों से एथेनॉल बनाकर सप्लाई कर सकेंगे.



Source link