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India-US Working On Reflecting Sun: आपने कभी सोचा है कि धरती पर जिन इलाकों में अंधेरा हो, वहां रात में भी रोशनी कैसे पहुंचाई जा सकती है? हम जो सोच भी नहीं पाए, अमेरिका और भारत की कंपनी मिलकर उसका रोडमैप तैयार कर लिया है. अब अंतरिक्ष से सीधी धूप की रोशनी उन इलाकों में पहुंचेगी, जहां वो दिखता तक नहीं.
सूरज को रात में भी धरती पर उतारने का प्रोजेक्ट.
कल्पना कीजिए कि रात के अंधेरे में भी किसी शहर या इलाके को सूरज की रोशनी से रोशन किया जा सके. अमेरिका की एक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी इसी कल्पना को हकीकत में बदलने की तैयारी कर रही है. इस मिशन में भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनी ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ उसकी मदद करेगी. कैलिफोर्निया स्थित स्टार्टअप ‘रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल’ अंतरिक्ष में बड़े आईने वाले उपग्रह भेजकर धरती के चुनिंदा हिस्सों तक सूरज की रोशनी पहुंचाना चाहता है.
दोनों कंपनियों के बीच उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजने के लिए समझौता हुआ है. इसके तहत दो उपग्रह स्काईरूट के विक्रम रॉकेटों की मदद से लॉन्च किए जाएंगे. रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल ऐसे उपग्रहों का समूह तैयार कर रहा है, जिन पर विशेष दर्पण लगाए जाएंगे. ये आईने सूरज की रोशनी को रेफ्लेक्ट करके धरती के खास इलाकों तक पहुंचाएंगे. कंपनी का लक्ष्य एक समय में करीब पांच किलोमीटर के क्षेत्र को रोशन करना है. इस तकनीक के जरिए रोशनी की तीव्रता जरूरत के मुताबिक घटाई या बढ़ाई जा सकेगी. जरूरत खत्म होने पर इसे बंद भी किया जा सकेगा.
क्या है रात में सूरज उतारने की तकनीक?
समझौते के मुताबिक पहला उपग्रह स्काईरूट के विक्रम-1 रॉकेट से भेजा जाएगा, जबकि दूसरे उपग्रह के लिए कंपनी के निर्माणाधीन विक्रम-1U रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा. विक्रम-1U में अतिरिक्त बूस्टर लगाए जाने की योजना है, जिससे इसकी क्षमता बढ़ेगी. स्काईरूट के सीईओ पवन चंदना ने इस साझेदारी को अंतरिक्ष तकनीक के नए इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. वहीं रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल के प्रमुख बेन नोवाक ने कहा कि कंपनी अपनी सेवा को आगे बढ़ाने के लिए नियामक संस्थाओं, खगोलविदों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर काम करेगी. कंपनी को अपने शुरुआती उपग्रह के निर्माण, प्रक्षेपण और संचालन के लिए अमेरिकी संघीय संचार आयोग से अनुमति भी मिल चुकी है.
क्यों योजना पर उठने लगे हैं सवाल?
- अंतरिक्ष से धरती पर रोशनी पहुंचाने का विचार नया नहीं है. वर्ष 1993 में रूसी वैज्ञानिकों ने जनामया प्रयोग के तहत अंतरिक्ष में एक बड़ा दर्पण स्थापित कर पृथ्वी पर सूर्य की रोशनी पहुंचाने का प्रयास किया था. हालांकि आर्थिक कारणों से इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका.
- अब रिफ्लेक्ट ऑर्बिटल की योजना को लेकर पर्यावरण संगठनों ने चिंता जताई है. उनका कहना है कि रात में कृत्रिम रोशनी बढ़ने से वन्यजीवों के व्यवहार, इंसानों की प्राकृतिक जैविक घड़ी और खगोलीय अनुसंधान पर बुरा असर पड़ सकता है.
- कुछ संगठनों ने FCC से परियोजना की मंजूरी वापस लेने की मांग भी की है. ऐसे में यह तकनीक भविष्य में रात के समय रोशनी की जरूरत पूरी करने का नया विकल्प बन सकती है, लेकिन इसके व्यावहारिक फायदे और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करना अभी जरूरी होगा.