EU sanctions Indian shipping company। World News। रूस से तेल का खेल और फंस गई भारत की कंपनी, EU ने लगाया बैन, समझें शैडो फ्लीट कनेक्शन

EU sanctions Indian shipping company। World News। रूस से तेल का खेल और फंस गई भारत की कंपनी, EU ने लगाया बैन, समझें शैडो फ्लीट कनेक्शन


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रूस से तेल के खेल में फंसी भारतीय कंपनी, शैडो फ्लीट के शक में EU ने लगाया बैन

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Why EU Ban Indian Company: यूरोपीय यूनियन ने रूस से जुड़े तेल कारोबार और प्रतिबंधों से बचने में कथित मदद के आरोप में 12 व्यक्तियों और संस्थाओं पर कार्रवाई की है. सूची में मुंबई स्थित Vigor Marine Services LLP भी शामिल है. EU का आरोप है कि कंपनी रूस के तेल से जुड़े शैडो फ्लीट के दो जहाजों का प्रबंधन करती है. आरोपों में बीमा की कमी, समुद्र में तेल ट्रांसफर और AIS डेटा में हेरफेर शामिल हैं.

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भारतीय कंपनी पर ईयू ने बैन लगा दिया है. (Reuters )

रूस पर यूरोप का शिकंजा कसता जा रहा है और अब इसकी आंच भारत तक पहुंच गई है. यूरोपीय यूनियन यानी EU ने ऐसा एक्शन लिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय तेल कारोबार में हलचल मचा दी है. रूस से तेल की सप्लाई, समुद्र में जहाजों की आवाजाही और प्रतिबंधों को चकमा देने के आरोपों के बीच मुंबई की एक भारतीय कंपनी भी निशाने पर आ गई है. नाम है Vigor Marine Services LLP. EU का दावा है कि यह कंपनी रूस के कथित ‘शैडो फ्लीट’ नेटवर्क से जुड़े दो जहाजों का प्रबंधन करती है. आरोपों की लिस्ट भी कम चौंकाने वाली नहीं है. कहीं जहाजों के बीमा पर सवाल हैं, तो कहीं समुद्र में तेल ट्रांसफर और ट्रैकिंग डेटा से छेड़छाड़ के आरोप. आखिर इस भारतीय कंपनी पर यूरोप इतना सख्त क्यों हुआ? रूस के तेल कारोबार से इसका कनेक्शन क्या है? और इन प्रतिबंधों का असर कितना बड़ा हो सकता है?

भारत की Vigor Marine Services LLP पर क्यों हुई कार्रवाई?
EU के मुताबिक, मुंबई की कंपनी दो ऐसे जहाजों का प्रबंधन करती है, जिनका इस्तेमाल रूस से जुड़े कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई में होता है. यूरोपीय अधिकारियों का आरोप है कि इन जहाजों पर समुद्री सुरक्षा और शिपिंग नियमों से जुड़ी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं किया गया. आरोपों में पर्याप्त बीमा नहीं होना, समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करना और जहाजों के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी AIS डेटा में हेरफेर शामिल हैं. AIS जहाजों की पहचान और उनकी आवाजाही की निगरानी करने में मदद करता है. ऐसे डेटा में छेड़छाड़ से जहाज की वास्तविक गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो सकता है.

रूस के शैडो फ्लीट पर EU की नजर
शैडो फ्लीट उन जहाजों के नेटवर्क के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द है, जिन पर प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल की ढुलाई करने के आरोप लगते रहे हैं. इन जहाजों की वास्तविक मालिकाना व्यवस्था, बीमा और आवाजाही को लेकर भी सवाल उठते हैं. EU का आरोप है कि Vigor Marine Services LLP ऐसे जोखिम भरे तरीकों से जुड़े जहाजों का प्रबंधन करती है. यूरोपीय संघ ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के प्रस्ताव A.1192(33) में बताए गए अनियमित और जोखिम भरे शिपिंग तरीकों का भी हवाला दिया है.

UAE की कंपनियों पर भी कार्रवाई
प्रतिबंधों की सूची में संयुक्त अरब अमीरात की DIS Logistics DMCC और HURUS TRADE FZE भी शामिल हैं. EU के अनुसार, HURUS TRADE FZE रूस से प्राप्त कच्चे तेल को भारत तक पहुंचाने में कारोबारी मध्यस्थ की भूमिका निभाती है. यह कार्रवाई दिखाती है कि EU अब केवल रूसी कंपनियों पर ही नहीं बल्कि उन विदेशी संस्थाओं पर भी दबाव बढ़ा रहा है. उसके मुताबिक, ये संस्थाएं रूस के तेल कारोबार को जारी रखने या प्रतिबंधों से बचने में मदद करती हैं.

प्रतिबंधों का क्या होगा असर?
EU के फैसले के तहत सूचीबद्ध संस्थाओं की संपत्तियां फ्रीज की जाएंगी. उन्हें सीधे या परोक्ष रूप से धन और आर्थिक संसाधन उपलब्ध कराने पर भी रोक लगेगी. सूची में शामिल व्यक्तियों पर EU में यात्रा प्रतिबंध लागू होंगे. EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा कि प्रतिबंधों से बचने में मदद करना रूस के युद्ध को समर्थन देने जैसा है. उनका कहना है कि EU प्रतिबंधों को प्रभावी बनाकर रूस के लिए युद्ध जारी रखना महंगा करना चाहता है. भारत से जुड़ी कंपनी का नाम सूची में आने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल कारोबार पर सवाल बढ़ सकते हैं. हालांकि, प्रतिबंधों का वास्तविक व्यावसायिक असर कंपनी के कारोबार, उसके जहाजों और संबंधित लेन-देन पर निर्भर करेगा.



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