नई दिल्ली. फिल्म ‘नई नवेली’ की सबसे बड़ी ताकत इसका इंडियन फील और ट्रेडिशनल इंडियन कहानियों से कनेक्शन है, जो इसे एक सिंपल हॉरर-कॉमेडी से एक कम्प्लीट फैमिली एंटरटेनर में बदल देता है. यह देखना मजेदार है कि कैसे एक नई बहू के आने से पूरा परिवार मिस्ट्री और हंसी से भर जाता है. तो आइए, इस फिल्म के सभी एस्पेक्ट्स को डिटेल में एनालाइज करते हैं ताकि यह पता चल सके कि क्या यह सच में आपके पैसे और समय के लायक है.
कहानी
फिल्म मोहिनी (यामी गौतम) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शादी करके एक नए और खुशहाल परिवार में नई बहू बनकर आती है. शुरुआती दिनों में सब कुछ नॉर्मल और खुशी से भरा लगता है. मोहिनी अपने प्यारे व्यवहार और काम से जल्द ही अपने ससुराल वालों और बाकी परिवार का दिल जीत लेती है, लेकिन कहानी का असली रोमांच तब शुरू होता है जब घर में कुछ अजीब और अनसुलझी घटनाएं सामने आने लगती हैं. परिवार के एक सदस्य को मोहिनी की असली पहचान पर शक होने लगता है और उसे शक होता है कि उसके सीधे-सादे चेहरे के पीछे सदियों पुराना कोई राज छिपा है. जैसे-जैसे मोहिनी की सच्चाई की परतें खुलती हैं, कहानी पौराणिक कथाओं, भारतीय परंपराओं और सुपरनैचुरल शक्तियों का मिश्रण लेती है, जो आम घरेलू झगड़ों में एक जादुई मोड़ लाती है.
एक्टिंग
यामी गौतम (मोहिनी के रूप में): यामी गौतम ने एक बार फिर अपनी वर्सेटिलिटी और किसी भी रोल में ढलने की क्षमता साबित की है. जहां वह एक डरपोक और संस्कारी नई बहू के रूप में इमोशनल और नेचुरल लगती हैं, वहीं रहस्यमयी सीन में उनकी आंखें और बॉडी लैंग्वेज दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देती हैं.
आदिनाथ एम कोठारे (पति के रोल में): मोहिनी के पति के रोल में आदिनाथ कोठारे ने बहुत बैलेंस्ड और ईमानदार परफॉर्मेंस दी है. उन्होंने एक तरफ अपनी पत्नी के प्यार और दूसरी तरफ अपने परिवार के शक के बीच झूलते हुए किरदार को बहुत आसानी से निभाया है.
सपोर्टिंग कास्ट: सुनीता राजवार, मीता वशिष्ठ, सुष्मिता मुखर्जी, अनुराग ठाकुर, प्रतीक पचौरी और सोनल झा जैसी शानदार कास्ट ने फिल्म की कॉमेडी और फैमिली एलिमेंट्स को और मजबूत किया है. सुनीता राजवार और मीता वशिष्ठ की कॉमिक टाइमिंग खासकर बहुत बढ़िया है.
डायरेक्शन
डायरेक्टर बालाजी मोहन (जिन्होंने दिव्या निधि शर्मा और हिमांशु शर्मा के साथ मिलकर स्क्रीनप्ले लिखा है) ने एक अनोखा और रिस्की सब्जेक्ट चुना है. एक फैमिली ड्रामा में सुपरनैचुरल एलिमेंट्स और कॉमेडी को मिलाना आसान नहीं है, लेकिन बालाजी मोहन ने ज्यादातर हिस्सों में एक खूबसूरत बैलेंस बनाए रखा है. फिल्म का पहला हाफ हल्का-फुल्का और मजेदार है, जबकि दूसरे हाफ में जब पुरानी कहानियों का रहस्य और फैंटेसी सामने आती है, तो कहानी काफी तेज हो जाती है. हालांकि स्क्रिप्ट की रफ्तार कभी-कभी धीमी हो जाती है, लेकिन डायरेक्टर की देसी कहानी कहने का तरीका दर्शकों का मनोरंजन करने में कामयाब रहता है.
म्यूजिक
फिल्म का म्यूजिक इसके मूड और थीम से पूरी तरह मेल खाता है. गाने भारतीय लोक संगीत और मॉडर्न साउंड्स का खूबसूरती से मेल खाते हैं. फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर सस्पेंस और सुपरनैचुरल सीन को अच्छे से पूरा करता है. हंसी के पलों में हल्का-फुल्का म्यूजिक माहौल को रिफ्रेश करता है और जब रहस्य गहराता है तो म्यूजिक सीन के असर को बढ़ाता है.
कमियां
स्लो स्क्रीनप्ले (पेसिंग की दिक्कत): फिल्म के बीच के आधे हिस्से में, कहानी कुछ मिनटों के लिए रुकी हुई लगती है और ड्रामा खिंचता है.
अंदाजा लगाने लायक पल: अगर आप हॉरर या कॉम्प्लेक्स सस्पेंस फिल्मों के फैन हैं, तो आप शायद कुछ सुपरनैचुरल ट्विस्ट का अंदाजा लगा लेंगे.
जॉनर मिक्स: कभी-कभी कॉमेडी से सुपरनैचुरल सीन में अचानक बदलाव कुछ दर्शकों को थोड़ा अजीब लग सकता है.
अंतिम फैसला
‘नई नवेली’ सिर्फ एक हॉरर या फैंटेसी फिल्म नहीं है, बल्कि एक बहुत ही साफ-सुथरी, एंटरटेनिंग और कल्चरल रूप से जुड़ी फैमिली फिल्म है. यामी गौतम की दमदार और कई तरह की परफॉर्मेंस, बालाजी मोहन का यूनिक डायरेक्शन और को-स्टार्स की शानदार कॉमेडी इसे इस हफ्ते थिएटर में देखने के लिए एक बढ़िया च्वाइस बनाती है. अगर आप इस वीकेंड अपने पूरे परिवार के साथ ऐसी फिल्म ढूंढ रहे हैं जिसमें हंसी, थोड़ा मिस्ट्री और इंडियन माइथोलॉजी का एक यूनिक टच हो, तो ‘नई नवेली’ आपके पैसे और समय के लायक होगी. मेरी ओर से इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार.