चीन-उत्तर कोरिया के बीच बढ़ने वाला है ट्रैफिक, खुला ‘दोस्ती वाला ब्रिज’
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China-North Korea New Bridge Opens: चीन-उत्तर कोरिया के बीच एक नए पुल का उद्घाटन हो गया है. इस पुल को दोनों देशों के बीच दोस्ती की मिसाल माना जा रहा है और उनके बीच के व्यापारिक रिश्ते इससे बढ़ने वाले हैं. इतना ही नहीं कूटनीतिक लिहाज से भी ये पुल दोनों देशों की घनिष्ठता को जगजाहिर करने वाला है.
चीन और उत्तर कोरिया के बीच नया पुल 15 अक्टूबर को खुल गया. यह पुल एक दशक से ज्यादा देरी के बाद तैयार हुआ. दोनों देशों के अधिकारियों ने रिबन काटकर इसका उद्घाटन किया. पुल पर चीन और उत्तर कोरिया के झंडे लगे ट्रक खड़े थे. यह चार लेन वाला तीन किलोमीटर लंबा पुल है, जो चीन के उत्तर-पूर्वी शहर दांदोंग को उत्तर कोरिया के शहर सिनुइजू से जोड़ता है. (क्रेडिट- एपी)
दोनों देशों ने कहा कि यह पुल आर्थिक, व्यापारिक और लोगों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ावा देगा. चीनी प्रधानमंत्री ली छियांग ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि चीन और उत्तर कोरिया के संबंध नए चरण में पहुंच गए हैं. एक नया अध्याय शुरू हो रहा है. उन्होंने पुल को दोनों देशों की पारंपरिक दोस्ती का नया प्रतीक बताया और सीमा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही. (क्रेडिट-रॉयटर्स)
उत्तर कोरिया के प्रधानमंत्री पाक थाए सॉन्ग ने भी वीडियो संदेश दिया. उन्होंने कहा कि यह पुल दोनों देशों की समृद्धि और लोगों की भलाई को तेज करेगा. आधिकारिक समाचार एजेंसियों ने इन बयानों को प्रमुखता दी. दोनों पक्षों ने पुल को नई शुरुआत का प्रतीक माना.(क्रेडिट-रॉयटर्स)
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यह पुल पहले 2014 में खुलने वाला था. चीन ने अपनी तरफ का निर्माण तब तक पूरा कर लिया था लेकिन उत्तर कोरिया ने अपनी तरफ काम नहीं किया. सिनुइजू में काम न होने से अटकलें उड़ीं कि प्योंगयांग चीन पर आर्थिक निर्भरता नहीं बढ़ाना चाहता था. संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों पर चीन के रुख से भी नाराजगी हो सकती थी. कुछ पर्यवेक्षकों ने पुल की जगह को लेकर मतभेद भी बताया.(क्रेडिट-रॉयटर्स)
इतना ही नहीं देरी के कारण चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स में तीखी रिपोर्ट छपी थी. दांदोंग के लोगों ने निराशा जताई थी. वे उम्मीद कर रहे थे कि पुल उनके शहर की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा लेकिन लंबे इंतजार के बाद अब यह उम्मीद पूरी हुई है. (क्रेडिट-रॉयटर्स)
नए पुल से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने की उम्मीद है. यह पुराने पुल का बोझ कम करेगा, दांदोंग-सिनुइजू मार्ग पर 70 प्रतिशत से ज्यादा आधिकारिक व्यापार संभालता है. वह पुराना पुल रेलवे और सड़क दोनों के लिए है, लेकिन वाहन एक समय में सिर्फ एक तरफ ही चल सकते हैं. नया पुल आवाजाही को आसान और तेज बनाएगा.(क्रेडिट-रॉयटर्स)
सियोल के प्रोफेसर लीफ-एरिक ईस्ली ने कहा कि नया पुल संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों का उल्लंघन करने वाले व्यापार को भी आसान बना सकता है लेकिन सीमा शुल्क के कारण यह तस्करी से ज्यादा पारदर्शी रहेगा. पुल खुलने के एक महीने पहले रूस और उत्तर कोरिया ने भी सड़क पुल खोला था. (क्रेडिट-रॉयटर्स)
चीन लंबे समय से उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, लेकिन हाल के वर्षों में किम जोंग उन ने मॉस्को को प्राथमिकता दीय उन्होंने यूक्रेन युद्ध में रूस को सैनिक और हथियार भेजे. बदले में सैन्य और आर्थिक मदद ली. अब किम चीन के करीब आ रहे हैं ताकि अर्थव्यवस्था सुधरे और अमेरिका के खिलाफ मोर्चा बने, वहीं चीन अपनी खास प्रभाव वापस पाना चाहता है.(क्रेडिट-रॉयटर्स)
2025 में उत्तर कोरिया के बाहरी व्यापार का 98 प्रतिशत हिस्सा चीन के साथ था. दक्षिण कोरियाई सरकार के अनुसार दोनों देशों की 1400 किलोमीटर लंबी सीमा पर कम से कम 17 सड़क और रेल लिंक सक्रिय हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन उत्तर कोरिया के लिए आर्थिक रूप से अपरिहार्य है. रूस इसकी जगह नहीं ले सकता. यह पुल दोस्ती का प्रतीक बनकर उभरा है, लेकिन इसके साथ क्षेत्रीय समीकरण भी जुड़े हुए हैं. (क्रेडिट- एपी)