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अमेठी में मालती, राधा जैसी महिलाओं की, जिनके हाथों में घर की जिम्मेदारी संभालने वाले उम्र में किताबें हैं और उन्हें यह आश्चर्य नहीं लग रहा बल्कि उनका कहना है की पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है. मैडम पढ़ाती है तो अच्छा लगता है. दरअसल बेसिक शिक्षा विभाग हर वर्ष नव साक्षरता अभियान चलता है. इस अभियान में ऐसी महिलाओं को जोड़ा जाता है, जो महिलाएं साक्षर नहीं है, ऐसी ही महिलाओं को साक्षर बनानें का काम किया जा रहा है.
अमेठीः शिक्षा हमारे बेहतर भविष्य बेहतर जीवन के लिए बेहद आवश्यक है, अगर हम शिक्षित नहीं हो तो हम अपने अधिकारों को नहीं समझ पाएंगे. लेकिन यदि बच्चों के बजाय बड़े शिक्षा लेते नजर आए तो देखने में आश्चर्य जरूर होगा. कुछ ऐसी ही कहानी है अमेठी में मालती राधा जैसी महिलाओं की, जिनके हाथों में घर की जिम्मेदारी संभालने वाले उम्र में किताबें हैं और उन्हें यह आश्चर्य नहीं लग रहा बल्कि उनका कहना है की पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है. मैडम पढ़ाती है तो अच्छा लगता है.
दरअसल बेसिक शिक्षा विभाग हर वर्ष नव साक्षरता अभियान चलता है. इस अभियान में ऐसी महिलाओं को जोड़ा जाता है, जो महिलाएं साक्षर नहीं है, ऐसी ही महिलाओं को साक्षर बनानें का काम किया जा रहा है. अमेठी जिले के गौरीगंज की रहने वाली राधा सिंह, मालती मौर्य जैसी महिलाओं की कहानी है, जो अब काम की उम्र में हाथों में किताबों के जरिए अपना भविष्य बनाकर निपुण होती नजर आ रही है.
पढ़ाई की नहीं होती कोई उम्र मैडम पढ़ाती है तो अच्छा लगता
लोकल 18 से बातचीत में मालती देवी बताती है कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती घर पर काम करते हैं बच्चों के साथ खुद किताब लेकर पढ़ते हैं इसके साथ ही स्कूल में भी हमारी क्लास चलती है मैडम पढातींण है तो अच्छा लगता है पढ़े लिखे रहेंगे तो अधिकार समझ पाएंगे नहीं तो हमारा कोई भी फायदा उठाकर हमें ठग लेगा. वही राधा सिंह बताती है कि जिले में हम सबको शिक्षा का अधिकार दिया जा रहा है पहले तो हम बिल्कुल पढ़े लिखे नहीं थे थोड़ी बहुत जो पढ़ाई की थी वह भूल गए थे और अब वही सब याद आ रहा है बच्चों के साथ हम भी किताबें लेकर बैठते हैं पढ़ते हैं तो बचपन याद आता है और आज हम सब अपना भविष्य बेहतर कर रहे हैं साक्षर होकर अपने अधिकारों को समझ पा रहे हैं.
लोगों को किया जा रहा जागरूक
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय तिवारी ने फोन पर बातचीत में बताया कि ना साक्षरता अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्र और परिवेश में 1570 विद्यालयों में समय-समय पर्याप्त अभियान चलाया जाता है जिसमें ऐसी महिलाओं को जोड़ा जाता है जो साक्षर नहीं है और उन्हें साक्षर बनाकर उनके अधिकारों के प्रति उन्हें जागरूक किया जाता है. इससे बहुत फायदा हो रहा है और महिलाएं जागरूक होने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भी बन रही है